श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

29 अगस्त- श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

जिमि सरिता सागर महुँ जाहीं ।
जद्यपि ताहि कामना नाहीं ।।
तिमि सुख संपति बिनहिं बोलाएँ
धरमसील पहिं जाहिं सुभाएँ ।।
( बालकांड 293/1-2)
राम राम 🙏🙏
धनुष टूटने पर श्री जनक जी के दूत राजा दशरथ जी के पास चिट्ठी लेकर आते हैं,सब बताते हैं, श्री दशरथ जी ने सब बात गुरु वशिष्ठ को बताई । गुरु वशिष्ठ जी कहते हैं कि जैसे नदियाँ समुद्र में जाती हैं हालाँकि समुद्र उन्हें बुलाता नहीं है उसी तरह सुख व संपत्ति बिना बुलाए ही धर्मात्मा ब्यक्ति के पास चली आती हैं ।
आत्मीय जन ! धर्मात्मा अर्थात जिसने अपनी आत्मा में धर्म को धारण किया हो, उसके पास सुख व संपदा दोनों स्वतः आ जाती है । श्री राम जी धर्म हैं, उन्हें अपनी आत्मा ( हृदय )में धारण कर लीजिए, सब अच्छाई खुद आपकी हो जाएँगीं और जीवन शांत व सुगम हो जाएगा। अथ….. श्री राम जय राम जय जय राम। सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम। सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩
संकलन तरूण जी लखनऊ

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