अयोध्या।(डा.अजय तिवारी जिला संवाददाता)
जिले में स्थापित विश्व के पटल पर अपना स्थान बनाने वाला आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय अब उन्नति के बाद तेजी से अवनति की ओर अग्रसर हो गया है। कृषि विश्वविद्यालय में शिक्षा का स्तर शिक्षकों की कारस्तानी के चलते अत्यंत निम्न कोटि का होने के कगार पर पहुंच गया है।कृषि विश्वविद्यालय के विभिन्न महाविद्यालयों पशु चिकित्सा एवं पशुपालन, कृषि, उद्यान सहित अन्य महाविद्यालयों में तैनात शिक्षकों में अध्यापन/ शिक्षण से मोहभंग हो गया है। अब इन शिक्षकों में विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पदों एवं दायित्व को संभालने की लोलुपता की अनोखी सी होड़ मच गई है। विश्वविद्यालय के आधा दर्जन से अधिक शिक्षक विश्वविद्यालय के कुलपति की चाटुकारिता करते हुए विश्वविद्यालय के प्रशासनिक पदों को सुशोभित कर छात्र छात्राओं को शिक्षा दीक्षा देना भूल गए हैं, वहीं कृषि विश्वविद्यालय के शिक्षकों में प्रशासनिक पद की होड़ ने चौपट की शिक्षा-दीक्षा, और यही नहीं विश्वविद्यालय के लगभग आधा दर्जन शिक्षकों के पास 4 से 5-5 विभागों एवं अन्य पदों का अतिरिक्त प्रभार है। जिसके चलते अब इन शिक्षकों द्वारा अपने को विश्वविद्यालय का शिक्षक बताने में शर्म महसूस होती है। वह अपने को कृषि विश्वविद्यालय का प्रशासनिक अधिकारी गिनाने में अपनी गरिमा महसूस कर रहे हैं। बताते चलें कि आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज अपने शोध कार्यो तथा उन्नतशील बीजों का उत्पादन करने के चलते विश्व के पटल तक पहुंच चुका था। किंतु कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को अब विश्वविद्यालय से छात्र छत्राओं को उत्तम शिक्षा दीक्षा देकर नए वैज्ञानिक बनाने में कोई रुचि नहीं रह गई है। अब यही शिक्षक विश्वविद्यालय का प्रशासनिक अधिकारी और एक साथ कई विभागों के मलाईदार पदों का अतिरिक्त प्रभार लेकर अपना कर्तव्य एवं दायित्व पूरी तरह से भूल गए हैं। जिसका सारा श्रेय विश्वविद्यालय के कुलपति को जाता है। बताते चलें कि आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय कुमारगंज के पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के शिक्षक सबसे ज्यादा इन पदों को सुशोभित कर रहे हैं और विश्वविद्यालय के पशु चिकित्सा तथा पशुपालन महाविद्यालय की शिक्षा पूरी तरह से चौपट हो चुकी है। पशुपालन एवं पशु चिकित्सा महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ आर के जोशी के पास अधिष्ठाता के अतिरिक्त पांच विभागों का विभागाध्यक्ष एवं विश्वविद्यालय सुरक्षा चेयरमैन, नोडल अधिकारी भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का अतिरिक्त प्रभार है। इसके अलावा उनकी पत्नी डॉ नमिता जोशी के पास विश्वविद्यालय के होम साइंस विभाग का विभागाध्यक्ष एवं सामुदायिक महाविद्यालय के अधिष्ठाता सहित प्रभारी चिकित्सा विश्वविद्यालय परिसर अस्पताल, चेयरमैन डीएवी कॉलेज एवं नोडल अधिकारी एनएएचईपी का अतिरिक्त प्रभार है। इसके अलावा पशुपालन एवं पशु चिकित्सा महाविद्यालय के वेटरनरी पैथोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ डी नियोगी के पास डायरेक्टर विश्वविद्यालय प्लेसमेंट सेल, अधिष्ठाता छात्र कल्याण, पी आई एनएएचईपी का अतिरिक्त प्रभार है। यही नहीं अभी हाल ही में विश्व विद्यालय के निदेशक प्रशासन एवं परिवीक्षण बनाई गई डॉ ए के सिंह (डॉ अशोक कुमार सिंह) के पास विभागाध्यक्ष फसल एवं कार्यकी विभाग, डायरेक्टर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फार राइस का भी अतिरिक्त प्रभार। इसके अलावा विश्वविद्यालय में बिना शासन से अनुमति लिए एक नया विभाग नियुक्ति सेल के नाम बना दिया गया है। जिसमें पशुपालन एवं पशु चिकित्सा महाविद्यालय के ही शिक्षक डॉ भूपेंद्र सिंह को सदस्यों लीगल सेल के नोडल अधिकारी के दायित्व का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। यही नहीं विश्वविद्यालय के कुलपति के निजी सचिव पद पर पशु चिकित्सा एवं पशुपालन महाविद्यालय के ही प्राध्यापक डॉ यशवंत सिंह को तैनाती दी गई है। यह अतिरिक्त प्रभार और प्रशासनिक अधिकारी पद का दायित्व संभालने वाले शिक्षक अपने मूल कर्तव्य एवं दायित्व को भूल गए हैं। इन सभी प्रशासनिक अधिकारियों का बसेरा कुलपति कार्यालय के इर्द गिर्द ही रहता है और उन्हें आलीशान ऑफिस भी सौंप दिए गए हैं। जिसमें वह बैठकर अफसरशाही का रौब गालिब करते हैं। फिलहाल यह तो मात्र वानगी भर है। इसके अतिरिक्त विश्वविद्यालय के अन्य कई शिक्षकों के पास भी ऐसे ही अतिरिक्त प्रभार वाले पद सौपें गए हैं, जो विश्वविद्यालय की शिक्षा दीक्षा को चौपट करने के लिए नाकाफी है। सबसेे ज्यादा अतिरिक्त प्रभार प्राप्त करने वाले शिक्षको मेंं पशुपालन एवं पशु चिकित्सा महाविद्यालय के ही शिक्षक हैं।

