कोरोना की दस्तक ने लोगों को इस कदर डरा दिया था कि जरा सा जुकाम होने पर लोग तनाव में आ जाते थे। लोगों के जेहन में एक ही बात आती थी कि संक्रमण का मतलब सीधा मौत के मुंह में जाना। इन सबके बीच कोरोना जांच की जिम्मेदारी सबसे बड़ी थी। अनजान वायरस की जांच के लिए कोई तैयार नहीं था। लेकिन, बीआरडी मेडिकल कॉलेज की माइक्रोबायोलॉजी विभाग की टीम ने जांच करने का फैसला लिया और जांच शुरू की।
यहां की टीम कोरोना की पहली लहर से लेकर अब तक 20 लाख सैंपल की जांच कर चुकी है। जांच के दौरान यहां की पूरी टीम संक्रमित भी हुई, लेकिन हौसला नहीं खोया। इसके बाद भी सतत जांच की प्रक्रिया जारी रखी। वहीं, कोरोना महामारी के बीच गर्भवतियों के लिए बड़ी मुसीबतें आईं। सुरक्षित प्रसव कराकर जज्चा और बच्चा को स्वस्थ रखना बड़ी चुनौती थी, जिसे बीआरडी मेडिकल कॉलेज की स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की टीम ने बखूबी किया। इसका असर यह रहा है कि कोरोना संक्रमित गर्भवती के बच्चे संक्रमण का शिकार तो हुए, लेकिन उनकी जान नहीं गई।

