जौनपुर उ0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देशानुसार एवं माननीय जनपद न्यायाधीश/अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण एम0पी0 सिंह के निर्देशों एवं अनुमति से तथा कोविड-19 के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में सचिव, पूर्णकालिक जिला विधिक सेवा प्राधिकरण श्रीमती शिवानी रावत द्वारा 04 जनवरी 2022 को जिला कारागार, जौनपुर का वीडियों कालिंग के माध्यम से निरीक्षण एवं विधिक साक्षरता शिविर का आयोजन किया गया।
निरीक्षण में जेलर द्वारा बताया गया कि जिला कारागार में कुल 1173 बन्दी है, जिनमें पुरूष 1080 महिला 56 तथा 37 अल्पवयस्क हैं। कुल बन्दियों में 140 सिद्धदोष तथा 914 विचाराधीन बन्दी हैं। कारागार में निरूद्ध महिला बन्दियों के साथ कुल 10 बच्चे हैं। जिसमें से 06 बालिकाएं तथा 4 बालक है। महिला बन्दियों के साथ रह रहे बच्चों के नाश्ता, भोजन आदि की उपलब्धता के सम्बन्ध में पूॅंछे जाने पर महिला बन्दियों द्वारा बताया गया कि बच्चों को समय से नाश्ता एवं भोजन उपलब्ध कराया जाता है किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं है। 01 बंदी पूर्व में कोविड संक्रमित था जो पूरी तरह ठीक हो चुका है। वाह्य अस्पताल में कुल 12 बंदी है।
‘‘प्ली बारगेनिंग’’ के विषय पर विस्तृत जानकारी देते हुए यह बताया गया कि ‘‘प्ली बारगेनिंग’’ के द्वारा दाण्डिक अभियोजन व पीड़ित पक्ष आपसी सामन्जस्य से आपराधिक प्रकरण के निपटारे हेतु न्यायालय के अनुमोदन से एक रास्ता निकालते है। भारतीय दाण्डिक न्याय व्यवस्था में इस सम्बन्ध में प्रावधान दण्ड प्रक्रिया संहिता संशोधन अधिनियम 2/2006 के द्वारा ‘‘प्ली बारगेनिंग’’ शीर्षक से एक नया अध्याय 21ए (धारा 265ए-265एल द0प्र0सं0) के नाम से जोड़ा गया था, सचिव के द्वारा यह बताया गया कि ‘‘प्ली बारगेनिंग’’ के तहत अभियुक्त को अपराध की स्वीकृति करने पर हल्के दण्ड से दण्डित किया जाता है जो कि अन्यथा कठोर हो सकता है। इसके तहत अभियुक्त कम सजा के बदले में अपने द्वारा किये गये अपराध को स्वीकार करके पीड़ित व्यक्ति को हुए नुकसान और मुकदमें के दौरान हुए खर्चे की क्षतिपूर्ति करके कठोर सजा से बच सकता है। ‘‘प्ली बारगेनिंग’’ का लाभ ऐसे अपराधों में लिया जा सकता है जिसमें अधिकतम सजा 07 वर्ष से अधिक न हो, अपराध देश की सामाजिक, आर्थिक स्थिति को प्रभावित न करती हो ऐसे अपराध जो महिलाओं अथवा 14 वर्ष से कम आयु में बच्चों के साथ कारित न किये गये हो। सचिव द्वारा बताया गया कि दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 436ए के अन्तर्गत ऐसे विचाराधीन बंदी जो कि मृत्युदण्ड से दण्डनीय अपराध के अन्यथा अपराध के लिए निरूद्ध है, उन्हें आरोपित अपराध के लिए अधिकतम प्रावधानित सजा की आधी अवधि का कारावास भुगत लेने पर जमानत पर रिहा किया जा सकता है।
सचिव द्वारा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा प्रदान करायी जाने वाली निःशुल्क विधिक सहायता की विस्तृत जानकारी प्रदान की गयी। किसी भी बन्दी को मुकदमें में पैरवी हेतु निःशुल्क अधिवक्ता की आवश्यकता होने पर उनके प्रार्थना पत्र प्रेषित किया जाना सुनिश्चित किये जाने हेतु एवं बन्दियों की चिकित्सा व्यवस्था एवं बैरकों व जेल परिसर की साफ-सफाई व्यवस्था दुरूस्त रखे जाने एवं समयपूर्व रिहाई के पात्र बन्दियों को चिन्हित कर उनके प्रार्थना पत्र तैयार कर नियमानुसार अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित किये जाने हेतु जेल अधीक्षक को निर्देशित किया गया।
इस अवसर पर जेल अधीक्षक एस0के0 पान्डेय, भदौरिया जेलर कुलदीप सिंह, राजकुमार सिंह, धर्मेन्द्र कुमार भदौरिया व डिप्टी जेलर श्रीमती माया सिंह, चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट, पीएलवीगण व अन्य बन्दीगण उपस्थित रहे।

