राष्ट्रीय युवा वाहिनी की बड़ी पहल: पूरे भारत में गुरुकुल निर्माण अभियान तेज, गौ संरक्षण और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर

राष्ट्रीय युवा वाहिनी की बड़ी पहल: पूरे भारत में गुरुकुल निर्माण अभियान तेज, गौ संरक्षण और संस्कारयुक्त शिक्षा पर जोर
लखनऊ।
राष्ट्रीय युवा वाहिनी एवं राष्ट्रीय युवा वाहिनी नेशनल वालंटियर भाजपा परिवार द्वारा देशभर में एक व्यापक और महत्वाकांक्षी अभियान के तहत गुरुकुल निर्माण कार्य तेजी से संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का उद्देश्य सनातन संस्कृति के संरक्षण, गौ वंश सुरक्षा, संस्कारयुक्त शिक्षा और राष्ट्र निर्माण को सशक्त आधार प्रदान करना है।
संगठन द्वारा “सनातन बोर्ड हिंदू राष्ट्र गुरुकुल गौशाला शिक्षा” के अंतर्गत सीबीएसई बोर्ड पैटर्न पर आधारित आधुनिक एवं संस्कारयुक्त गुरुकुल स्थापित किए जा रहे हैं, जहां “वन क्लास, वन ऑफिसर” की अवधारणा के साथ शिक्षा दी जाएगी। इसमें विद्यार्थियों को न केवल शैक्षणिक ज्ञान बल्कि नैतिकता, संस्कृति और राष्ट्रभक्ति के संस्कार भी प्रदान किए जाएंगे।
संगठन के अनुसार, भारत के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों में गुरुकुल निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और प्रत्येक प्रदेश में कम से कम 5 गुरुकुलों के शुभारंभ का लक्ष्य रखा गया है। यह अभियान पूरे देश में एक समान रूप से चलाया जा रहा है।
इन राज्यों में चल रहा है गुरुकुल निर्माण कार्य:
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, छत्तीसगढ़, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, सिक्किम, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल और गोवा।
केंद्र शासित प्रदेशों में भी अभियान जारी:
दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, चंडीगढ़, दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और पुडुचेरी।
संगठन ने बताया कि इस अभियान के तहत गुरुकुलों के साथ गौशालाओं का भी निर्माण किया जा रहा है, जिससे गौ वंश की सुरक्षा और सेवा को सुनिश्चित किया जा सके। यह पहल न केवल शिक्षा बल्कि संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
साथ ही, संगठन ने सभी साथियों और आमजन से अपील की है कि वे गौ वंश सुरक्षा और गुरुकुल निर्माण जैसे पवित्र कार्यों में अपनी सहभागिता सुनिश्चित करें। इसके लिए “हाँ” या “ना” में अपनी राय देने के साथ-साथ अपने सुझाव भी साझा करने का अनुरोध किया गया है।
संगठन का मानना है कि जनसहयोग और सामूहिक प्रयास से ही इस महाअभियान को सफल बनाया जा सकता है और भारत को पुनः सांस्कृतिक रूप से सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित किया जा सकता है।

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