*खजनी तहसील में ADM की छापेमारी से मचा हड़कंप, प्राइवेट मुंशियों की गैरमौजूदगी ने खड़े किए सवाल*
— पारदर्शिता और व्यवस्था में सुधार की उम्मीदें, लेकिन स्थायी समाधान पर संशय बरकरार
गोरखपुर ब्यूरो चीफ
खजनी — खजनी तहसील में बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) बिनीत कुमार सिंह ने अचानक छापेमारी की। यह कार्रवाई जिला प्रशासन द्वारा तहसील कार्यालय में प्राइवेट कर्मचारियों की अनियमित भूमिका को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों के बाद की गई।
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के समय कोई भी प्राइवेट मुंशी तहसील परिसर में मौजूद नहीं था। माना जा रहा है कि जांच दल के आने की सूचना पहले ही लीक हो गई थी, जिससे सभी संदिग्ध प्राइवेट कर्मचारी मौके से फरार हो गए।
प्राइवेट मुंशियों द्वारा लंबे समय से राजस्व व प्रशासनिक कार्यों में हस्तक्षेप की खबरें मीडिया और सोशल मीडिया पर लगातार सामने आ रही थीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी डॉ. कृष्ण कुमार करुणेश ने तत्काल जांच के आदेश दिए और ADM को कार्रवाई के लिए भेजा।
*SDM का बयान*
एसडीएम खजनी राजेश प्रताप सिंह ने पुष्टि करते हुए कहा, “ADM द्वारा की गई छापेमारी में कोई प्राइवेट मुंशी नहीं मिला। लेकिन इस कार्रवाई से यह स्पष्ट संकेत गया है कि प्रशासन अब अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए है।”
प्रशासन की सख्ती या मात्र दिखावा?
छापेमारी भले ही चेतावनी के रूप में देखी जा रही हो, लेकिन यह सवाल भी खड़ा हो गया है कि क्या इससे तहसील में व्याप्त वर्षों पुरानी व्यवस्था व गैरकानूनी प्रभाव में वाकई बदलाव आएगा? या यह सिर्फ एक औपचारिकता बनकर रह जाएगा?
स्थायी समाधान की जरूरत
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल छापेमारी से नहीं, बल्कि तकनीकी निगरानी, स्टाफ की पारदर्शी तैनाती और स्पष्ट जवाबदेही तय कर ही इन समस्याओं पर स्थायी रोक लगाई जा सकती है।
ADM की छापेमारी ने निश्चित रूप से तहसील में एक हलचल तो मचा दी है, लेकिन असली बदलाव तभी दिखेगा जब प्राइवेट कर्मचारियों की जगह प्रशिक्षित सरकारी कार्मिकों को कार्य सौंपा जाएगा और हर स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी। आने वाले दिनों में देखना होगा कि प्रशासन इस अभियान को कितनी गंभीरता और निरंतरता के साथ आगे बढ़ाता है।

