शहर की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था लेखिका संघ बरेली के तत्वाधान में मीरा प्रियदार्शनी के आवास पर कवि गोष्ठी का आयोजन सम्पन्न
देश की उपासना ब्यूरो
बरेली. आज दिनांक 31 अक्टूबर को शहर की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था लेखिका संघ बरेली के तत्वाधान में मीरा प्रियदार्शनी के आवास पर कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि राजेश गौड़ ने की। कवि गोष्ठी का शुभारम्भ वरिष्ठ गीतकार कमल सक्सेना द्वारा माँ सरस्वती की वंदना से किया गया। संरक्षक श्रीमती निर्मला सिँह ने कहा,,,
खिलने से पहले मुरझायें ऐसे फूलों का हार न देना।
अंगारों से जल जाये वो लम्हें वो प्यार न देना।
संस्था की अध्यक्ष दीप्ती पांडे नूतन ने अपनी ग़ज़ल पढ़ते हुए कहा कि,,,
आदतन प्यार मै लुटती हूं ।
फिर भी जीती बाजी हार जाती हूं ।।
ख्वाहिशों के शहर अब अलविदा तुझको।
दुनिया अपनी नई एक और बसाती हूं ।
गोष्ठी में कमल सक्सेना ने कई श्रृंगार के मुक्तक पढ़े जिस. पर भरपूर तालियाँ मिली। अपना गीत पढ़ते हुए कमल सक्सेना ने कहा कि,,,
हमको तुमसे यही गिला है भूल गये पतवारों को। मँझधारों से हाथ मिलाया धोखा दिया किनारो को।
आना मिलना और बिछुड़ना जग की रीत पुरानी है। जिन आँखों में नीर भरा हो समझो प्रेम निशानी है।
एक बार तो देखा होता हम जैसे किरदारों को।
राजेश गौड़ ने कहा कि,,,
मेरे देश तुझको ये क्या हो गया है. कहाँ पर रुकेगी ये नफरत की आंधी।
संस्था की महासचिव डॉ किरण कैंथवाल ने अपनी ग़ज़ल कुछ ऐसे पढ़ी,,,,सवालों के घेरे में खुद को रोज पाती हूँ.। मची कैसी ये हलचल है तेरे और मेरे दिल में। यही सब सोचकर मैं तो खुद में डूब जाती हूँ।
हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष ने एक बहुत ही खूबसूरत शेर से अपने काव्य पाठ की शुरुवात की,, उन्होंने कहा कि,,,
यकीं आता नहीं केवल नज़ारों की गवाही पर, सुना है कान भी अक्सर नज़र को बरगलाते है।
मीना अग्रवाल ने अपनी ग़ज़ल कुछ ऐसे पढ़ी,, तुम मेरे हो किसी और के नहीं। मंजूर बंटवारा किसी तौर पे नहीं।
मीरा प्रियदार्शनी ने सनातनी सभ्यता पर पंक्तियाँ. पढ़ते हुए कहा कि,,,
चार महीने सोये थे देव अब जागें हैँ आज सवेरे। घंटे बजते दीप जलते हर घर में खुशियों के डेरे,,
मोना प्रधान ने अपना गीत पढ़ते हुए कहा कि,,, ये नदिया की धारें तुझको पुकारें। चलाचल मुसाफिर किनारे किनारे।
अनुराग त्यागी ने कहा कि,,
फल फूल रहा है भ्र्ष्टाचार का बाजार.
आओ इसके चेहरे का करायें साक्षात्कार।
नयाय भी इसके सामने घुटने टेके ईमानदारी हो जाये लाचार.
कवि गोष्ठी में शैलजा भारद्वाज, अल्पना नारायण, अविनाश अग्रवाल आदि की गज़लों पर सभी ने जमकर तालियाँ बजायीं। कवि गोष्ठी का सफल संचालन कवि शायर हिमांशु श्रोत्रिय निष्पक्ष ने किया। अंत में आयोजक श्रीमती मीरा प्रियदार्शनी ने सभी का आभार प्रकट किया और कहा कि बहुत दिनों बाद आज मेरे आवास पर साहित्यकारों के कदम पड़े है जिसके लिये मैं बहुत बहुत आभारी हूँ। इसके साथ ही उन्होंने सभी को स्वादिष्ट भोजन के लिये आमंत्रित किया।
🌎 कमल सक्सेना कवि गीतकार बरेली 🌎

