(नईदिल्ली)एनएसजी अकादमी में पहला महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम शुरू, आतंकवाद रोधी अभियानों में बढ़ेगी महिलाओं की भूमिका
नई दिल्ली, 25 अगस्त(आरएनएस)। देश के आतंकवाद रोधी सुरक्षा ढांचे में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मानेसर स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) प्रशिक्षण अकादमी ने राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महिला कर्मियों के लिए पहला महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम शुरू किया है।
12 सप्ताह का यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार, 24 अगस्त से शुरू हुआ। इसका उद्देश्य चयनित महिला कर्मियों को शारीरिक रूप से सक्षम, तकनीकी रूप से दक्ष और अभियान के लिए पूरी तरह तैयार कमांडो के रूप में प्रशिक्षित करना है, ताकि वे आतंकवाद रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों में कठिन जिम्मेदारियां निभा सकें।
इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला प्रशिक्षुओं को कड़ी शारीरिक प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके अलावा उन्हें उन्नत हथियार संचालन, निशानेबाजी, सामरिक हस्तक्षेप, बंधक मुक्ति और आतंकवाद रोधी अभियानों से जुड़े अन्य विशेष कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पहल से सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या के स्तर पर ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि उन्हें जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षता तथा पेशेवर कौशल भी हासिल होंगे।
कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड आतंकवाद रोधी अभियानों से जुड़ी अपनी विशेष विशेषज्ञता राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महिला कर्मियों के साथ साझा करेगा। इससे देशभर में प्रशिक्षित महिला सुरक्षा कर्मियों का एक मजबूत समूह तैयार होने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण से विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच समान पेशेवर मानकों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कठिन अभियानों के दौरान केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
एक अधिकारी ने कहा कि आतंकवाद रोधी अभियानों में अक्सर कई सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता होती है। विभिन्न बलों की महिला कर्मियों को एक साझा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित करने का उद्देश्य देश के सुरक्षा ढांचे में अधिक एकीकृत और व्यापक अभियान क्षमता विकसित करना है।
पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद प्रशिक्षित महिला कर्मी बेहतर अभियान कौशल और विशेष प्रशिक्षण के साथ अपने-अपने मूल सुरक्षा बलों में वापस लौटेंगी। वहां उनकी विशेषज्ञता का उपयोग आतंकवाद रोधी अभियानों के साथ-साथ व्यापक सुरक्षा जिम्मेदारियों में किया जा सकेगा।
इससे राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संस्थागत तैयारी मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही विशेष अभियानों के लिए सीमित संख्या में उपलब्ध प्रशिक्षित कर्मियों पर निर्भरता कम होगी और कठिन अभियानों के लिए प्रशिक्षित महिला कमांडो की उपलब्धता बढ़ेगी।
अधिकारियों के अनुसार, बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच बंधक मुक्ति, सामरिक हस्तक्षेप और नजदीकी मुकाबले जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण और उच्च स्तर की अभियान क्षमता आवश्यक है।
ऐसे में पहला महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से कहीं आगे की पहल है। यह महिलाओं को महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारियों के लिए आवश्यक पेशेवर और अभियान संबंधी क्षमताओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस पहल के माध्यम से महिलाओं को देश की आतंकवाद रोधी और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में सुरक्षा अभियानों में प्रशिक्षित महिला कमांडो की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।
००
नई दिल्ली, 25 अगस्त(आरएनएस)। देश के आतंकवाद रोधी सुरक्षा ढांचे में महिलाओं की भूमिका को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए मानेसर स्थित राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) प्रशिक्षण अकादमी ने राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महिला कर्मियों के लिए पहला महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम शुरू किया है।
12 सप्ताह का यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सोमवार, 24 अगस्त से शुरू हुआ। इसका उद्देश्य चयनित महिला कर्मियों को शारीरिक रूप से सक्षम, तकनीकी रूप से दक्ष और अभियान के लिए पूरी तरह तैयार कमांडो के रूप में प्रशिक्षित करना है, ताकि वे आतंकवाद रोधी और आंतरिक सुरक्षा अभियानों में कठिन जिम्मेदारियां निभा सकें।
इस गहन प्रशिक्षण कार्यक्रम में महिला प्रशिक्षुओं को कड़ी शारीरिक प्रशिक्षण प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके अलावा उन्हें उन्नत हथियार संचालन, निशानेबाजी, सामरिक हस्तक्षेप, बंधक मुक्ति और आतंकवाद रोधी अभियानों से जुड़े अन्य विशेष कौशल का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इस पहल से सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या के स्तर पर ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि उन्हें जोखिमपूर्ण और चुनौतीपूर्ण अभियानों के लिए आवश्यक व्यावहारिक दक्षता तथा पेशेवर कौशल भी हासिल होंगे।
कार्यक्रम के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड आतंकवाद रोधी अभियानों से जुड़ी अपनी विशेष विशेषज्ञता राज्य पुलिस बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की महिला कर्मियों के साथ साझा करेगा। इससे देशभर में प्रशिक्षित महिला सुरक्षा कर्मियों का एक मजबूत समूह तैयार होने की उम्मीद है।
अधिकारियों के अनुसार, इस प्रशिक्षण से विभिन्न सुरक्षा बलों के बीच समान पेशेवर मानकों को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही कठिन अभियानों के दौरान केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।
एक अधिकारी ने कहा कि आतंकवाद रोधी अभियानों में अक्सर कई सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की आवश्यकता होती है। विभिन्न बलों की महिला कर्मियों को एक साझा विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से प्रशिक्षित करने का उद्देश्य देश के सुरक्षा ढांचे में अधिक एकीकृत और व्यापक अभियान क्षमता विकसित करना है।
पाठ्यक्रम पूरा करने के बाद प्रशिक्षित महिला कर्मी बेहतर अभियान कौशल और विशेष प्रशिक्षण के साथ अपने-अपने मूल सुरक्षा बलों में वापस लौटेंगी। वहां उनकी विशेषज्ञता का उपयोग आतंकवाद रोधी अभियानों के साथ-साथ व्यापक सुरक्षा जिम्मेदारियों में किया जा सकेगा।
इससे राज्य पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की संस्थागत तैयारी मजबूत होने की उम्मीद है। साथ ही विशेष अभियानों के लिए सीमित संख्या में उपलब्ध प्रशिक्षित कर्मियों पर निर्भरता कम होगी और कठिन अभियानों के लिए प्रशिक्षित महिला कमांडो की उपलब्धता बढ़ेगी।
अधिकारियों के अनुसार, बदलती सुरक्षा चुनौतियों के बीच बंधक मुक्ति, सामरिक हस्तक्षेप और नजदीकी मुकाबले जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए विशेष प्रशिक्षण और उच्च स्तर की अभियान क्षमता आवश्यक है।
ऐसे में पहला महिला कमांडो रूपांतरण पाठ्यक्रम सुरक्षा बलों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने से कहीं आगे की पहल है। यह महिलाओं को महत्वपूर्ण सुरक्षा जिम्मेदारियों के लिए आवश्यक पेशेवर और अभियान संबंधी क्षमताओं से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस पहल के माध्यम से महिलाओं को देश की आतंकवाद रोधी और आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था में अधिक प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाएगा, जिससे आने वाले समय में सुरक्षा अभियानों में प्रशिक्षित महिला कमांडो की भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।
००

