जिदंगी संवारना चाहती हूँ
प्रिया
कक्षा – 4
सुराग, उत्तराखंड
हाँ मैं भी तो खूब पढ़ना चाहती हूँ,
समाज में आगे बढ़ना चाहती हूं,
कुप्रथाओं से जंग लड़ना चाहती हूँ,
ख्वाब को हकीकत बनाना चाहती हूँ,
हाँ, मैं भी तो कुछ करना चाहती,
अपनी जिंदगी को संवारना चाहती हूँ,
जीवन में कुछ नया करना चाहती हूं,
मैं भी पढ़ना लिखना चाहती हूँ।।

