रास्ता न दिला पाएं तो लेखपाल, कानूनगो, तहसीलदार सबको सस्पेंड करो: मुख्यमंत्री
गोरखपुर, लखनऊ (आरएनएस )। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि संबंधी मामलों में लापरवाही और उदासीनता बरतने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मंगलवार को गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन के दौरान एक महिला ने दबंगों द्वारा रास्ता रोके जाने की शिकायत की। महिला ने मुख्यमंत्री को बताया कि दबंग धमकी देते हैं कि चाहे जहां शिकायत कर लो, वे रास्ता नहीं देंगे। महिला की पीड़ा सुनकर मुख्यमंत्री ने तत्काल अधिकारियों को मामले का निस्तारण कर महिला को रास्ता दिलाने के निर्देश दिए।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश देते हुए कहा कि यदि लेखपाल, कानूनगो और तहसीलदार रास्ता दिलाने में खुद को असमर्थ मानते हैं तो उन सभी को निलंबित किया जाए। उन्होंने कहा कि आम जनता की समस्याओं के समाधान में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भूमि और राजस्व से जुड़े मामलों में यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए और मामले की गंभीरता के अनुसार निलंबन की कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाए।सोमवार को गोरखपुर पहुंचे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार सुबह गोरखनाथ मंदिर में जनता दर्शन में लोगों से मुलाकात की। महंत दिग्विजयनाथ स्मृति भवन के बाहर आयोजित जनता दर्शन में मुख्यमंत्री करीब 200 लोगों के बीच पहुंचे और एक-एक कर उनकी समस्याएं सुनीं। मुख्यमंत्री ने लोगों से प्राप्त प्रार्थना पत्रों को स्वयं अपने हाथ में लेकर उनका अवलोकन किया तथा शिकायतों की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्रत्येक प्रार्थना पत्र का गंभीरता से संज्ञान लेकर उसका समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण कराया जाए।मुख्यमंत्री ने जनता दर्शन में आए लोगों को भरोसा दिलाया कि सरकार हर जरूरतमंद के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को अपनी समस्या के समाधान के लिए परेशान होने की जरूरत नहीं है। शासन की प्राथमिकता है कि प्रत्येक पात्र और पीड़ित व्यक्ति को न्याय मिले तथा उसकी समस्या का समाधान पूरी संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता के साथ कराया जाए।जनता दर्शन के दौरान कई अन्य लोगों ने भी भूमि और राजस्व से संबंधित मामलों में राजस्व कर्मियों द्वारा लापरवाही किए जाने की शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने रखीं। इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री ने संबंधित जिलाधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों की जांच कराई जाए और जहां भी लापरवाही सामने आए, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भूमि विवादों और जनसमस्याओं के निस्तारण में अनावश्यक देरी या लापरवाही किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं की जाएगी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि जनता की शिकायतों का समाधान केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि मौके पर प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि जिन मामलों में वास्तविक रूप से लोगों को रास्ता, कब्जा हटाने, राजस्व अभिलेखों में सुधार या अन्य वैधानिक सहायता की आवश्यकता है, उनमें संबंधित विभाग तत्काल कार्रवाई करें। अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए पूरी गंभीरता से काम करें।जनता दर्शन में बड़ी संख्या में लोग इलाज के लिए आर्थिक सहायता की गुहार लेकर भी पहुंचे। मुख्यमंत्री ने ऐसे लोगों को आश्वस्त किया कि सरकार उनके उपचार में हरसंभव सहायता करेगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र और जरूरतमंद लोगों के आयुष्मान कार्ड बनवाए जाएं, ताकि उन्हें उपचार की सुविधा मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि आयुष्मान योजना के बावजूद किसी जरूरतमंद को इलाज के लिए आर्थिक सहायता की आवश्यकता पड़ती है तो मुख्यमंत्री विवेकाधीन कोष से भी मदद उपलब्ध कराई जाएगी।मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि किसी भी पात्र व्यक्ति को उपचार के लिए आर्थिक कठिनाई का सामना न करना पड़े। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ऐसे मामलों में आवश्यक औपचारिकताएं तेजी से पूरी कराई जाएं और जरूरतमंदों को समय पर सहायता उपलब्ध कराई जाए।जनता दर्शन के दौरान मुख्यमंत्री का जोर इस बात पर रहा कि शासन-प्रशासन की योजनाओं और व्यवस्थाओं का वास्तविक लाभ आम नागरिक तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को संवेदनशीलता के साथ काम करने तथा शिकायतों का निष्पक्ष और प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है और इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।
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पीआरडी जवानों को मुख्यमंत्री योगी की बड़ी सौगात, ड्यूटी भत्ता 500 से बढ़ाकर 600 रुपये और हर साल पांच लाख तक मुफ्त इलाज
गोरखपुर, लखनऊ(आरएनएस ) । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रांतीय रक्षक दल (पीआरडी) के जवानों को बड़ी सौगात देते हुए उनके दैनिक ड्यूटी भत्ते में वृद्धि की घोषणा की। अब पीआरडी स्वयंसेवकों को 500 रुपये के स्थान पर प्रतिदिन 600 रुपये ड्यूटी भत्ता मिलेगा। इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने पीआरडी जवानों और उनके परिवार के सदस्यों को प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक की कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की भी शुरुआत की। मुख्यमंत्री ने कहा कि पीआरडी स्वयंसेवकों ने कानून-व्यवस्था, आपदा प्रबंधन, यातायात संचालन, चुनाव ड्यूटी और विभिन्न महत्वपूर्ण आयोजनों में पुलिस एवं प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपनी जिम्मेदारी निभाई है। उनके योगदान और सेवाभाव को देखते हुए सरकार ने यह निर्णय लिया है।योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में आयोजित पीआरडी जवानों के सम्मेलन में मुख्यमंत्री ने स्वयंसेवकों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा के कार्ड वितरित कर ‘मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना’ का शुभारंभ किया। इसके साथ ही उन्होंने रिमोट का बटन दबाकर लखनऊ में करीब 23 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुमंजिला पीआरडी बैरक का शिलान्यास भी किया।अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 1948 में गठित प्रांतीय रक्षक दल के स्वयंसेवकों को वर्ष 2019 तक मात्र 250 रुपये प्रतिदिन ड्यूटी भत्ता मिलता था। वर्ष 2019 में इसे बढ़ाकर 375 रुपये, वर्ष 2022 में 395 रुपये और वर्ष 2025 में बढ़ाकर 500 रुपये प्रतिदिन किया गया। अब एक बार फिर इसमें वृद्धि करते हुए ड्यूटी भत्ता 600 रुपये प्रतिदिन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पीआरडी के 75 वर्षों के इतिहास में ड्यूटी भत्ता 250 रुपये तक ही पहुंच पाया था, जबकि पिछले आठ वर्षों में यह 250 रुपये से बढ़कर 600 रुपये होने जा रहा है। यह वृद्धि सौ प्रतिशत से भी अधिक है।मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून का राज स्थापित करने और शांति एवं सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में पीआरडी स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। पुलिस और प्रशासन के सहयोग में पीआरडी जवान पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पीआरडी जवानों को नियमित रूप से ड्यूटी नहीं मिलती थी, लेकिन आज परिस्थितियां पूरी तरह बदल गई हैं। पीआरडी के महत्व को समझते हुए सरकार ने उनकी भूमिका को व्यापक बनाया है और अब कई अवसरों पर ड्यूटी के लिए जवान कम पड़ जाते हैं।योगी आदित्यनाथ ने कहा कि प्राकृतिक आपदा हो या महाकुंभ, दीपोत्सव, रंगोत्सव, यातायात व्यवस्था हो या चुनाव ड्यूटी, पीआरडी स्वयंसेवकों ने हर जिम्मेदारी को अनुशासन, सेवाभाव और समर्पण के साथ पूरा किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पीआरडी जवानों के योगदान को सम्मान देते हुए उनके कल्याण के लिए लगातार कदम उठा रही है।मुख्यमंत्री ने कहा कि पीआरडी स्वयंसेवकों और उनके परिवारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने का निर्णय उनके प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। मुख्यमंत्री पीआरडी कैशलेस चिकित्सा योजना के तहत प्रदेश के 31 हजार से अधिक पीआरडी स्वयंसेवकों को सरकारी तथा सरकार से संबद्ध अस्पतालों में प्रतिवर्ष पांच लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा मिलेगी। परिवार के सदस्यों को शामिल करने पर इस योजना से 1.55 लाख से अधिक लोग लाभान्वित होंगे। इससे पीआरडी जवानों और उनके परिवारों को गंभीर बीमारी की स्थिति में आर्थिक बोझ से राहत मिलेगी और उन्हें बेहतर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।मुख्यमंत्री ने कहा कि पीआरडी जवानों ने प्रदेश की प्रगति और जनसेवा में निरंतर योगदान दिया है। सरकार का प्रयास है कि उनके कार्य की परिस्थितियों में सुधार के साथ-साथ उनके सामाजिक और आर्थिक हितों का भी ध्यान रखा जाए। ड्यूटी भत्ते में लगातार वृद्धि और अब कैशलेस चिकित्सा सुविधा इसी दिशा में उठाए गए महत्वपूर्ण कदम हैं।सम्मेलन में राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार, राजनीतिक पेंशन, सैनिक कल्याण एवं प्रांतीय रक्षक दल डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा कि पीआरडी के जवान शांति, सुरक्षा और जनसेवा के मजबूत आधार हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले पीआरडी का बजट मात्र 23 करोड़ रुपये था, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में इसमें कई गुना वृद्धि हुई है। वर्तमान में पीआरडी का बजट बढ़कर 543 करोड़ रुपये हो चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार पीआरडी जवानों के कल्याण और उनकी सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाने के लिए काम कर रही है।सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दस पीआरडी स्वयंसेवकों को स्वयं कैशलेस चिकित्सा सुविधा कार्ड प्रदान किए। कार्ड प्राप्त करने वालों में गोरखपुर के अजय, भीमसेन, धीरेंद्र और उमेश कुमार, लखनऊ की स्नेहलता रावत और अनामिका वर्मा, कुशीनगर की चंदा भारती, मऊ के जय सिंह, चंदौली के मो. शाकिर तथा वाराणसी के किशन गुप्ता शामिल रहे।कार्यक्रम में जिला पंचायत की प्रशासक साधना सिंह, विधायक फतेह बहादुर सिंह, श्रीराम चौहान, विपिन सिंह, महेंद्रपाल सिंह, प्रदीप शुक्ल, सरवन निषाद, विधान परिषद सदस्य एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, पीआरडी विभाग के सचिव सुहास एलवाई, भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय, जिलाध्यक्ष जनार्दन तिवारी, महानगर अध्यक्ष रमेश प्रताप गुप्ता, पूर्व महानगर अध्यक्ष राजेश गुप्ता सहित अन्य प्रमुख लोग उपस्थित रहे।
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तकनीकी विश्लेषण से 5 महीने से लापता 17 वर्षीय बालक बरामद, होटल में कर रहा था काम
लखनऊ, (आरएनएस )। पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के लिए चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग (एएचटी) की टीम ने करीब पांच महीने से लापता 17 वर्षीय बालक शिवांक रावत को सकुशल बरामद कर लिया। साइबर असिस्टेंस और तकनीकी विश्लेषण के माध्यम से बालक के डिजिटल फुटप्रिंट का पता लगाकर पुलिस टीम ने उसे आशियाना क्षेत्र से बरामद किया। घर से जाने के बाद बालक होटल में काम कर अपना जीवन-यापन कर रहा था और रात में पुल के नीचे सोता था।पुलिस आयुक्त तरुण गाबा तथा संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार के निर्देशन में गुमशुदा बच्चों की बरामदगी के लिए अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस उपायुक्त अपराध अनिल कुमार यादव, अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव के निर्देशन तथा सहायक पुलिस आयुक्त अपराध के पर्यवेक्षण में थाना एएचटी की टीम ने इस कार्रवाई को अंजाम दिया।पुलिस के अनुसार 6 मार्च 2026 को शिवांक के पिता मिथिलेश कुमार निवासी बगियामऊ, थाना सुशान्त गोल्फ सिटी ने अपने 17 वर्षीय पुत्र के गुम होने की सूचना थाना सुशान्त गोल्फ सिटी में दी थी। सूचना के आधार पर अपराध संख्या 135/2026 के तहत धारा 137(2) बीएनएस में मुकदमा दर्ज किया गया था। मामले की प्रारंभिक विवेचना उपनिरीक्षक विवेक कुमार मिश्रा द्वारा की गई। इसके बाद संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय के आदेश पर 25 जुलाई 2026 को विवेचना थाना एएचटी को स्थानांतरित कर दी गई। वर्तमान में मामले की विवेचना प्रभारी निरीक्षक दशरथ सिंह द्वारा की जा रही है।
अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव द्वारा गुमशुदा बच्चों की बरामदगी को लेकर लगातार निगरानी की जा रही थी। उनके निर्देश पर साइबर असिस्टेंस के माध्यम से बालक के डिजिटल फुटप्रिंट और उपलब्ध तकनीकी इनपुट का गहन विश्लेषण कराया गया। जांच में सामने आया कि बालक अपने पुराने मोबाइल फोन का इस्तेमाल कर रहा था, लेकिन उसने अपना सिम कार्ड बदल लिया था। घर से जाने के बाद उसने आशियाना क्षेत्र में एक होटल में काम करना शुरू कर दिया था। ऐसे में तकनीकी और साइबर विश्लेषण पुलिस के लिए उसकी तलाश में महत्वपूर्ण साबित हुआ।लगातार किए गए तकनीकी विश्लेषण के दौरान प्राप्त डिजिटल इनपुट के आधार पर 15 अगस्त 2026 को बालक के मोबाइल की लोकेशन एन-सेक्टर, आशियाना क्षेत्र में मिली। सूचना मिलते ही थाना एएचटी की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और 17 वर्षीय शिवांक रावत को सकुशल बरामद कर लिया।पूछताछ में बालक ने पुलिस को बताया कि वह हाईस्कूल में फेल हो गया था और उसका पढ़ाई में मन नहीं लग रहा था। माता-पिता द्वारा पढ़ाई के लिए कहे जाने से नाराज होकर वह घर से चला गया था। घर से निकलने के बाद उसने अपना सिम कार्ड बदल लिया और आशियाना क्षेत्र में होटल में काम करने लगा। उसने बताया कि वह रात के समय पुल के नीचे सोकर रात बिताता था।तकनीकी माध्यम से उसकी लोकेशन ट्रेस होने के बाद पुलिस टीम ने उसे आशियाना क्षेत्र से बरामद किया और आवश्यक कार्रवाई के लिए थाना सुशान्त गोल्फ सिटी लाया। आवश्यक विधिक कार्रवाई के बाद बालक को राजकीय बाल गृह (बालक), मोहन रोड में आवासित कराया गया। इसके साथ ही उसकी परिजनों से मुलाकात भी कराई गई।अपर पुलिस उपायुक्त अपराध किरन यादव ने बताया कि थाना एएचटी द्वारा गुमशुदा बच्चों की बरामदगी और मानव तस्करी के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। पूर्व में अलग-अलग मामलों में मानव तस्करी से जुड़े 13 बच्चों को सकुशल रेस्क्यू किया जा चुका है। शिवांक रावत की बरामदगी इस अभियान की 14वीं सफलता है। उन्होंने कहा कि लगातार निगरानी, अधिकारियों के मार्गदर्शन और साइबर असिस्टेंस के जरिए डिजिटल फुटप्रिंट के विश्लेषण ने इस बरामदगी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि कोई बालक या बालिका किसी कारणवश नाराज होकर घर से चला जाता है अथवा गुम हो जाता है तो परिजन तत्काल नजदीकी पुलिस थाने को सूचना दें। बच्चों की सुरक्षा और उनकी सकुशल बरामदगी के लिए पुलिस उपलब्ध तकनीकी संसाधनों और डिजिटल माध्यमों का प्रभावी उपयोग कर रही है।पुलिस ने यह भी अपील की है कि होटल, ढाबा, दुकान अथवा अन्य प्रतिष्ठानों में यदि किसी नाबालिग बच्चे के काम करने की जानकारी किसी व्यक्ति को मिलती है तो इसकी सूचना तत्काल पुलिस को दी जाए। इससे ऐसे बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ उन्हें उनके परिवार से मिलाने में मदद मिलेगी।
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यूट्यूब चैनल खरीदने के नाम पर 1.70 लाख रुपये की साइबर ठगी, नाका पुलिस ने पूरी रकम वापस कराई
लखनऊ, (आरएनएस )। साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत थाना नाका हिंडोला पुलिस की साइबर टीम ने तत्परता और तकनीकी सूझबूझ का परिचय देते हुए यूट्यूब चैनल खरीदने के नाम पर हुई 1 लाख 70 हजार रुपये की साइबर ठगी की पूरी धनराशि पीड़ित को वापस करा दी। बैंकिंग लेनदेन का तकनीकी विश्लेषण कर पुलिस टीम ने ठगी की रकम को ट्रेस किया और उसे पीड़ित के खाते में वापस कराया।पुलिस उपायुक्त पश्चिमी के पर्यवेक्षण, अपर पुलिस उपायुक्त पश्चिमी एवं सहायक पुलिस आयुक्त कैसरबाग के निर्देशन तथा थाना नाका हिंडोला के थानाध्यक्ष विवेक कुमार चौधरी के नेतृत्व में थाना नाका की साइबर टीम द्वारा साइबर अपराधों के विरुद्ध लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है।इसी क्रम में 6 अगस्त 2026 को नाका हिंडोला क्षेत्र निवासी रवींद्र नाथ शुक्ल ने पुलिस को शिकायत दी कि उनके पोते अयांश शुक्ल के साथ यूट्यूब चैनल खरीदने के नाम पर धोखाधड़ी की गई है। साइबर जालसाजों ने पीड़ित के बैंक खाते से 1 लाख 70 हजार रुपये की धनराशि धोखाधड़ी से निकाल ली थी।मामले की जानकारी मिलते ही थाना नाका के साइबर हेल्प डेस्क प्रभारी उपनिरीक्षक सतेन्द्र कुमार सैनी ने तत्परता दिखाते हुए पीड़ित की शिकायत साइबर अपराध पोर्टल पर दर्ज कराई। इसके बाद थाना नाका की साइबर टीम ने बैंकिंग लेनदेन से संबंधित विवरण का गहन तकनीकी विश्लेषण शुरू किया।पुलिस टीम ने साइबर ठगी में इस्तेमाल किए गए बैंकिंग लेनदेन की जानकारी और धनराशि के प्रवाह का विश्लेषण करते हुए 1 लाख 70 हजार रुपये की पूरी रकम को ट्रेस कर लिया। आवश्यक कार्रवाई के बाद पुलिस ने ठगी की पूरी धनराशि पीड़ित को वापस करा दी। रकम वापस मिलने पर पीड़ित ने नाका पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।पुलिस अधिकारियों ने आमजन से अपील की है कि किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक खाते, ओटीपी, एटीएम कार्ड, यूपीआई या अन्य बैंकिंग संबंधी जानकारी साझा न करें। ऑनलाइन खरीदारी अथवा किसी डिजिटल सेवा के लिए भुगतान करने से पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की विश्वसनीयता की जांच अवश्य करें। साइबर ठगी होने पर बिना देरी किए साइबर अपराध पोर्टल या पुलिस को सूचना दें, जिससे ठगी की धनराशि को समय रहते रोकने और वापस कराने की कार्रवाई की जा सके।साइबर ठगी की धनराशि वापस कराने वाली पुलिस टीम में उपनिरीक्षक सतेन्द्र कुमार सैनी तथा कांस्टेबल प्रभात त्रिपाठी, थाना नाका हिंडोला, लखनऊ शामिल रहे।
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सिम स्वैप, सीडीआर और आईपीडीआर के विश्लेषण पर 143 पुलिसकर्मियों को दिया गया विशेष प्रशिक्षण
लखनऊ, (आरएनएस )। साइबर अपराधों की बढ़ती चुनौती के बीच पुलिस की तकनीकी दक्षता और विवेचना क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से कमिश्नरेट लखनऊ की स्पेशलाइज्ड ट्रेनिंग शाखा की ओर से मंगलवार को ‘सिम स्वैप तथा सीडीआर एवं आईपीडीआर का विश्लेषण’ विषय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई। उत्तर प्रदेश शासन और पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देशों के क्रम में आयोजित यह कार्यशाला उत्तर प्रदेश पुलिस रेडियो मुख्यालय, महानगर, लखनऊ में संपन्न हुई। प्रशिक्षण में कमिश्नरेट लखनऊ के विभिन्न थानों की साइबर हेल्प डेस्क, साइबर सेल, जोन स्तर की साइबर सेल तथा साइबर थाने में तैनात 143 अधिकारी और कर्मचारियों ने प्रतिभाग किया।पुलिस आयुक्त तरुण गाबा के निर्देशन में आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम संयुक्त पुलिस आयुक्त अपराध एवं मुख्यालय अपर्णा कुमार, संयुक्त पुलिस आयुक्त कानून एवं व्यवस्था बबलू कुमार तथा पुलिस उपायुक्त मुख्यालय अमित कुमावत के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन सहायक पुलिस आयुक्त महिला अपराध शाहिदा नसरीन के निर्देशन में किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को आधुनिक तकनीकी संसाधनों के उपयोग के माध्यम से साइबर अपराधों की रोकथाम, विवेचना और डिजिटल साक्ष्यों के वैज्ञानिक विश्लेषण के लिए और अधिक सक्षम बनाना रहा।प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर विशेषज्ञ अनुज अग्रवाल ने प्रतिभागियों को सिम स्वैप, सीडीआर और आईपीडीआर से जुड़े महत्वपूर्ण तकनीकी, विधिक और प्रक्रियात्मक पहलुओं की जानकारी दी। उन्होंने साइबर अपराधों की जांच के दौरान तकनीकी साक्ष्यों को सुरक्षित करने, उनका विश्लेषण करने तथा विभिन्न डिजिटल कड़ियों को जोड़कर संदिग्ध व्यक्तियों तक पहुंचने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।कार्यशाला में सिम स्वैपिंग से जुड़े साइबर अपराधों की कार्यप्रणाली पर विशेष रूप से चर्चा की गई। प्रशिक्षक ने बताया कि सिम स्वैप के जरिए अपराधी किस प्रकार मोबाइल नंबर पर नियंत्रण हासिल कर साइबर अपराध को अंजाम दे सकते हैं। पुलिसकर्मियों को ऐसे मामलों में अपराध की प्रकृति समझने, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जांच को आगे बढ़ाने के महत्वपूर्ण बिंदुओं की जानकारी दी गई।प्रशिक्षण के दौरान सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड) और आईपीडीआर (इंटरनेट प्रोटोकॉल डिटेल रिकॉर्ड) के वैज्ञानिक विश्लेषण पर भी विस्तार से जानकारी दी गई। बताया गया कि किसी साइबर अपराध की विवेचना के दौरान सीडीआर और आईपीडीआर का प्रभावी विश्लेषण जांच को सही दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इनके माध्यम से संदिग्ध मोबाइल नंबरों, आपसी संपर्क, बातचीत के पैटर्न, इंटरनेट गतिविधियों और अन्य तकनीकी तथ्यों का विश्लेषण कर संदिग्धों की पहचान तथा अपराध की कड़ियों को जोड़ने में सहायता मिल सकती है।विशेषज्ञ ने इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ आईपीडीआर के बढ़ते महत्व और साइबर अपराधों की विवेचना में इसकी उपयोगिता के बारे में भी पुलिसकर्मियों को जानकारी दी। प्रशिक्षण में डिजिटल एवं तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों की पहचान करने, उपलब्ध सूचनाओं का समुचित विश्लेषण करने और वैज्ञानिक तरीके से विवेचना को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।कार्यशाला का एक प्रमुख उद्देश्य साइबर अपराधों की जांच में पुलिसकर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाना रहा। इसके तहत सिम स्वैप से संबंधित अपराधों की पहचान और जांच, सीडीआर एवं आईपीडीआर के प्रभावी विश्लेषण, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अपराध की कड़ियों को जोड़ने तथा संदिग्धों तक पहुंचने की प्रक्रिया को व्यावहारिक रूप से समझाया गया।कमिश्नरेट लखनऊ द्वारा साइबर अपराधों की रोकथाम और प्रभावी विवेचना के लिए पुलिसकर्मियों को लगातार तकनीकी प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और डिजिटल साक्ष्यों के बेहतर उपयोग के माध्यम से पुलिस की साइबर अपराधों के त्वरित, वैज्ञानिक और प्रभावी अन्वेषण की क्षमता को लगातार मजबूत किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि बदलते साइबर अपराधों की प्रकृति को देखते हुए पुलिसकर्मियों को नवीनतम तकनीकी जानकारी से लगातार अपडेट रखना साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए आवश्यक है।
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पारा में अवैध डेयरियों पर नगर निगम का कड़ा प्रहार, 197 पशु पकड़े गए
लखनऊ, (आरएनएस )। पारा क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर संचालित की जा रही अवैध दूध डेयरियों के खिलाफ नगर निगम ने मंगलवार को बड़ा अभियान चलाया। गत दिनों अवैध डेयरियों के खिलाफ कार्रवाई करने गई नगर निगम और पुलिस की संयुक्त टीम पर हुए हमले की घटना को गंभीरता से लेते हुए महापौर सुषमा खर्कवाल और नगर आयुक्त गौरव कुमार स्वयं मौके पर पहुंचे और अभियान की निगरानी की। उनके निर्देश पर पुलिस बल, प्रवर्तन दल और कैटिल कैचिंग दस्ते की संयुक्त टीम ने बुद्धेश्वर से शकुंतला मिश्र विश्वविद्यालय रोड तक सघन कार्रवाई करते हुए कुल 197 पशुओं को पकड़कर अलग-अलग कांजी हाउस और गौशाला में निरुद्ध कराया।महापौर सुषमा खर्कवाल ने मौके पर अधिकारियों से कार्रवाई की जानकारी लेते हुए स्पष्ट किया कि शहर में नियमों का उल्लंघन कर अवैध रूप से डेयरी संचालित करने वालों के खिलाफ किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को अभियान को लगातार प्रभावी ढंग से चलाने और अवैध गतिविधियों पर सख्ती से रोक लगाने के निर्देश दिए। महापौर ने कहा कि शहर में कानून और निर्धारित नियमों का पालन हर हाल में सुनिश्चित कराया जाएगा तथा सरकारी कार्रवाई में बाधा डालने वालों के खिलाफ भी नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी।नगर आयुक्त गौरव कुमार के नेतृत्व में चलाए गए अभियान में नगर निगम के प्रवर्तन दल, कैटिल कैचिंग दस्ते और पुलिस बल ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। नगर आयुक्त ने मौके पर मौजूद अधिकारियों से अभियान की प्रगति और अब तक की गई कार्रवाई की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि अभियान के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का पूरा ध्यान रखते हुए अवैध डेयरियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की जाए और पकड़े गए पशुओं को निर्धारित स्थानों पर सुरक्षित रूप से पहुंचाया जाए।अभियान के दौरान नगर निगम की टीम ने क

