7 जुलाई- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
निर्मल मन जन सो मोहि पावा ।
मोहि कपट छल छिद्र न भावा ।।
भेद लेन पठवा दससीसा ।
तबहुँ न कछु भय हानि कपीसा ।
( सुंदरकांड 43/3)
राम राम 🙏🙏
बिभीषण राम जी की शरण में आए हैं , उनके आने के कारण पर सुग्रीव आदि के संदेह प्रकट करने पर राम जी कहते हैं कि यदि वह बुरा ह्रदय वाला होता तो मेरे पास नहीं आता , मुझे तो निर्मल मन वाले ही पा सकते हैं । मुझे छल कपट पसंद नहीं है ।
हम सब राम जी को पाना चाहते हैं परंतु निर्मल मन न रखने के कारण हमें राम जी मिलते नहीं हैं । हम सब छल कपट रखने वाले लोगों के साथ रहते हैं तथा इस कारण उन्हीं की तरह बन जाते हैं । राम जी निर्मल हैं , राम जी के रूप , गुण , लीला का गुणगान कर हमारा भी मन निर्मल हो सकता है और हमें राम प्राप्ति हो सकती है । अथ ! राम का गुणगान कर , रघुनाथ का गुणगान कर 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

