राम जन्मभूमि मंदिर परिसर मे मां दुर्गा मंदिर पर फहराया धर्म ध्वज
(डाक्टर अजय तिवारी जिला संवाददाता)
अयोध्या।उत्तर प्रदेश के अयोध्या जनपद स्थित श्रीरामजन्मभूमि परिसर में शुक्रवार की शाम सनातन संस्कृति और नारी शक्ति के अद्भुत संगम का एक नया विधिक व ऐतिहासिक अध्याय दर्ज हो गया।परकोटे के भीतर नवनिर्मित मां दुर्गा मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर प्रखर राष्ट्रवादी वक्ता साध्वी ऋतंभरा और केंद्रीय मंत्री साध्वी निरंजन ज्योति के पावन सानिध्य में पूर्ण विधिक व वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच भव्य धर्म ध्वजारोहण संपन्न कराया गया। श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा इस पूरे मांगलिक आयोजन को विधिक व व्यावहारिक रूप से पूरी तरह ‘नारी शक्ति’ को समर्पित रखने का अभूतपूर्व निर्णय लिया गया था, जिसके अंतर्गत देश के कोने-कोने से आई लगभग 3600 प्रबुद्ध महिलाओं ने एक साथ परिसर में प्रवेश कर सनातन धर्म की जय-जयकार की। ध्वज फहराते ही संपूर्ण राम मंदिर परिसर ‘जय माता दी’ और ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी विधिक जयघोष से सराबोर हो उठा।इस गरिमामयी विधिक अनुष्ठान की मुख्य आधारस्तंभ और राम मंदिर आंदोलन का प्रखर चेहरा रहीं परम पूज्य साध्वी ऋतंभरा ने समारोह को संबोधित करते हुए एक बेहद कड़ा और स्पष्ट विधिक व सामाजिक संदेश दिया।उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि आज इस पावन परिसर से देश की संपूर्ण नारी शक्ति यह विधिक व आध्यात्मिक संकल्प ले रही है कि अब भारत की कोई भी मासूम बेटी ‘लव जिहाद’ जैसी कुत्सित और अवैध साज़िशों का शिकार कतई नहीं बनेगी; इसके लिए समाज की हर एक बच्ची को दुर्गा स्वरूप में ढालना होगा ताकि वे अपनी और अपनी संस्कृति की रक्षा स्वयं कर सकें। उन्होंने गोवंश की विधिक व धार्मिक सुरक्षा पर अपनी गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सख्त लहजे में कहा कि जब तक भारत की पवित्र धरती पर गोमाता का रक्त बहता रहेगा, तब तक सनातन समाज चैन से नहीं बैठेगा और ऐसी विधिक व धार्मिक क्रूरता को अब किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाए।इस मौके पर साध्वी ऋतंभरा ने ऐतिहासिक कारसेवकों के महान विधिक व भौतिक बलिदान को भावपूर्ण ढंग से याद किया और कहा कि लाखों रामभक्तों ने इस पावन दिन को देखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी, जिसके प्रतिफल स्वरूप आज हमारे आराध्य प्रभु रामलला अपने भव्य मंदिर में विराजमान हो चुके हैं; उन्होंने विधिक व सांस्कृतिक पुनरुत्थान की बात करते हुए कहा कि रामलला की प्राप्ति के बाद अब आगे ज्ञानवापी और कृष्ण जन्मभूमि के विधिक व धार्मिक गौरव की पुनर्स्थापना भी सुनिश्चित होगी, लेकिन गोमाता की हत्या के कलंक के बीच पूर्ण संतोष प्राप्त होना संभव नहीं है। मुख्य ध्वजारोहण से पूर्व परिसर में निर्मित भव्य यज्ञशाला में आचार्यों द्वारा विशेष वैदिक अनुष्ठान कराए गए, जिसमें साध्वी द्वय और ट्रस्ट के विधिक पदाधिकारियों ने पूर्ण विधि-विधान के साथ आहुतियां प्रदान कीं।इस पूरे महाआयोजन की सबसे विशिष्ट और विधिक रूप से सराहनीय बात यह रही कि मंदिर परिसर के भीतर सुरक्षा से लेकर वीआईपी अतिथियों के मार्गदर्शन की संपूर्ण कमान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल की जांबाज महिला बटालियन ने संभाली। महिला सैन्य कर्मियों ने ध्वज को मंदिर के सर्वोच्च शिखर पर विधिक रूप से स्थापित करने से लेकर देश भर से आईं वीआईपी महिला अतिथियों के सुगम आवागमन को बेहद शालीनता और मुस्तैदी से नियंत्रित किया। इस भव्य कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद्,दुर्गा वाहिनी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की मातृशक्ति विंग से जुड़ी लगभग 3600 चुनिंदा महिलाओं को ट्रस्ट द्वारा आधिकारिक विधिक पास जारी किए गए थे।सुरक्षा मानकों और आयोजन की विधिक गरिमा को अक्षुण्ण रखने के लिए कड़े नियम लागू थे, जिसके तहत यदि किसी महिला अतिथि के साथ उनके कोई पुरुष परिजन पहुंचे भी, तो उनके मुख्य परिसर में प्रवेश पर विधिक रोक रही और उनके आदरपूर्वक बैठने के लिए परिसर के मुख्य द्वार से बाहर एक सर्वसुविधायुक्त पृथक प्रतीक्षालय की विधिक व्यवस्था की गई
थी।

