शेफ और एच.सी.एल फाउंडेशन ने लखनऊ के आठ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में किए लैंगिक समानता पर आधारित वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किए

शेफ और एच.सी.एल फाउंडेशन ने लखनऊ के आठ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में किए लैंगिक समानता पर आधारित वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किए
लखनऊ, 26 फरवरी 2026: पहली बार लखनऊ के आठ कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों (KGBV) में वार्षिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन कार्यक्रमों का आयोजन स्टडी हॉल एजुकेशनल फाउंडेशन (शेफ) ने एच.सी.एल फाउंडेशन के सहयोग से और बेसिक शिक्षा विभाग, लखनऊ के समर्थन से किया। अंतिम कार्यक्रम 25 फरवरी को आयोजित हुआ। सभी आठ विद्यालयों में 560 अभिभावक शामिल हुए।
इस पहल की शुरुआत KGBV चिनहट से हुई थी। कार्यक्रम की सफलता के बाद जिला स्तर पर अनुमति मिलते ही अन्य KGBV में भी इसे आयोजित किया गया। हर विद्यालय ने लैंगिक समानता और बालिकाओं की शिक्षा जैसे विषयों को अपने कार्यक्रम का थीम बनाया। नृत्य और सामाजिक मुद्दा-आधारित नाटकों के माध्यम से छात्राओं ने अभिभावकों और समुदाय के सामने मजबूत संदेश रखे।
कार्यक्रमों में डॉ. उर्वशी साहनी (संस्थापक एवं सीईओ, SHEF), HCL Foundation के प्रतिनिधि, DC–बालिका शिक्षा, ब्लॉक स्तर के अधिकारी, तहसीलदार, बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी, एआरपी, मिशन शक्ति टीम और स्थानीय पुलिस के सदस्य मौजूद रहे।
बेसिक शिक्षा अधिकारी विपिन कुमार जी ने विद्यालयों को उनकी उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए बधाई दी और शेफ के सहयोग की सराहना करते हुए कहा, “जब विद्यालय, अभिभावक और समुदाय एक साथ आते हैं, तभी शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य पूरा होता है। ऐसे प्रयास निश्चित रूप से बच्चों के समग्र विकास और एक सशक्त भविष्य की आधारशिला रखते हैं।”
शेफ़ और एच.सी.एल की इस पहल की सराहना करते हुए DC–बालिका सविताजी ने कहा कि “ऐसे कार्यक्रम विद्यालयों को जीवंत बना देते हैं। इनसे अभिभावकों का विद्यालय से जुड़ाव बढ़ता है और शिक्षकों को बच्चों की क्षमता समाज के सामने प्रस्तुत करने का अवसर मिलता है, जिससे बालिकाओं के समग्र विकास के लिए एक सशक्त सहयोगी वातावरण तैयार होता है।”
BKT की कक्षा 7 की छात्रा सारोन ने बताया कि पहले वह आज़ादी का मतलब सिर्फ देश की स्वतंत्रता समझती थी। लेकिन वार्षिक कार्यक्रम की थीम के माध्यम से उसने जाना कि आज़ादी का मतलब लड़कियों के लिए बराबरी, अधिकार और आत्मविश्वास भी है। उसने कहा, “मुझे समझ आया कि मैं कुछ भी कर सकती हूँ।”
शिक्षकों ने इस पहल को नया और प्रभावशाली बताया। उनका कहना है कि इन कार्यक्रमों से बालिकाओं का आत्मविश्वास बढ़ा है और अभिभावकों का समर्थन भी मजबूत हुआ है।

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