(बीजिंग/काठमाण्डू)नेपाल की बाढ़ से चीन में भी मची तबाही, ग्यिरोंग बंदरगाह तबाह; तीन लोगों की मौत, 558 लापता
बीजिंग/काठमांडू,27 अगस्त। नेपाल और तिब्बत सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में बुधवार को शक्तिशाली भूस्खलन के बाद आई विनाशकारी बाढ़ ने नेपाल के साथ चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में भी भारी तबाही मचाई है। नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या 175 के पार पहुंच गई है, जबकि 900 से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। इनमें करीब 300 भारतीय नागरिक शामिल हैं। दूसरी ओर, चीन के तिब्बत क्षेत्र में भी बड़े पैमाने पर जान-माल और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में हिमनद का एक बड़ा हिस्सा टूटकर घाटी में गिर गया। इसके साथ भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान, पानी और मिट्टी भी नीचे आ गई। इस घटना के कारण नेपाल-तिब्बत सीमा पर भोटेकोशी नदी की सहायक नदी ल्हेंडे खोला का जलस्तर अचानक बढ़ गया।
तेजी से बढ़ता पानी दोनों दिशाओं में फैल गया। एक ओर इसने नेपाल के रसुवा क्षेत्र में भारी तबाही मचाई, तो दूसरी ओर चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के ग्यिरोंग इलाके में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया।
बाढ़ से चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के शिगात्से के ग्यिरोंग काउंटी में भारी नुकसान हुआ है। नेपाल सीमा पर स्थित ग्यिरोंग बंदरगाह बाढ़ की चपेट में आकर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। इस बंदरगाह के क्षतिग्रस्त होने से चीन और नेपाल के बीच सीमा पार व्यापार पर भी गंभीर असर पड़ने की आशंका है।
चीन और नेपाल के बीच प्रमुख स्थलीय व्यापारिक संपर्कों में शामिल इस मार्ग पर करीब दो किलोमीटर सड़क बाढ़ में नष्ट हो गई है। इसके अलावा कई इमारतें, सड़कें, संचार लाइनें, जांच चौकियां और बिजली आपूर्ति व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हुई है।
चीन की ओर से जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ में अब तक तीन लोगों की मौत हुई है। वहीं, 558 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें करीब 260 विदेशी नागरिक शामिल बताए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दो ग्रामीणों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में बाढ़ के तेज बहाव की चपेट में लोगों और वाहनों के आने के दृश्य दिखाई दे रहे हैं। इन वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
बाढ़ ने चीन के सीमा व्यापार और परिवहन व्यवस्था को भी बड़ा झटका दिया है। जानकारी के अनुसार, 200 से अधिक मालवाहक ट्रक बाढ़ के तेज बहाव में बह गए। इससे चीन और नेपाल के बीच आयात-निर्यात के लिए माल की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
ग्यिरोंग बंदरगाह के क्षतिग्रस्त होने से सीमा पार व्यापार को सामान्य होने में समय लग सकता है। चीन को इस कारण व्यापारिक गतिविधियों और परिवहन से होने वाले राजस्व में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
चीन सरकार ने अब तक इस प्राकृतिक आपदा से हुए कुल आर्थिक नुकसान की आधिकारिक रकम जारी नहीं की है। हालांकि, ग्यिरोंग बंदरगाह, सड़कों, बिजली और संचार जैसी महत्वपूर्ण आधारभूत सुविधाओं को हुए नुकसान को देखते हुए आर्थिक क्षति काफी अधिक होने का अनुमान है।
चीनी प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। नुकसान का आकलन करने और प्रभावित इलाकों में तलाश एवं बचाव अभियान चलाने के लिए मानवीय सहायता के साथ मानवरहित विमान यानी ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
बाढ़ से प्रभावित क्षेत्र कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्ग से जुड़े इलाकों में आता है। ऐसे में इस आपदा का असर पर्यटन गतिविधियों पर भी पड़ सकता है। सड़क और सीमा संपर्क क्षतिग्रस्त होने से यात्रियों की आवाजाही प्रभावित होने की आशंका है।
इस तरह नेपाल में शुरू हुई यह प्राकृतिक आपदा सीमा पार चीन तक पहुंचकर जान-माल, सड़क, संचार, बिजली और सीमा व्यापार के बुनियादी ढांचे को प्रभावित कर चुकी है। आने वाले दिनों में बचाव अभियान और विस्तृत सर्वेक्षण के बाद ही चीन में हुए कुल नुकसान की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
००

