सर्द रातों में फसलों को जंगली जानवरों और छुट्टा पशुओं से बचाने के लिए किसान देसी नुस्खों का सहारा ले रहे हैं। किसानों का दावा है कि मट्ठा, लहसुन और मिर्च का घोल फसलों पर छिड़कने से पशु खेत से दूर भाग जाते हैं। इस अभिनव प्रयोग के फायदे और हकीकत से अन्य लोगों को रूबरू कराने के लिए कृषि विभाग ने अध्ययन शुरू कर दिया है।
कोहरे और पाले में गेहूं, सरसों और मटर समेत अन्य फसलें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन इन्हें नीलगाय और छुट्टा पशुओं से बचाना बड़ी समस्या है। इसके लिए किसान दिन रात एक कर रहे हैं। फसलों से बचाने का अब तक कोई कारगर उपाय न होने से किसानों ने खुद ही देसी प्रयोग शुरू कर दिए हैं। प्रदेश के कई जिलों में किसान घोल तैयार कर फसलों छिड़क रहे हैं, इसकी दुर्गंध से पशु खेत से दूर भाग जाते हैं।
नीम की खली व ईंट-भट्ठे की राख
कृषि विज्ञान केंद्र बागपत के वैज्ञानिक डॉ. संदीप बताते हैं कि चार किलो नीम की खली को इतनी ही मात्रा में ईंट-भट्ठे की राख में मिलाकर पाउडर तैयार करें। इसका घोल बनाकर प्रति बीघा महीने में दो बार छिड़कें। इससे पशु खेत से दूर रहते हैं और यह फसलों के लिए ज्यादा फायदेमंद है। खली से फसलों को नाइट्रोजन मिलता है और कीट भी भाग जाते हैं।
अंडा और वाशिंग पाउडर
सिद्धार्थनगर के किसान प्रमोद कुमार ने बताया कि वे 30 लीटर पानी में 15 अंडे और 100 ग्राम वाशिंग पाउडर मिलाकर घोल बनाते हैं। इसे खेत की मेड़ों पर छिड़कने से जानवर भाग जाते हैं। क्षेत्र में किसानों को इससे काफी फायदा है ।
मट्ठा, लहसुन और बालू
कुशीनगर के किसान लालसिंह का कहना है कि 20 लीटर मट्ठे में आधा किलो पिसा लहसुन और 500 ग्राम बालू मिलाएं। 3-4 दिन के लिए डब्बे में बंदकर रखें। झाग बनने पर इसका छिड़काव करें। यह फफूंद नाशक का काम काम करता है। इसकी गंध से करीब 15 दिन तक पशु खेतों की तरफ नहीं आते हैं।
गोमूत्र के साथ तंबाकू, धतूरा
मुरादाबाद के किसान विशेष कुमार ने बताया कि 20 लीटर गोमूत्र में तीन किलो धतूरा, 5 किलो नीम और 500 ग्राम तंबाकू की पत्ती और 250 ग्राम लहसुन उबालें। इसमें 200 ग्राम लाल मिर्च पाउडर मिलाएं। इस मिश्रण को ड्रम में भरकर 40 दिनों तक धूप में रखें। ध्यान रहे कि इसमें हवा न जाए। इसकी एक लीटर मात्रा 70 लीटर पानी में मिलाकर छिड़कें। यह अच्छा कीटनाशक भी है।
बाल भी काफी कारगर
पशु और खास तौर से सुअर को रोकने के लिए बाल भी कारगर है। डॉ. संदीप बताते हैं कि सैलून से लोगों के काटे बाल किसान खेत की मेड़ों पर डाल दें। चूंकि बाल पशुओं की नाक में जाने से उन्हें परेशानी होती है और वह दोबारा उधर नहीं आते। किसान सभी प्रयोगों को बदल-बदल कर करें ताकि जानवर इनके अभ्यस्त न हों सकें।
कृषि विभाग कर रहा अध्ययन : डॉ. राजेंद्र
सिद्घार्थनगर और कुशीनगर समेत कई जिलों में किसान देसी नुस्खोें से फसलों को बचा रहे हैं। विभाग इसके परिणामों पर अध्ययन कर रहा है। यदि ये कारगर हैं तो बाकी किसानों को भी इनके लिए प्रेरित किया जा सकता है।
-राजेंद्र कुमार सिंह, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग

