श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

22 जून – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जौं रघुबीर अनुग्रह कीन्हा ।
तौ तुम्ह मोहि दरसु हठि दीन्हा ।।
सुनहु बिभीषन प्रभु कै रीती ।
करहिं सदा सेवक पर प्रीती ।।
( सुंदरकांड दो. 6/3)
राम राम 🙏🙏
श्री हनुमान जी माँ को ढूँढते हुए लंका में बिभीषण के भवन आते हैं । विभीषण श्री हनुमान जी से कहते हैं कि आपसे मिलकर मुझे यह विश्वास हो गया कि श्री राम जी ने मुझपर कृपा की है तभी आपने मुझे दर्शन दिया है । श्री हनुमान जी कहते हैं कि विभीषण जी ! सुनिए, भगवान का यह व्यवहार है कि वे अपने भक्त से सदा प्रेम करते हैं ।
आत्मीय जनों ! श्री हनुमान जी ने विभीषण जी को भगवान के व्यवहार करने का तरीक़ा बताया है । वह उनका सेवक और भक्त प्रेम है। जो भी उनकी सेवा करेगा उनके प्रति समर्पण रखेगा वह अपने जीवन में प्रभु की समीपता महसूस करेगा अर्थात प्रभु अपने शरणागत रखेंगे। अतएव यह भगवान की रीति समझ कर सेवा में लग जाइए और श्री राम जी का प्रेम एवं भक्ति पाइए तो आइए सीताराम नाम भजन का आश्रय लें……श्री राम जय राम जय जय राम, श्री राम जय राम जय जय राम । सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम जय रघुनंदन जय सियाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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