जिला प्रशासन और विकास विभाग के बीच कलयुगी चाणक्य का अभ्युदय
पीडी विकास भवन की नीतिगत बारीकियों से जिला प्रशासन और विकास विभाग में अनबन की आशंका
ब्यूरो चीफ की खास रिपोर्ट
जौनपुर ।जिले में काफी दिनों से अपनी आमद बनाए परियोजना निदेशक का लगाव इस जनपद से बहुत पुराना है सपा शासन काल में सोंधी ब्लॉक के खंड विकास अधिकारी कभी रहे वर्तमान पी डी साहब का रोल इन दिनों चर्चाएं खास में है जिससे विकास विभाग और जिला प्रशासन के बीच कभी भी अनबन की संभावना प्रबल होती दिखाई पड़ रही है राय देहंदाओं की कड़ी में विकास भवन के पी डी वर्तमान समय में सर्वत्र व्याप्त हैं उन्हें जिला प्रशासन और विकास विभाग के कथित जानकारों के रूप में माना जाने लगा है जिससे विकास विभाग में बेहद ध्रुवीकरण की गंभीर समस्याएं निरंतर आसान होती दिख रही है यूं तो स्वयं के पारिवारिक जीवन में ईश्वरी विधान कहा जाए या कुछ और पीडी साहब का जीवन बहुत संघर्ष मय होते हुए भी ईश्वर के विधान पर आधारित है ब्राह्मण होने के बाद भी इन्होंने निजी जीवन में जो निर्णय लिया वह मर्यादा के हनन की श्रेणी में कहीं न कहीं से आता है फिर भी चाटुकारिता और बिना मांगे राय देना इनकी कार्यशैली का प्रमुख हथियार है। अधिकारियों को गुमराह कर उन्हें अपने ढंग से बारीकियां बताकर स्वयं चहेता बने रहने में इन्हें महारथ हासिल है । किसी उच्च अधिकारी के आदेश का अनुसरण इनकी कार्यशाली में नहीं है वह अन्य लोगों से अनुकरण अपने विवेक से कराना बखूबी जानते हैं जिससे आने वाले समय में विकास भवन और जिला प्रशासन में बेहतर सामंजस्य की संभावनाएं क्षीण होती दिख रही हैं। सपा सरकार में पूर्व मंत्री शैलेन्द्र यादव ललई के कोपभाजन का शिकार होकर अपमानित होने के बावजूद भी उक्त अधिकारी के अव्यवहारिक सिद्धान्त अब भी उनके जेहन में यथावत विद्यमान है इसे हठधर्मिता ही कहा जा सकता है ।एक लंबे अरसे से विभिन्न विकासखंडों की समस्याओं और जिले के अन्य विभागों के प्रति विकास भवन की जिम्मेदारी के लिए समाधान का रास्ता ढूंढने वाले राजीव श्रीवास्तव रोशन का नाम विकास भवन की फेहरिस्त में सबसे अग्रणी है बावजूद इसके कुछ गलतफहमियों के जन्म लेने से विकास भवन के मुखिया ने धीरे-धीरे हर पटल पर कुशल अनुशासन के लिए लोगों के पर कतरने शुरू कर दिए जिसकी वर्तमान समय में काफी चर्चा है चाहे विकास खण्डों का प्रकरण हो या बेसिक शिक्षा विभाग जिला कीड़ा या किसी भी विकास की गतिविधियों को नया आयाम देने का प्रकरण हो राजीव श्रीवास्तव कि उसमें अग्रणी भूमिका रहा करती थी लेकिन वर्तमान समय में सब कुछ रार का रूप लेता जा रहा है और जिले का विकास होने के बजाय अवरुद्धता की ओर अग्रसर होता दिखाई पड़ रहा है । वर्तमान समय में यह समूचे जनपद में चर्चाएं खास है लोगों ने कहीं न कहीं से वर्तमान परियोजना निदेशक को आज के परिदृश्य का चाणक्य मानना आरंभ कर दिया है । कहीं न कहीं से इसमें सच्चाई भी आकलित होती जा रही है ।

