मेरा सपना
कुमारी प्रीति
कक्षा 8, उम्र 13 साल
उत्तराखंड
बंद आंखों से मैंने भी देखा है यह सपना,
जहां मैं आजाद उड़ने वाली एक लड़की,
जुनून है जिसकी आंखों में कुछ कर गुजरने की,
हसरत है दिल में देश की रक्षा कर जाऊँ,
हर डरती आवाज़ की मैं ताकत बन जाऊँ,
हर उस हाथ को थाम लूँ जो बेबसी से झुका है,
उस सन्नाटे को तोड़ दूँ जो खौफ में जी रहा है,
लड़ना पड़े, तो हर लड़की के लिए लड़ जाऊँ,
ज़रूरत पड़ी तो हँसकर मर भी जाऊँ,
पर एक ही ख्वाब है दिल के किसी कोने में,
लड़कियों की बहादुरी का इतिहास लिख जाऊँ।।

