श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई

2 अप्रैल : श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

कलिजुग सम जुग आन नहिं,
जौं नर कर बिस्वास ।
गाइ राम गुन गन बिमल,
भव तर बिनहिं प्रयास ।।
( उत्तरकांड, दो 103)
जय सियाराम🙏🙏 कागभुसुंडि बाबा कलियुग के गुण, गरूड़ जी को सुना रहे हैं । वे कहते हैं कि यदि मनुष्य विश्वास करें तो कलियुग के समान कोई अन्य युग नहीं है, कारण कि इस युग में श्री राम जी के निर्मल नाम और गुणों को गा गाकर बिना परिश्रम के मनुष्य संसार सागर पार कर जाता है।
बंधुवर ! इस कलिकाल में श्री राम जी के निर्मल गुणों को जो भी गाएगा , वह स्वयं भी निर्मल हो जाएगा और निर्मल ब्यक्ति को संसार में कलुषता के दर्शन नहीं होते हैं, संसार में ब्यवहार करने में उसे आसानी हो जाती है । अतः श्री राम गुण गाएँ, आनंद पाएँ । अथ…..श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम, जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम ।
3 अप्रैल : श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏
नमो राघवाय 🙏

गीध अधम खग आमिष भोगी ।
गति दीन्ही जो जाचत जोगी ।।
सुनहु उमा ते लोग अभागी ।
हरि तजि होहिं बिषय अनुरागी ।।
( अरण्यकांड 32/1-2)
राम राम जी🙏🙏
गीधराज जटायु पक्षियों में अधम और मांसाहारी था, उसको भी श्री राम जी ने दुर्लभ गति दी जिसे योगी माँगते हैं । भगवान शिव जी माता पार्वती जी से कहते हैं कि पार्वती! सुनो, वे लोग अभागे हैं जो भगवान को छोड़कर विषयों से अनुराग करते हैं ।
आत्मीय जन ! भगवत कार्य में जो भी योगदान देता है भगवान उस पर कृपा करते हैं, भगवान उसके दुर्भाग्य को दूर कर उसे सौभाग्यशाली बना देते हैं । अतः अपने दुर्भाग्य को सौभाग्य में बदलना चाहते हैं तो आज से ही विषयों को छोड़ श्री राम जी से प्रेम करें, श्री राम जी की भक्ति में लगें और सतत श्री सीताराम नाम का भजन करते रहें।

4 अप्रैल – श्रीरामचरितमानस की भाव सहित चौपाई
नमो राघवाय 🙏

भजि रघुपति कर हित आपना ।
छाँडहु नाथ मृषा जल्पना ।।
नील कंज तनु सुंदर स्यामा ।
हृदयँ राखु लोचनाभिरामा ।।
( लंकाकांड 55/3)
राम राम 🙏🙏
श्री लक्ष्मण जी को शक्ति लगी है , श्री हनुमान जी सुषेन वैद्य को उपचार के लिए लाए हैं , उधर रावण कालनेमि राक्षस के पास जाता है और उससे श्री हनुमान जी का मार्ग रोकने को कहता है । कालनेमि उसे समझाते हुए कहता है कि हे नाथ, झूठी बकवाद छोड़ कर आप श्री राम भजन कर अपना हित कर लीजिए । आँखों को सुख देने वाले नीलकमल के समान सुंदर श्याम शरीर वाले श्री राम जी को अपने हृदय में धारण करें ।
आत्मीय जन ! रावण को झूठ पसंद है , उसे अपना भजन पसंद है इसीलिए उसका कल्याण नहीं हुआ । जिसने जिसने भी श्री राम जी को भजा उसका उसका कल्याण हो गया । हम आप भी तो अपने कल्याण के लिए इच्छुक हैं , फिर देरी किस बात की , नयनाभिराम श्री राम जी को हृदय में धारण कर श्री सीताराम जी को भजें, अवश्य कल्याण होगा। अस्तु…… श्री राम जय राम जय जय राम, सीताराम जय सीताराम जय सियाराम जय जय सियाराम, जय रघुनंदन जय सियाराम जानकीवल्लभ राजाराम।
सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम सीताराम 🚩🚩🚩 संकलन तरुण जी लखनऊ

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