राम पथ रेलिंग पर सियासत तेज—विरोध की आड़ में समर्थन का आरोप
(राजन तिवारी सिटी रिपोर्टर )
अयोध्या।अयोध्या की राम पथ सड़क इन दिनों विकास से ज्यादा “रेलिंग राजनीति” का केंद्र बनी हुई है।मामला बड़ा दिलचस्प है—पर्दे के सामने विरोध और पर्दे के पीछे समर्थन का ऐसा संतुलन शायद ही कहीं देखने को मिले।
सूत्रों के अनुसार बताया जा रहा है कि 23 मार्च शाम को राम होटल श्याम रेस्टोरेंट के बंद कमरे में विधायक ने बड़े ही शांत भाव से रेलिंग लगाने की सहमति दे दी। सूत्रों के अनुसार व्यापार मंडल के अध्यक्ष पंकज गुप्ता और नंदलाल गुप्ता के विरोध पर विधायक ने जमकर फटकार लगाई और अध्यक्ष और महामंत्री ने रेलिंग की सहमति पर्दे के पीछे से दे दी बैठक के बाद जब विधायक बाहर निकले तो चेहरे पर जनता की चिंता और शब्दों में विरोध की मिठास घुली हुई थी। अब इसे राजनीति की कला कहें या “दोहरी भूमिका का राष्ट्रीय पुरस्कार” योग्य प्रदर्शन, यह जनता तय करे।अयोध्या उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल अयोध्या के एक परिवार और विधायक की धुरी तक सीमित रह गई है। व्यापार मंडल की बैठक में भी कमाल का दृश्य रहा। अधिकारी और विधायक मिलकर रेलिंग के प्रस्ताव को व्यापारियो के बीच पास करा लिए।मजेदार सवाल यह है कि जब व्यापार मंडल ने पहले ही रेलिंग का विरोध किया था और विधायक ने जिंदाबाद के बीच उसे रुकवाने का श्रेय भी लिया था, तो अब वही रेलिंग लगने पर सन्नाटा क्यों है? क्या विरोध भी “ऑन-ऑफ स्विच” पर चल रहा है?बैठक में बालकृष्ण वैश्य,अचल कुमार गुप्ता, अनूप कुमार गुप्ता, विनोद श्रीवास्तव,नंदलाल गुप्ता, पंकज कुमार गुप्ता और श्याम सुंदर कसेरा समेत प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। सबने मिलकर ऐसा माहौल बनाया कि रेलिंग अब सिर्फ लोहे की नहीं, बल्कि राजनीति की भी बन गई है।अब देखना यह है कि यह रेलिंग सड़क पर ज्यादा टिकती है या बयानबाज़ी में! और 2027 आते-आते ये गुस्सा वोट में बदलेगा या फिर आख़िरी समय में किसी नई डील पर ठंडा पड़ जाएगा—यही असली सस्पेंस है। राजनीति में याददाश्त और मुनाफा, दोनों का हिसाब बड़ा दिलचस्प होता है।

