-एक दिन भी नही टिक पायी निर्वाचन आयोग की अमिट स्याही-
-निष्पक्ष मतदान की प्रक्रिया पर सवाल है अमिट स्याही का छूट जाना-
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ. लोकतांत्रिक चुनावों में दोबारा वोट डालने की धोखाधड़ी को रोकने के लिये वोट डालने के बाद मतदाता के बॉंये हाथ की उॅगली पर अमिट स्याही का निशान लगा दिया जाता है। जो कई सप्ताह तक नहीं छूटता है। यह अमिट स्याही निर्वाचन आयोग ही उपलब्ध कराता है।
राजधानी लखनऊ में चौथे चरण के मतदान में ऐसा एक मामला सामने आया है जिसमे कई मतदाताओं की अमिट स्याही अपने आप उसी दिन साफ हो गयी। 174 मध्य विधान सभा क्षेत्र लखनऊ में ऐशबाग मालवीय नगर स्थित प्राथमिक विद्यालय के बूथ संख्या दो में कई लोगों को मतदान की निशानी लगायी गयी। परन्तु शाम होते-होते अपने आप ही साफ हो गयी।
सामान्य घटना नहीं है स्याही का छूटना-
फोटो न छापने की शर्त पर मालवीय नगर निवासी सोनल बिन्द्रा ने बताया कि वे अपने पति अमित बिन्द्रा व ससुर सतीश बिन्द्रा के साथ मालवीय नगर के प्राथमिक विद्यालय में मतदान करने गयी थी। उन्होनें बताया कि शाम को ही सभी लोगों की उंॅगली से निशान गायब हो चुके थे। वही पड़ोस मे रहने वाली नीलम ने भी उसी बूथ में मतदान किया था, उनका निशान भी गायब हो चुका था। ऐसा कई और लोगों के साथ भी हुआ। लोगों के अनुसार यह एक असाधारण घटना है। निर्वाचन में ऐसा नहीं होना चाहिये। यदि लोगों को पहले पता चल जाता तो वे निशान मिटाकर दोबारा वोट देने आ जाते। इससे निष्पक्ष मतदान की प्रक्रिया पर सवाल भी खड़े होे जाते।
कई सप्ताह तक रहता है अमिट स्याही का निशान-
सामान्य निर्वाचनों में दोबारा वोट डालने की धोखाधड़ी को रोकने के लिये अमिट स्याही को निर्वाचन आयोग ही उपलब्ध कराता है। इसका मुख्य घटक रसायन सिल्वर नाइटेªट होता है। जो रोशनी से प्रतिक्रिया करके एक अमिट निशान बना देता है। यह निशान कई सप्ताह तक नहीं छूटता है। बताते चले कि मतदान की स्याही का निर्माण पूरे भारत में केवल कर्नाटक स्थित मैसूर पेण्ट एण्ड वार्निश के द्वारा ही किया जाता है। साउथ अफ्रीका सहित विश्व के कई देशों में इस स्याही का निर्यात किया जाता है। अमिट स्याही के निशान के इस तरह साफ होने की घटना असाधारण है। सरकार सहित निर्वाचन आयोग को इस पर गंभीरता से संज्ञान लेना चाहिये। साथ ही आगे के चरणों के चुनावों में अमिट स्याही की पूरी तरह से जॉच कर मतदान केन्द्रों को दी जानी चाहिये।

