(वाशिंगटन)ट्रंप ने तुर्की में विमान बदलने की बात स्वीकारी, कहा-खुफिया एजेंसियों की सलाह मानता हूं

(वाशिंगटन)ट्रंप ने तुर्की में विमान बदलने की बात स्वीकारी, कहा-खुफिया एजेंसियों की सलाह मानता हूं

वाशिंगटन,12 अगस्त। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन खबरों पर मुहर लगा दी, जिसमें ईरानी धमकियों के डर से उनको तुर्की में अपना विमान बदलना पड़ा था। ओहायो से लौटने के बाद ट्रंप ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि उनको काफी धमकियां मिलती हैं, इसलिए वह खुफिया एजेंसियों और सैन्य सेवा के नियमों का पालन करते हैं। ट्रंप ने खुद को सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रपति बताते हुए कहा कि वहां कोई खतरा था, जिसके कारण अचानक यह निर्णय लिया गया।

ट्रंप ने पत्रकारों से कहा, मैं सीक्रेट सर्विस और सेना के निर्देशों का पालन करता हूं। वे चाहते थे कि मैं दूसरी उड़ान, दूसरे विमान से जाऊं… मैं उनकी बात मानता हूं… मुझे लगता है कि वहां कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा पूछताछ नहीं की। मुझे बहुत सारी धमकियां मिलती हैं।

ट्रंप आगे बोले, मुझे लगता है कि यह अधिक जोखिम में था, क्योंकि वे उसी विमान को निशाना बनाने की अधिक संभावना रखते थे।

ट्रंप ने आगे कहा कि उन्हें कई ऐसी धमकियां मिल रही हैं जिनके बारे में जनता को पता नहीं है।

उन्होंने कहा, किसी भी प्रभावशाली राष्ट्रपति को बहुत सारी धमकियों का सामना करना पड़ता है। कम प्रभावशाली राष्ट्रपतियों को कोई खतरा नहीं होता, और मुझे लगता है कि मैं शायद सबसे प्रभावशाली राष्ट्रपति हूं।

उन्होंने ऐसी धमकियों की चिंता न करते हुए कहा, चाहे जो भी हो, आप मेरा रवैया जानते ही हैं? मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता।

सूत्रों ने खुलासा किया कि पिछले महीने तुर्की में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप कतर द्वारा दान नई बोइंग 747-8 विमान से अंकारा पहुंचे थे।

वाशिंगटन लौटते समय ईरानी धमकियों के कारण वह पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए, लेकिन चुपके से एक खानपान कंटेनर ट्रक में छिपकर छोटे एयरफ़ोर्स सी-32ए सैन्य जेट में सवार हो गए, जिसकी किसी को खबर नहीं थी।

ब्रिटेन पहुंचने के बाद ट्रंप चोरी-छिपे छोटे विमान से एयरफोर्स वन में सवार हुए थे।

००

 

(वाशिंगटन)अमेरिकी कोर्ट ने खालिस्तानी पन्नू की हत्या की साजिश में सजा की सुनवाई टाली

वाशिंगटन,12 अगस्तज। अमेरिका की एक कोर्ट ने खालिस्तानी आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश में गिरफ्तार भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता की सजा सुनाने की सुनवाई टाल दी है। मामले में अमेरिकी सरकार ने गुप्ता की सजा को टालने का अनुरोध किया था, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। इससे पहले, न्यूयॉर्क के दक्षिणी जिले के अमेरिकी जिला न्यायालय ने गुप्ता को सजा सुनाने के लिए 25 सितंबर की तारीख तय की थी।

न्यायाधीश विक्टर मैरेरो को 3 अगस्त को लिखे पत्र में अमेरिकी अटॉर्नी जेम्स मैकडोनाल्ड ने कहा कि मामले का पीड़ित (संभवत: पन्नू का जिक्र) सजा की सुनवाई में उपस्थित होना चाहता है और 25 सितंबर को वह देश से बाहर है।

मैकडोनाल्ड ने लिखा, सरकार कोर्ट से अनुरोध करती है कि पीड़ित की बात रखने के वैधानिक अधिकारों को प्रभावी बनाने के लिए कार्यवाही को थोड़े समय के लिए स्थगित किया जाए। वह 6 या 20 नवंबर को उपलब्ध है।

भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने इस साल 13 फरवरी को पन्नू की हत्या रचने के मामले में 3 आरोपों में अपना जुर्म कबूल कर लिया था।

उसने स्वीकार किया कि उसने हत्या के लिए अमेरिका में एक व्यक्ति को 15,000 डॉलर (14.31 लाख रुपये) का भुगतान किया था। साथ ही, मनी लॉन्ड्रिंग की साजिश रची थी।

मामले में विवाद तब हुआ था, जब अमेरिकी अधिकारियों ने गुप्ता को भारत सरकार द्वारा नियुक्त हत्या की साजिश में शामिल बताया था।

गुप्ता को 30 जून, 2023 को चेक गणराज्य में गिरफ्तार किया गया और एक साल बाद अमेरिका प्रत्यर्पित किया गया। पहले गुप्ता ने हत्या की साजिश में हाथ होने से इनकार किया था।

अमेरिकी कोर्ट गुप्ता को पहले 2 आरोपों में अधिकतम 10 साल और तीसरे आरोप में अधिकतम 20 साल कैद की सजा सुना सकती है।

पन्नू की हत्या की साजिश को अमेरिकी अधिकारियों ने कनाडा में जून, 2023 में हरदीप सिंह निज्जर की हत्या से भी जोड़ा था।

००

 

(वाशिंगटन)डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की में गुपचुप तरीके से क्यों बदला विमान? वजह आई सामने

वाशिंगटन,12 अगस्त। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पिछले महीने अपनी तुर्की यात्रा के दौरान आधिकारिक विमान की जगह एक दूसरे विमान से लौटे थे। पहले वे अपने आधिकारिक विमान में ही सवार हुए थे, लेकिन बाद में गुपचुप तरीके से विमान बदल लिया था। अब इसकी वजह सामने आई है। 2 अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप के विमान पर ईरान के मिसाइल हमले के खतरे को देखते हुए ये कदम उठाया गया था।

रिपोर्ट के अनुसार, 2 अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान विमान पर संभावित मिसाइल हमले की धमकी के चलते ट्रंप ने विमान बदला था।

अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने संकेत दिया कि ट्रंप को ले जा रहे विमान पर सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया जा सकता है।

ये भी कहा गया कि नाटो शिखर सम्मेलन स्थल के पास एक व्यक्ति को कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ देखा गया था।

अधिकारियों ने बताया कि खुफिया जानकारी से यह भी संकेत मिला कि ईरान को पता था कि ट्रंप अंकारा में कहां ठहरे हुए थे। यहां तक कि ईरान को होटल की उस मंजिल के बारे में भी पता था, जहां ट्रंप रुके थे।

इस खतरे को गंभीर मानते हुए ट्रंप की सुरक्षा में लगे अधिकारियों ने बेहद गुपचुप तरीके से विमान बदलने की योजना बनाई, जिसे अब खुद ट्रंप ने भी स्वीकार किया है।

ट्रंप नाटो शिखर सम्मेलन में शामिल होने तुर्की गए थे। 8 जुलाई को अंकारा से लौटते समय वे बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। हालांकि, ये केवल एक दिखावा था।

इसके बाद ट्रंप को एक खाने के कंटेनर के जरिए इस विमान से ले जाकर दूसरे सैन्य विमान सी-32ए में बैठाया गया। ये विमान उन्हें तुर्की से ब्रिटेन लेकर गया।

ये संभावित ईरानी हमलावरों को चकमा देने के लिए किया गया था।

बाद में ट्रंप ने पत्रकारों से कहा कि वे जिस विमान से नाटो सम्मेलन में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था।

उन्होंने कहा, अगर कोई हमला होता तो उसी विमान को निशाना बनाया जाता। मैं वही करता हूं, जो सुरक्षा एजेंसियां कहती हैं। मुझे लगता है कि वहां कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा पूछताछ नहीं की। मुझे बहुत सारी धमकियां मिलती हैं।

००

 

(मैड्रिड)स्यूटा में अवैध प्रवासियों को वापस भेजा जाएगा मोरक्को, स्पेन के विदेश मंत्री का बड़ा ऐलान

मैड्रिड,12 अगस्त। स्पेन के विदेश मंत्री जोस मैनुअल अल्बारेस ने स्यूटा दौरे के दौरान कहा है कि जुलाई के आखिर में स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले सभी प्रवासियों को वापस मोरक्को भेजा जाएगा।

स्पेन सरकार के अनुमान के मुताबिक, जुलाई के अंत में पड़ोसी देश मोरक्को से 70,000 से अधिक लोग अवैध रूप से सीमा पार कर इस क्षेत्र में प्रवेश कर गए थे। स्यूटा के राष्ट्रपति जुआन जीसस विवास ने पिछले गुरुवार को यूरोपीय संसद की नागरिक स्वतंत्रता, न्याय और गृह मामलों की समिति की एक विशेष बैठक में बताया था कि इस बड़े पैमाने पर हुए प्रवासी प्रवेश के दौरान करीब 100 लोगों की मौत हो गई।

विवास ने हाल ही में कहा था कि स्यूटा में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले ज्यादातर लोग स्वेच्छा से मोरक्को लौट चुके हैं, लेकिन लगभग दस हजार लोग अब भी वहां मौजूद हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्री अल्बारेस ने कहा कि कुछ प्रवासी ऑनलाइन फैलाई गई गलत जानकारी के प्रभाव में आ गए थे। उन्हें यह विश्वास दिलाया गया था कि स्यूटा में प्रवेश करने के बाद उन्हें स्पेन के मुख्य भूभाग या यूरोप के अन्य हिस्सों में जाने का अधिकार मिल जाएगा।

उन्होंने बताया कि शहर से कोई भी व्यक्ति स्पेन के मुख्य भूभाग में नहीं गया है। अल्बारेस ने कहा कि मोरक्को के साथ हम जो राजनयिक प्रयास कर रहे हैं, उनका उद्देश्य अनियमित तरीके से प्रवेश करने वाले सभी लोगों को वापस भेजना है। इस बीच, 15 अगस्त को एक और बड़े पैमाने पर सीमा पार करने की संभावित योजना से जुड़ी ऑनलाइन रिपोर्टों के बाद स्पेनिश अधिकारियों ने स्यूटा में तैनात सैन्य कर्मियों और सिविल गार्ड के सभी अवकाश रद्द कर दिए हैं।

विवास ने यूरोपीय संसद की उसी विशेष बैठक में बताया था कि स्पेन के उत्तर अफ्रीकी क्षेत्र स्यूटा में बड़े पैमाने पर सीमा पार करने की घटना के दौरान लगभग 100 लोगों की मौत हुई थी। उन्होंने कहा कि करीब 80,000 लोग स्यूटा में दाखिल हुए थे, जिनमें से लगभग 75,000 बाद में स्वेच्छा से लौट गए।

विवास के अनुसार, अभी भी 3,000 से 5,000 प्रवासी स्यूटा में मौजूद हैं। इससे वहां के स्वागत केंद्रों पर भारी दबाव पड़ गया है और गंभीर मानवीय संकट पैदा हो गया है। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने, प्रवासियों के लिए अधिक संसाधन उपलब्ध कराने और यूरोपीय संघ की एजेंसियों से ज्यादा सहयोग देने की मांग की।

००

 

(वेलिंगटन)न्यूजीलैंड के पीएम लक्सन ने जीता विश्वास मत, बने रहेंगे नेशनल पार्टी के नेता

वेलिंगटन,12 अगस्त। न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने बुधवार को कॉकस में हुए विश्वास मत में समर्थन हासिल कर लिया। वह सत्तारूढ़ नेशनल पार्टी के नेता बने रहेंगे। यह फैसला राजधानी वेलिंगटन में कई घंटों तक चली कॉकस बैठक के बाद सामने आया।

लक्सन ने संसद में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि उन्हें अपनी पार्टी के सांसदों का पूरा समर्थन मिला है और वह नेशनल पार्टी के नेता के पद पर बने रहेंगे। रिपोर्ट के अनुसार, यह विश्वास मत न्यूजीलैंड के आम चुनाव से 90 दिन से भी कम समय पहले हुआ है। ऐसे में चुनावी अभियान की तैयारी कर रही सत्तारूढ़ पार्टी के लिए लक्सन के नेतृत्व पर फिर से ध्यान केंद्रित हो गया है।

लक्सन ने यह बैठक उस समय बुलाई जब उनके नेतृत्व को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं। हाल के महीनों में उनकी कुछ टिप्पणियों और फैसलों को लेकर विवाद हुए थे। इनमें व्यवसायों को लेकर दिया गया उनका माता-पिता और बच्चे वाला बयान, ऑकलैंड की यात्रा के लिए सैन्य विमान का इस्तेमाल, और दोबारा चुने जाने पर मिश्रित-सदस्य आनुपातिक चुनाव प्रणाली पर जनमत संग्रह कराने का प्रस्ताव शामिल था।

प्रधानमंत्री बनने के बाद यह दूसरा मौका था जब लक्सन को विश्वास मत का सामना करना पड़ा। इससे पहले अप्रैल में भी ऐसा मतदान हुआ था। विश्वास मत में समर्थन मिलने के बाद लक्सन ने कहा कि नेशनल पार्टी के लिए सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य आगामी आम चुनाव में लेबर पार्टी के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन को हराना है। न्यूजीलैंड का अगला आम चुनाव 7 नवंबर को होना है।

सात अगस्त को जारी टैक्सपेयर्स यूनियन-कुरिया सर्वेक्षण के अनुसार, नेशनल पार्टी को 31 प्रतिशत समर्थन मिला, जो पिछले सर्वेक्षण की तुलना में 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। सर्वेक्षण में अनुमान लगाया गया कि नेशनल पार्टी के नेतृत्व वाला गठबंधन संसद में मामूली बहुमत बनाए रखने में सफल हो सकता है। वहीं मुख्य विपक्षी दल लेबर पार्टी का समर्थन 3.7 प्रतिशत अंक घटकर 27.8 प्रतिशत रह गया।

यह सर्वेक्षण करिया मार्केट रिसर्च ने न्यूजीलैंड टैक्सपेयर्स यूनियन के लिए एक अगस्त से चार अगस्त के बीच किया था। इसमें 1,000 योग्य और संभावित मतदाताओं की राय ली गई। टैक्सपेयर्स यूनियन के अनुसार, सर्वेक्षण में त्रुटि की अधिकतम सीमा प्लस या माइनस 3.1 प्रतिशत अंक है। हालांकि, जुलाई में जारी रेडियो न्यूजीलैंड-रीड रिसर्च सर्वेक्षण में नेशनल पार्टी का समर्थन 28.7 प्रतिशत दर्ज किया गया था। यह 2021 में लक्सन के पार्टी नेता बनने के बाद उसका सबसे निचला स्तर था।

००

 

(अदन/रियाद)लाल सागर में हूती विद्रोहियों का खूनी डबल-टैप हमला, छह की मौत, नए रक्षा समझौते पर उठे सवाल

अदन/रियाद,12 अगस्त। लाल सागर के संवेदनशील बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है. इसी क्रम में यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों पर एक भीषण डबल-टैप मिसाइल हमले का आरोप लगाया है, जिसमें कम से कम छह लोगों की मौत हो गई है.

यमन के परिवहन मंत्रालय के अनुसार, हूती विद्रोहियों ने खाद्य सामग्री ले जा रहे तिहामाह नामक छोटे मालवाहक जहाज पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं. शुरुआत में इसके स्वामित्व को लेकर भ्रम था और इसे सऊदी अरब का जहाज बताया गया था, लेकिन मरीनट्रैफिक के आंकड़ों से साफ हुआ कि यह तंजानिया के ध्वज के तहत संचालित हो रहा था और इसका स्वामित्व मिस्र तथा यमन की पंजीकृत कंपनियों के पास है. इस हमले के कारण जहाज में भयंकर आग लग गई, जिससे चालक दल के चार सदस्यों (तीन पाकिस्तानी और एक इंडोनेशियाई नागरिक) की मौत हो गई. इसके अतिरिक्त, चार अन्य नाविक और एक बचावकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए.

इस घटना का सबसे डरावना पहलू यह रहा कि जब घटनास्थल पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया, तो हूती विद्रोहियों ने उसी जहाज पर दोबारा मिसाइल दाग दी. यमन सरकार ने इस दूसरे हमले को बचाव कर्मियों और जहाज पर मौजूद अन्य सभी लोगों के जीवन को जानबूझकर खतरे में डालने वाला आपराधिक कृत्य करार दिया है. बाद में यमन के तटरक्षक बल ने भी पुष्टि की कि इस समग्र हादसे में जान गंवाने वालों में दो बचावकर्मी भी शामिल थे.

इस समुद्री संकट के साथ ही क्षेत्रीय मोर्चे पर भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ गया है. हाल ही में पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौते की घोषणा की गई थी. इसी दौरान यमन के हूती विद्रोहियों ने जाजान स्थित अरामको रिफाइनरी को ड्रोन हमलों का निशाना बनाया, जिससे वहां रविवार सुबह भीषण आग लग गई. हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने दावा किया कि यह कार्रवाई सादा और हज्जा प्रांतों पर सऊदी ड्रोन अभियानों के जवाब में की गई थी. हालांकि सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने बाद में आग पर काबू पाने की पुष्टि कर दी है, लेकिन यरूशलम पोस्ट में प्रकाशित एक विश्लेषण के मुताबिक, इस बड़े हमले के बाद नवगठित मक्का गठबंधन की तरफ से कोई भी ठोस सैन्य प्रतिक्रिया या चेतावनी सामने नहीं आई है, जिसे इस नए रक्षा समझौते की पहली और विफल परीक्षा माना जा रहा है.

००

 

(नई दिल्ली)टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने दिया इस्तीफा, 18 अगस्त की एजीएम से पहले बड़ा फैसला

नई दिल्ली ,12 अगस्त ,(आरएनएस)। देश के सबसे बड़े और प्रतिष्ठित औद्योगिक घराने ‘टाटा समूहÓ से कॉर्पोरेट जगत को हिला देने वाली सबसे बड़ी खबर सामने आई है। लंबे समय से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। 18 अगस्त को होने वाली बेहद अहम सालाना आम बैठक से ठीक पहले उठाए गए इस कदम ने उद्योग जगत में सनसनी फैला दी है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा के साथ चल रही तनातनी और अंदरूनी कलह को इस बड़े फैसले की मुख्य वजह माना जा रहा है।

2027 तक पूरा करेंगे कार्यकाल, उत्तराधिकारी तलाशने की अपील

इस्तीफे का ऐलान करने के बाद एन. चंद्रशेखरन ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि उन्होंने टाटा संस के बोर्ड को अपने इस फैसले से आधिकारिक तौर पर अवगत करा दिया है। चंद्रशेखरन 20 फरवरी 2027 तक अपना मौजूदा कार्यकाल पूरा करेंगे, लेकिन इसके बाद वह दोबारा इस पद पर नियुक्ति की मांग नहीं करेंगे। उन्होंने बोर्ड से यह भी अपील की है कि कामकाज की सुचारू व्यवस्था बनाए रखने के लिए जल्द से जल्द उनके उत्तराधिकारी के नाम पर विचार कर फैसला लिया जाए।

वोटिंग से पहले ही खुद किया किनारा

कंपनी के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 18 अगस्त को होने वाली एजीएम में शेयरहोल्डर डायरेक्टर के रूप में चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति को लेकर वोटिंग होनी थी। हालांकि, उनके दोबारा चुने जाने को लेकर कंपनी के भीतर अनिश्चितता और भारी तनाव का माहौल बना हुआ था। विवादित स्थिति और संभावित विरोध का सामना करने के बजाय चंद्रशेखरन ने खुद ही सम्मानजनक तरीके से पद छोड़ने का विकल्प चुन लिया।

नोएल टाटा से गहराते मतभेद और विवादों की जड़

इस पूरे घटनाक्रम के पीछे टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और एन. चंद्रशेखरन के बीच की गहरी असहमति है। दरअसल, फरवरी महीने में ही टाटा संस बोर्ड ने चंद्रशेखरन की दोबारा नियुक्ति पर फैसला टाल दिया था, क्योंकि नोएल टाटा ने ग्रुप के कुछ नए बिजनेस (कारोबार) के खराब प्रदर्शन पर तीखे सवाल उठाए थे। यह विवाद सिर्फ पुनर्नियुक्ति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि बोर्ड में प्रतिनिधित्व, ग्रुप की रणनीति और माइनॉरिटी शेयरहोल्डर शापूरजी पालोनजी के प्रस्तावित एग्जिट जैसे अहम मुद्दों पर भी दोनों पक्षों में ठन गई थी। इसी अंदरूनी खींचतान का नतीजा था कि टाटा संस के एक डायरेक्टर को पहले ही बाहर होना पड़ा, और अब खुद चंद्रशेखरन ने भी किनारा कर लिया है।

00

 

(नई दिल्ली)वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ पर सांसदों की ‘हर घर तिरंगाÓ बाइक रैली

उपराष्ट्रपति ने भारत मंडपम से बाइक रैली को दिखाई हरी झंडी, कहा—’हर घर तिरंगाÓ अभियान बना जन आंदोलन

नई दिल्ली, ,12 अगस्त ,(आरएनएस)। उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम से सांसदों और अन्य जन प्रतिनिधियों की ‘हर घर तिरंगाÓ बाइक रैली को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरमÓ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस रैली का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव, एकता और नागरिक भागीदारी की भावना को मजबूत करना था। रैली भारत मंडपम से मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम तक गई।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने कहा कि ‘वंदे मातरमÓ ने मातृभूमि के प्रति प्रेम को राष्ट्रीय कर्तव्य में बदल दिया और यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम की भावना की सशक्त अभिव्यक्ति बन गया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत के अमर शब्दों ने देश के अनगिनत स्वतंत्रता सेनानियों को साहस, बलिदान और आशा से प्रेरित किया।

स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को किया याद

उपराष्ट्रपति ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की अपनी हालिया यात्रा का उल्लेख करते हुए नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप और ऐतिहासिक सेलुलर जेल के अपने दौरे को भावपूर्ण अनुभव बताया। उन्होंने 1943 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा वहां तिरंगा फहराए जाने और सेलुलर जेल में बंद स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया। उन्होंने कहा कि अनेक स्वतंत्रता सेनानियों ने ‘वंदे मातरमÓ का उद्घोष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

श्री राधाकृष्णन ने स्वतंत्रता संग्राम में ‘वंदे मातरमÓ के राष्ट्रव्यापी प्रभाव को रेखांकित करते हुए तमिलनाडु के स्वतंत्रता सेनानियों और नेताओं के योगदान को भी याद किया। उन्होंने राष्ट्रीय कवि सुब्रमण्यम भारती के साथ वी. ओ. चिदंबरम पिल्लई, सुब्रमण्यम शिव, तिरुप्पुर कुमारन और वंचिनाथन के योगदान एवं बलिदान का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन स्वतंत्रता सेनानियों ने ‘वंदे मातरमÓ की भावना और उसके संदेश को आम जनता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

‘हर घर तिरंगाÓ बना जन आंदोलन

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 में शुरू किया गया ‘हर घर तिरंगा अभियानÓ अब एक जन आंदोलन का रूप ले चुका है। देशभर में नागरिक तिरंगा यात्राओं, बाइक और साइकिल रैलियों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों तथा विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से अभियान में भाग ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि तिरंगा हमारी मातृभूमि की भावना, राष्ट्रीय एकता और गौरव का प्रतीक है। उपराष्ट्रपति ने सांसदों और अन्य जन प्रतिनिधियों से अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में ‘हर घर तिरंगाÓ अभियान को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने तथा नागरिकों को गर्व के साथ राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए प्रेरित करने का आह्वान किया।

केंद्रीय मंत्री और जन प्रतिनिधि हुए शामिल

बाइक रैली में केंद्रीय मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, श्री राजीव रंजन सिंह, श्री वीरेंद्र कुमार, श्री जी. किशन रेड्डी, श्री किरेन रिजिजू और श्री जितेंद्र सिंह सहित संसद सदस्यों तथा अन्य जन प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

रैली के माध्यम से राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरमÓ की 150वीं वर्षगांठ और ‘हर घर तिरंगाÓ अभियान के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के साथ राष्ट्रभक्ति, एकता और नागरिक सहभागिता की भावना को मजबूत करने का संदेश दिया गया।

00

 

(नई दिल्ली)विश्व हाथी दिवस पर प्रधानमंत्री ने भारत के मजबूत हाथी संरक्षण प्रयासों को रेखांकित किया

भारत में दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक जंगली एशियाई हाथी, देश में 33 हाथी अभ्यारण्य

नई दिल्ली, ,12 अगस्त ,(आरएनएस)। विश्व हाथी दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भारत की समृद्ध पर्यावरणीय विरासत में हाथियों के महत्वपूर्ण स्थान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हाथी भारत की प्राकृतिक और पर्यावरणीय विरासत का अभिन्न हिस्सा रहा है और देश उसके संरक्षण के लिए लगातार मजबूत प्रयास कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह गर्व की बात है कि दुनिया के 60 प्रतिशत से अधिक जंगली एशियाई हाथी भारत में पाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों के संरक्षण के लिए देश में व्यापक स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

देश में 33 हाथी अभ्यारण्य

श्री मोदी ने बताया कि भारत में वर्तमान में 33 हाथी अभ्यारण्य हैं। ये अभ्यारण्य हाथियों को प्राकृतिक आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ उनके दीर्घकालिक संरक्षण के प्रयासों को मजबूती प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि हाथियों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा और संरक्षण अत्यंत महत्वपूर्ण है।

प्रधानमंत्री ने हाथी संरक्षण के कार्य में योगदान देने वाले वन कर्मियों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, महावतों और स्थानीय समुदायों की भूमिका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इन सभी के सामूहिक प्रयास हाथियों और उनके आवासों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

संरक्षण में स्थानीय समुदायों की अहम भूमिका

प्रधानमंत्री ने कहा कि हाथी संरक्षण केवल सरकारी प्रयासों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें वैज्ञानिकों, वन विभाग के कर्मचारियों, पशु चिकित्सकों, महावतों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी भी आवश्यक है। इन सभी के समन्वित प्रयासों से हाथियों के प्राकृतिक आवासों को सुरक्षित रखने और उनके दीर्घकालिक संरक्षण को सुनिश्चित करने में मदद मिल रही है।

‘हमारी पर्यावरणीय विरासत का अभिन्न अंग है हाथीÓ

प्रधानमंत्री ने विश्व हाथी दिवस पर सामाजिक माध्यम ‘एक्सÓ पर साझा संदेश में कहा कि भारत को अपनी पर्यावरणीय विरासत का अभिन्न हिस्सा रहे इस भव्य जीव पर गर्व है। उन्होंने देश में जंगली एशियाई हाथियों की बड़ी आबादी और उनके संरक्षण के लिए बनाए गए हाथी अभ्यारण्यों को महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।

उन्होंने हाथी संरक्षण के लिए समर्पित सभी वन कर्मियों, वैज्ञानिकों, पशु चिकित्सकों, महावतों और स्थानीय समुदायों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनके योगदान की सराहना की।

00

 

(नई दिल्ली)रामनाथ कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए धरोहर बनेगी: प्रधानमंत्री मोदी

‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिकÓ में व्यक्तिगत संघर्षों से अधिक भारत के गणतंत्र की जीत की कहानी: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली, ,12 अगस्त ,(आरएनएस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा के विमोचन के अवसर पर कहा कि कोविंद की जीवन यात्रा भारतीय लोकतंत्र और भारतीय समाज के लिए प्रेरणादायक है। उन्होंने विश्वास जताया कि श्री कोविंद की आत्मकथा भारतीय लोकतंत्र और समाज के लिए एक महत्वपूर्ण धरोहर साबित होगी।

आत्मकथा के विमोचन कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री रामनाथ कोविंद से उनका लंबे समय से परिचय रहा है और उन्हें करीब से जानने तथा राष्ट्रपति के रूप में उनका मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि कोविंद का स्नेह और आत्मीयता उनके लिए बड़ी पूंजी रही है।

संघर्षों से मिली जीत को गणतंत्र की जीत बताया

प्रधानमंत्री ने कहा कि श्री कोविंद ने अपनी आत्मक

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *