सपनों को हकीकत बनाती मेरी कलम
मेघा
उम्र 18
उत्तराखंड
अपने सपनों को आज शब्दों में ढाल दूँ,
अपनी कलम से हर ख्वाब को सजा लूँ,
जो अरमान छुपे हैं दिल की गहराइयों में,
उन्हें कागज़ पर खुलकर बिखेर दूँ,
दूर कहीं निकल जाऊँ खुले आसमान में,
जहाँ मेरे पंख किसी डर से बंधे न हों,
इस कदर फैलाऊँ अपनी उड़ान को,
कि हर सीमा भी छोटी लगे तूफान में,
आजादी को सिर्फ महसूस ही नहीं,
नया इतिहास लिखते देखना चाहती हूँ,
जो बंद आँखों में देखा है मैंने सपना,
उसे हकीकत में बदलना चाहती हूँ,
अगर एक लड़की के मन में हिम्मत हो,
हौसला और पूरे मन से जब जज़्बा हो,
तो कदम भी साथ मिलकर चलते हैं और,
एक दिन मंजिल तक पहुँच ही जाते हैं।।

