10 अप्रैल: रामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
प्रनवउँ पवनकुमार,
खल बन पावक ग्यान घन ।
जासु हृदय आगार,
बसहिं राम सर चाप धर ।।
( बालकांड, दो. 17 )
जय श्री राम🙏🙏
मानस जी के आरंभ में अपनी काव्य रचना की सफलता के लिए पूज्यपाद गोस्वामी श्री तुलसीदास जी महाराज सबकी वंदना करते हैं । इसी क्रम में श्री हनुमान जी की वंदना करते हुए वे कहते हैं कि मैं पवनकुमार को प्रणाम करता हूँ जो दुष्ट रूपी वन को जलाकर भष्म करने के लिए अग्नि रूप हैं , जो ज्ञान की घनमूर्ति हैं और जिनके हृदय रूपी भवन में धनुष वाण धारण किये श्री राम जी निवास करते हैं ।
बंधुवर ! जिसके भी हृदय में श्री राम जी निवास करते हैं वह ज्ञानी , रिपुहंता , तेजस्वी व सब सद्गुणों से युक्त हनुमान जी की तरह हो जाता है । अतः अपने हृदय में श्री राम जी को धारण कर प्रणम्य बन जाइए । अथ…. श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम । सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

