लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रहीं, लाइफस्टाइल सबसे बड़ी वजह*

*लिवर की बीमारियां तेजी से बढ़ रहीं, लाइफस्टाइल सबसे बड़ी वजह*

 

– *समय पर जांच और खानपान में सुधार से 80-90% मामलों से बचाव संभव*

– *मेदांता में विश्व लिवर दिवस पर विशेषज्ञों ने दी महत्वपूर्ण सलाह*

 

*लखनऊ, अप्रैल 18, 2026:* बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान और डायबिटीज के बढ़ते मामलों के बीच लिवर की बीमारियां एक गंभीर चिंता की वजह बनती जा रही हैं। खास बात यह है कि अब यह समस्या केवल शराब का सेवन करने वालों तक सीमित नहीं रही, बल्कि ऐसे लोग भी तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं जो शराब नहीं पीते।

 

डॉक्टरों का मानना है कि यदि समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया तो आने वाले वर्षों में यह स्थिति और चिंताजनक हो सकती है।

 

विश्व लिवर दिवस के अवसर पर मेदांता अस्पताल में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम में डॉ. अभय वर्मा, डायरेक्टर, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी; डॉ. संदीप कुमार वर्मा, डायरेक्टर, जीआई सर्जरी; डॉ. आनंद प्रकाश, डायरेक्टर, जीआई सर्जरी; डॉ. विवेक गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, लिवर ट्रांसप्लांट; और डॉ. दुर्गा प्रसाद और सीनियर कंसल्टेंट, पीडियाट्रिक केयर मौजूद रहे। सभी विशेषज्ञ डॉक्टरों ने आम लोगों को लिवर स्वास्थ्य को लेकर जागरूक किया।

 

डॉक्टर्स ने बताया कि फैटी लिवर अब एक आम समस्या बनती जा रही है, जिसका सीधा संबंध हमारी रोजमर्रा की आदतों से है। बाहर का खाना, ज्यादा तेल और मीठे पदार्थ, पैक्ड फूड और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके प्रमुख कारण हैं। खासतौर पर वे लोग जो घर से दूर रहते हैं या लंबे समय तक बैठकर काम करते हैं, उनमें यह समस्या ज्यादा देखी जा रही है।

 

लिवर की बीमारी शुरुआती चरण में आसानी से पकड़ में नहीं आती क्योंकि इसके लक्षण बहुत सामान्य होते हैं, जैसे थकान, भूख कम लगना या पैरों में सूजन। यही कारण है कि अधिकतर मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं जब बीमारी काफी बढ़ चुकी होती है। ऐसे में 40 साल के बाद नियमित जांच और खासकर डायबिटीज व मोटापे से ग्रसित लोगों को समय-समय पर जांच कराना बेहद जरूरी है।

 

लंबे समय तक अनदेखी करने पर फैटी लिवर सिरोसिस और लिवर कैंसर जैसी गंभीर स्थिति में बदल सकता है। हालांकि, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और शराब से दूरी बनाकर 80 से 90 प्रतिशत मामलों से बचाव संभव है।

 

मेदांता के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. राकेश कपूर ने कहा, “लिवर की बीमारी साइलेंट होती है और जब तक इसके लक्षण स्पष्ट होते हैं, तब तक काफी नुकसान हो चुका होता है। इसलिए समय-समय पर जांच, संतुलित खानपान और सक्रिय जीवनशैली अपनाना बेहद जरूरी है।”

 

डॉक्टर ने सभी से अपील की कि वे अपनी दिनचर्या में छोटे-छोटे बदलाव करें, नियमित जांच कराएं और लापरवाही से बचें, ताकि लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों को समय रहते रोका जा सके।

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