विराम खण्ड-5, गोमतीनगर में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ।
महान राष्ट्रवादी, प्रख्यात शिक्षाविद एवं भारतीय संस्कृति के प्रेरणास्रोत स्वर्गीय डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती आज विराम खण्ड-5, गोमतीनगर, जनकल्याण समिति के तत्वावधान में अत्यंत श्रद्धा, उत्साह एवं गरिमामय वातावरण में मनाई गई। इस अवसर पर समिति के पदाधिकारियों, माननीय सदस्यों एवं स्थानीय निवासियों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके राष्ट्र निर्माण में दिए गए अमूल्य योगदान को स्मरण किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जनकल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. भरत राज सिंह ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे महान राष्ट्रवादी, दूरदर्शी शिक्षाविद तथा भारतीय संस्कृति एवं राष्ट्रीय एकता के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने बताया कि वर्ष 1943 से 1946 तक वे हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रहे। स्वतंत्र भारत की प्रथम केंद्रीय सरकार में उन्होंने उद्योग एवं आपूर्ति तथा खाद्य एवं रसद मंत्री के रूप में महत्वपूर्ण दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया।
डॉ. सिंह ने आगे बताया कि लियाकत-नेहरू समझौते से असहमति व्यक्त करते हुए डॉ. मुखर्जी ने वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना की और उसके प्रथम राष्ट्रीय अध्यक्ष बने। उन्होंने देश की एकता और अखंडता के लिए आजीवन संघर्ष किया। वर्ष 1953 में बिना परमिट जम्मू-कश्मीर प्रवेश करने पर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया, जहाँ 23 जून 1953 को उनका निधन हो गया। उनका जीवन राष्ट्रहित, त्याग और समर्पण का अनुपम उदाहरण है, जिससे वर्तमान एवं भावी पीढ़ियाँ निरंतर प्रेरणा प्राप्त करती रहेंगी।
इस अवसर पर जनकल्याण समिति, विराम खण्ड-5 के अध्यक्ष डॉ. भरत राज सिंह, सेवानिवृत्त न्यायाधीश एस. एन. टंडन, संगठन सचिव प्रभात श्रीवास्तव, कोषाध्यक्ष अतुल जौहरी, संचार सचिव मनोज शर्मा, संयुक्त सचिव प्रवीण मिश्रा, पूर्व कोषाध्यक्ष राकेश तिवारी तथा सदस्य संदीप मिश्रा सहित अनेक सम्मानित नागरिक एवं स्थानीय निवासी उपस्थि
त रहे।

