मन की खामोशी
कविता बिष्ट
उत्तराखंड
पता नहीं क्यों ये मन हमेशा उदास रहता है,
होंठों पर मुस्कान, पर दिल खामोश रहता है,
खुश रहने की कोशिश करती हूँ हर दिन,
पर खुशी जैसे मुझसे रूठ गई है कहीं,
अपनों के बीच रहकर भी सुकून नहीं मिलता,
दूर रहूँ तो फिर मन को चैन नहीं मिलता,
लोग मेरी हँसी देखते हैं, आँखों की नमी नहीं,
मेरे दर्द की आवाज़ सुनता कोई नहीं,
शायद लड़ते-लड़ते खुद से दूर हो गई हूँ,
फिर भी एक उम्मीद है, एक दिन खुद से मिल जाऊँगी।।

