आग लगने की सूचना घबराहट मे न दे लोग – सीएफओ
(राजेश श्रीवास्तव ब्यूरो चीफ)
अयोध्या।आग लगने की सूचना अग्निशमन नियंत्रण कक्ष को बिना घबराहट के दे।इस संबंध में बात करते हुए सीएफओ एमपी सिंह ने जिले वासियों से अपील किया कि आग लगने की सूचना देने वाले व्यक्ति यह जरूर बताएं कि आग कहां पर लगी है वहां पर छोटी दमकल जा सकती है या बड़ी दमकल।इन वाहनों के जाने के लिए घटनास्थल तक सड़क है या नहीं।उसी हिसाब से मुख्यालय से छोटे बड़े दमकल घटना स्थल तक भेजी जाए उन्होंने बताया कि प्राय यह देखने में आता है की लोग घबराहट में आग लगने की सूचना तो मुख्यालय को दे देते हैं लेकिन सही-सही जानकारी नहीं देते कि आज कहां लगी है वहां पर कौन सी दमकल जा सकती है।जहां पर आग लगी है वह गली के अंदर है यह मुख्य मार्ग पर उन्होंने लोगों से अपील किया कि जब जिला मुख्यालय को सही सूचना मिलेगी तो इस सूचना के आधार पर यहां से अग्निशमन विभाग के वहां जाकर आग पर काबू पा सकेंगे।उन्होंने बताया इस समय अग्निशमन जागरूकता सप्ताह चलाया जा रहा है।शहर के अलावा जिले के विभिन्न तहसीलों में स्थित स्कूलों कॉलेज बाजारों सहित अन्य प्रमुख चौराहों पर पंपलेट पोस्टर बैनर तथा रैलियों के माध्यम से वहां के लोगों को आग से बचाव हेतु जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि इस समय अप्रैल माह चल रहा है अप्रैल में जून 3 माह में अधिक आग लगने की घटनाएं घटित होती हैं इसलिए आज से बचाव है तू जानकारी रखनी चाहिए साथ ही साथ सावधानी भी बरतनी चाहिए क्योंकि एक छोटी सी हल्की सी लापरवाही बहुत बड़े नानी का कारण बन सकती है। उन्होंने शहर वासियों तथा ग्राम वासियों से अपील किया है कि वे सभी रात में सोते समय सिलेंडर का उपयोग न होने पर रेगुलेटर से गैस को बंद कर दे। वही अगर कोई शादी विवाह या अन्य मांगलिक कार्यक्रमों में अपने घरों से जा रहा है तो एमसी और कोशिश या रहे मैन स्विच से लाइट को बंद कर दे जिससे कि शार्ट सर्किट से अप्रिय घटना को रोका जा सके। उन्होंने वही ग्रामीण क्षेत्र के लोगों तथा किसानों से भी अपील किया है कि इस समय गर्मी चरम पर है और खासकर गेहूं की फसलों में आग लगने की घटनाएं अधिक हो रही है इसलिए कोसी से ही रहे की किसान भाई तथा अन्य लोग खेतों के आसपास धूमपान ना करें क्योंकि एक छोटी सी चिंगारी पूरे गेहूं के खेत को जला सकती है।वही ग्रामीण अंचलों की महिलाओं से भी अपील किया है की चूल्हे पर खाना बनाने के बाद उसके रख को पानी से पूरी तरह से बुझा दें और तीन-चार घंटे बाद ही बाहर फेके और कोशिश यह रहे जहां पर ठेके वहां पर कूढे ना इकट्ठे हो

