AIIMS सहित दिल्ली के कई बड़े अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी: बीमार जनता होती है परेशान
दिल्ली ब्यूरो चीफ: पी अस्थाना
दिल्ली के बड़े सरकारी अस्पतालों जैसे एम्स, सफदरजंग में डॉक्टरों की कमी से मरीजों को इलाज में देरी और सर्जरी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ता जा रहा है। रेजिडेंट डॉक्टर्स किसी भी अस्पताल की बैकबोन होते हैं। इलाज की प्राइमरी केयर इन्हीं डॉक्टरों के कंधों पर होती है। लेकिन AIIMS सहित सफदरजंग, RML, लेडी हार्डिंग जैसे बड़े अस्पतालों में भी डॉक्टरों की कमी बनी हुई है। इसका असर इलाज पर पड़ रहा है और OPD की बढ़ती भीड़ और सर्जरी में लंबी वेटिंग की यह एक बड़ी वजह बन रही है। AIIMS में जहां फैकल्टी की कुल स्ट्रेंथ में से लगभग 35 पर्सेंट पोस्ट खाली हैं, वहीं पिछले तीन सालों में यहां काम कर रहे 42 डॉक्टरों ने रिजाइन भी कर दिया है।
AIIMS जो देश के बाकी अस्पतालों के लिए मार्गदर्शक की तरह माना जाता है, वहां इतनी बड़ी संख्या में रेजिडेंट डॉक्टर और फैकल्टी के पद खाली होना चिंता की बात है। AIIMS में फैकल्टी के कुल 1306 पद हैं, जिनमें से 452 खाली हैं, यानी 34.6 पर्सेंट पद खाली पड़े हैं। लेकिन सबसे बड़ी परेशानी रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी को लेकर है। AIIMS का ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी सेवा 24 घंटे चलती है, ऐसे में सीनियर और जूनियर रेजिडेंट डॉक्टरों की कमी सेवाओं को प्रभावित कर सकती है। AIIMS सूत्रों के अनुसार, सीनियर रेजिडेंट्स के 530 पद खाली हैं, जिन्हें भरना बेहद जरूरी है। वहीं, नॉन फैकल्टी के कुल 13,911 पदों में से 2,540 खाली हैं, यानी करीब 18 पर्सेंट सीटें खाली हैं। सरकार से अपील है कि खाली पदों को जितना जल्दी हो सके भरने के लिए कार्यवाही करें। ताकि आम जनता को कोई दिक्कत नहीं हो सके।

