श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

7 मार्च- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय

करम बचन मन छाडि छलु
जब लगि जनु न तुम्हार ।
तब लगि सुखु सपनेहुँ नहीं
किएँ कोटि उपचार ।।
( अयोध्याकाण्ड, दो. 107)
राम राम 🙏🙏
वन जाते हुए राम जी भरतद्वाज मुनि के आश्रम आए हैं । भरतद्वाज जी कहते हैं कि आपके दर्शन पाकर मेरी सब आशाएँ पूरी हो गई । जब तक कर्म , वचन व मन से छल छोड़कर मनुष्य आपका नहीं हो जाता है तब तक वह चाहे जितने भी उपाय कर ले, स्वप्न में भी वह सुख नही पाता है ।
कर्म, वचन , मन से छल छोड़ कर राम जी का होने में सुख है । छल है कि छूटता नहीं है , कारण मन कलुषित है , कलुषित मन छलयुक्त वचन व कर्म कराता है । भजन में लगें तो मन साफ़ हो । अतएव अपना भजन बढ़ाएँ, छल भगाएँ पुनि सुखी हो जाएँ । अथ ! राम राम जय राम राम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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