विगत चार महीनों से किया जा रहा एक पूरे परिवार का मानसिक उत्पीड़न, ब्लैकमेलिंग, और परिवार के लिए आत्महत्या जैसी स्तिथि। वरिष्ठ नागरिक महिलाओं को पुरुष के नग्न फोटो का भेजा जाना और पुलिस द्वारा 4 महीने में नग्न AI फोटो और मानहानिकारक अश्लील सामग्री हटवाने में घोर असफलता (पुलिस द्वारा न हटवा सकना)। पीड़ित परिवार से पुलिस द्वारा व्हाट्सप्प कॉल लगाकर अभद्रता करना और साक्ष्य होते हुए भी
निवेदन: कृपया पीड़ित परिवार के समस्त सदस्यों का नाम और पहचान दोनों गोपनीय रखी जाए
विषय: FIR संख्या 0058/2026 (साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, आगरा) में विवेचना की शून्य प्रगति, अश्लील/एआई (AI) जनित सामग्री को न हटवाए जाने, विवेचक द्वारा जबरन अंतिम रिपोर्ट (FR) हेतु दबाव बनाने, पुलिस द्वारा अमर्यादित आचरण करने तथा UPHRC व MHA के आदेशों के अनुपालन में प्रभावी कार्यवाही एवं लिखित प्रगति आख्या प्रदान करने तथा प्रेस नोट जारी करने हेतु प्रार्थना-पत्र।
माननीय महोदया / महोदय,
FIR संख्या 0058/2026, साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, आगरा का शिकायतकर्ता हूँ। मैं और मेरा पूरा परिवार पहले दिन से ही आगरा पुलिस तथा साइबर पुलिस की जाँच में पूर्ण सहयोग प्रदान कर रहा है। इसके बावजूद, अत्यंत क्षोभ के साथ मुझे निम्नलिखित गंभीर तथ्य, विधिक चिंताएं एवं सुरक्षा संबंधी आशंकाएं आपके संज्ञान में लानी पड़ रही हैं:
1. विवेचना में शून्य प्रगति एवं सामग्री का न हटना:
प्रथम प्रार्थना-पत्र (संदर्भ संख्या ACP(H) 48/2026, 11 अप्रैल 2026) दिए हुए लगभग 4 माह और FIR दर्ज हुए लगभग 3 माह बीत चुके हैं, किन्तु आज तक पुलिस द्वारा एक भी न्यूड फोटो, एआई जनित अश्लील छवि अथवा अश्लील संदेश इंटरनेट से डिलीट नहीं करवाया गया है। जिन तीन फर्जी अकाउंट्स को पुलिस बंद करवाने का दावा कर रही है, उनका केवल नाम/URL हटा है, वे आज भी मेरे परिचितों को अश्लील संदेश और न्यूड्स भेज रहे हैं।
2. “प्रणव सक्सेना” फर्जी अकाउंट एवं विभागों की टालमटोल:
“प्रणव सक्सेना” नाम के सक्रिय फर्जी फेसबुक अकाउंट के संबंध में साक्ष्यों सहित सूचित किए हुए साइबर थाना को 2 माह और साइबर सेल को 1 माह बीत चुका है। साइबर थाना इस मामले को साइबर सेल पर टाल रहा है और साइबर सेल इसे वापस साइबर थाना पर। वर्तमान विवेचक (IO) श्री आर.पी. सिंह जी का स्पष्ट कहना है कि “साइबर सेल जाकर अपने आप पता कर लो। यदि साइबर सेल इसपे टालमटोल कर रहा है तो हम कुछ नहीं कर सकते। हम साइबर सेल से कोऑर्डिनेट नहीं करेंगे।”
3. पुलिस का अमर्यादित आचरण, पद का दुरुपयोग एवं कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न:
मई-जून की भीषण गर्मी में भी पुलिस द्वारा बार-बार तुच्छ एवं पूर्व में दी जा चुकी जानकारियों हेतु थाने बुलाए जाने पर पीड़ित परिवार ने अपना कार्य छोड़कर पूर्ण सहयोग किया। किन्तु इसके विपरीत, दर्जनों कॉल्स के बावजूद साइबर सेल प्रभारी द्वारा महीनों तक संपर्क न करना एवं प्रत्युत्तर न देना पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। साइबर सेल का प्रत्येक कर्मचारी असहयोगात्मक रवैया अपना रहा है। जब भी पीड़ित परिवार पुलिस से अपनी बात सम्मानपूर्वक रखता है, तो फोन कॉल पर या थाने में पुलिसकर्मियों द्वारा अमर्यादित एवं अभद्र व्यवहार किया जाता है। जब पीड़ित पक्ष पूर्ण सम्मान के साथ विधिक प्रक्रिया का पालन कर रहा है, तो पुलिसकर्मियों द्वारा पद का दुरुपयोग कर दुर्व्यवहार करना अत्यंत अशोभनीय एवं विधिक रूप से अनुचित है।
4. अभियुक्त के प्रति अनुचित सहानुभूति एवं जबरन FR का दबाव:
दिनांक 12 जुलाई 2026 को साइबर थाना में तकनीकी साक्ष्यों के सम्मुख अभियुक्त स्वाति गुप्ता ने यह स्वीकार किया कि उसने श्रीलंका की नागरिक निमेशा के कहने पर ‘दीपांशी’ जैसे फर्जी अकाउंट्स बनाए थे, और मयंक और उसके परिवार के सम्बन्ध में सभी जानकारी श्री लंका में सांझा की थी। उसने यह भी माना कि FIR दर्ज होते ही उसने अपने तीनों फेसबुक अकाउंट बंद कर दिए थे (जो कि साइबर स्टॉकिंग का पुख्ता प्रमाण है अन्यथा कोई पुलिस अधिकारी द्वारा संभवतः यह सूचना अपराधीगणों के साथ साँझा की जा रही हो)। साक्ष्यों एवं तकनीकी लीड्स (गाजियाबाद IP आदि) की मौजूदगी के बावजूद, विवेचक महोदय का मुझ से कहना था कि मैं 10 रुपये के स्टाम्प पेपर पर अभियुक्त को माफ़ करने का एफिडेविट दे दूँ ताकि केस में FR लगाई जा सके। मना करने पर विवेचक का व्यवहार अत्यंत बेरुखा हो गया है। साक्ष्यों को नज़रअंदाज़ कर अपराधियों के प्रति पुलिस की यह कथित सहानुभूति और पीड़ित के प्रति उदासीनता पूर्णतः अन्यायपूर्ण है। हद तो तब हो गई जब साइबर पुलिस द्वारा अपराधियों के कृत्य पर यहाँ तक कहा जा रहा है कि “न्यूड्स डाल रहे हैं डालने दो, मानहानि कर रहे हैं करने दो, अपराध थोड़े ही कर रहे हैं।”
5. माननीय डीसीपी महोदय के आदेशों की अनदेखी:
पूर्व में माननीय डीसीपी (वेस्ट) (श्री आदित्य, साइबर क्राइम नोडल अधिकारी, आगरा) महोदय द्वारा जाँच साइबर सेल को सौंपी गई थी, किन्तु उस पर कृत कार्यवाही से आज तक पीड़ित परिवार को अवगत नहीं कराया गया है।
6. MHA जाँच, श्री लंका उच्चायोग एवं केस डायरी से छेड़छाड़ की आशंका:
पीड़ित परिवार के प्रयासों से गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा Office Memorandum F.No.15011/78/2026-HR-I&II (दिनांक 13.07.2026) के माध्यम से जाँच आरम्भ की गई है। श्रीलंका हाई कमीशन ने भी पूर्ण सहयोग करने की पुष्टि पीड़ित परिवार के प्रयासों से की है। किन्तु साइबर पुलिस का कहना है कि “उन्हें साक्ष्य चाहिए तो हमसे संपर्क करें, हम फाइल नंबर के आधार पर MHA या हाई कमीशन श्रीलंका से कोऑर्डिनेट नहीं करेंगे।” मुझे प्रबल अंदेशा है कि साइबर पुलिस के किसी कर्मचारी द्वारा जाँच का गोपनीय विवरण अपराधियों के साथ साझा किया जा रहा है, जिससे केस डायरी में आवश्यक साक्ष्यों को दर्ज न करने या सबूत नष्ट करने की संभावना है।
7. UPHRC का आदेश एवं निरंतर अपराध:
उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग (UPHRC) ने Case No. 10112/24/1/2026 में दिनांक 26.05.2026 को स्पष्ट आदेश पारित किया था। इसके बावजूद कोई प्रभावी राहत नहीं मिली है। अपराध निरंतर (Continuing Offence) जारी है। प्रार्थी और उसकी बहनों के पूरे कार्यस्थल (जैसे- Holy Public Kindergarten आदि) एवं ससुराल पक्ष में आज भी अश्लील कहानियाँ और एआई न्यूड्स भेजे जा रहे हैं, जिससे उनका वैवाहिक जीवन संकट में है।
विधिवत प्रार्थनाएँ:
अतः आपसे करबद्ध निवेदन है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के विधिक प्रावधानों के अंतर्गत निम्नलिखित निवारक कदम तत्काल उठाए जाएं:
1) लिखित प्रगति आख्या (Progress Report): पीड़ित परिवार को FIR संख्या 0058/2026 की विवेचना की अद्यतन प्रगति आख्या लिखित रूप में डाक अथवा नजदीकी पुलिस चौकी के माध्यम से तत्काल उपलब्ध कराई जाए।
2) समन्वय एवं तत्काल कार्रवाई: “प्रणव सक्सेना” नामक फर्जी आईडी एवं अन्य सभी आपत्तिजनक समूहों/सामग्री को तत्काल बंद करवाने हेतु साइबर थाना एवं साइबर सेल को परस्पर समन्वय स्थापित करने के सख्त आदेश दिए जाएँ, तथा पीड़ित को एक कार्यालय से दूसरे कार्यालय भटकाने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाए।
3) मानवीय एवं सम्मानजनक आचरण: साइबर सेल एवं साइबर थाना को कड़ाई से निर्देशित किया जाए कि वे पीड़ित पक्ष के साथ मानवीय संवेदना एवं सहानुभूतिपूर्ण व्यवहार करें। थाने बुलाकर अथवा दूरभाष पर पीड़ित परिवार से की जा रही अभद्रता तत्काल बंद की जाए। यदि किसी कारणवश वे कॉल/मैसेज का उत्तर देने में असमर्थ हों, तो समय मिलने पर पीड़ित से शिष्टाचारपूर्वक संपर्क करें।
4) FR पर रोक एवं निष्पक्ष विवेचना: साक्ष्यों की पूर्ण जाँच होने तथा सभी अश्लील सामग्री हटने तक केस में FR लगाने पर रोक लगाई जाए। गाजियाबाद आईपी, डिवाइसेस एवं स्वाति गुप्ता की स्वीकारोक्ति सहित समस्त डिजिटल साक्ष्य विधिवत केस डायरी में अंकित किए जाएं।
5) MHA एवं अंतर्राष्ट्रीय समन्वय: MHA के OM (दिनांक 13.07.2026) तथा UPHRC के आदेश का संज्ञान लेते हुए श्रीलंका हाई कमीशन और MLAT के माध्यम से उचित समन्वय स्थापित कर अपराधियों पर विधिक कार्रवाई की जाए।
6) प्रेस नोट / सार्वजनिक सूचना: पीड़ित परिवार की प्रतिष्ठा एवं सुरक्षा को दृष्टिगत रखते हुए पुलिस द्वारा तत्काल एक उपयुक्त सार्वजनिक सूचना/प्रेस नोट जारी किया जाए कि प्रकरण विवेचनाधीन है और अफवाह/सामग्री फैलाने वालों पर कार्रवाई होगी।
प्रार्थी और उसका परिवार पुलिस के प्रत्येक छोटे-बड़े कर्मचारी का पूर्ण सम्मान करता है। यदि किसी कर्मचारी के अहम (Ego) को प्रार्थी की किसी कार्यवाही से चोट लगी हो, तो हम विनम्रतापूर्वक उसके लिए क्षमाप्रार्थी हैं। किन्तु, यदि पुलिस इसी प्रकार द्वेषभाव एवं असहयोगात्मक रवैया रखेगी और भविष्य में पीड़ित परिवार के साथ कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो उसकी पूर्ण जिम्मेदारी आगरा पुलिस की होगी।
कृपया हमारी सुरक्षा संबंधी आशंकाओं को गंभीरता से संज्ञान में लें तथा न्याय प्रदान करें।
सादर प्रार्थना सहित

