दिल्ली उच्च न्यायालय ने एआईसीटीई को लगाई फटकार, टूटा को मिली जीत

आर एल पाण्डेय
लखनऊ। टेक्निकल यूनिवर्सिटीज टीचर्स एसोसिएशन ‘टूटा’ द्वारा कई निजी इंजीनियरिंग शिक्षण संस्थानों के विरुद्ध नियमों की अनदेखी (वेतन आयोग के अनुसार वेतन न देना खासकर राज्य सरकार द्वारा निर्धारित डीए ना देना, फर्जी शिक्षकों का नाम एआईसीटीई और विश्वविद्यालय को देना, अवैध टर्मिनेशन, इत्यादि) के कारण एआईसीटीई में शिकायत दर्ज कराई गई, जिसमे कुछ गाजियाबाद एवं ग्रेटर नोएडा के नामी गिरामी संस्थान शामिल थे।
एआईसीटीई ने अपने फैसले में माना कि संस्थान एआईसीटीई के नियमुसार नहीं चल रहे हैं एआईसीटीई द्वारा दिए और शिक्षकों की संख्या वेरीफाई करने के लिए सैलरी ट्रांसफर का बैंक स्टेटमेंट और टीडीएस की कॉपी मांगने पर भी संस्थानों ने उपलब्ध नहीं कराया l उसके बाद भी एआईसीटीई ने लीपापोती करते हुए उन्हें वेतन आयोग के अनुसार वेतन देने का आदेश पारित किया किन्तु साथ ही साथ संस्थानों के मालिकों के दवाब में टूटा को भविष्य में शिकायत करने से रोकने का आदेश पारित किया था।
इससे कॉलेज संस्थाओं को एक राहत मिली कि अब वो अपनी मन मानी कर सकते हैं।
इसके फैसले के विरुद्ध टूटा दिल्ली हाई कोर्ट गया और कोर्ट ने एआईसीटीई को आदेश दिया कि वो टूटा को एक बार फिर से सुने और पूरे मुद्दे को पुनर्विचार करें।

टूटा सचिव गौरव शर्मा ने बताया कि यह जीत सिर्फ टूटा पदाधिकारियों की ही नहीं अपितु हजारों शिक्षकों की भी है और इस जीत के लिए संघर्षरत रहे टूटा संस्थापक और अध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार को सभी शिक्षकों द्वारा बधाई दी गई ।
उन्होंने बताया की उनका आंदोलन अब एक बार फिर से उठ खड़ा होगा और संस्थानों की मनमानी नहीं चलने देगा।

प्रो. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि प्रदेश के दो बड़े कॉलेज यह दावा करते हैं उनके द्वारा दिया जाने वाला डीए का प्रतिशत सबसे ज्यादा है, जो कि 68 से 72 प्रतिशत के लगभग है और छात्रों की फीस बढ़ने पर ही कॉलेज डीए प्रतिशत बढ़ा सकते हैं, यह दावा बिलकुल खोखला है क्योंकि छात्रों की फीस छठवें वेतन अयोग को ध्यान में रखकर ही तय की जाती है।
अभिभावक मोटी फीस छठवें और सातवें वेतन आयोग के हिसाब से ही फीस दे रहे हैं किंतु शिक्षक को तकरीबन 82 प्रतिशत वेतन कम मिल रहा है जिससे शिक्षा की गुणवाता पर भी असर आता है।
उन्होंने यह भी बताया कि तकनीकी शिक्षा की अच्छी गुणवत्ता, शिक्षकों के अधिकार, छात्रों के अधिकार एवं शिक्षण संस्थान को सुचारू रूप से चलाने के लिए संगठन हर तरीके से संघर्ष जारी रखेगा l यह जीत 5 लाख से अधिक शिक्षकों के साथ-साथ 12 लाख से अधिक छात्र एवं अभिभावकों के लिए भी है जो इस तरह के संस्थानों में पूरे भारत में पढ़ाई कर रहे हैं l

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