स्तनपान शिशु के स्वस्थ्य जीवन की पहली सीढ़ी है। प्रधानाचार्य

मेडिकल कॉलेज में स्तनपान जागरूकता अभियान सम्पन्न हुआ।

देश की उपासना।

धनन्जय विश्वकर्मा

जौनपुरः

उमानाथ सिंह स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय, जौनपुर की प्रधानाचार्य प्रो० डा० रूचिरा सेठी के दिशा निर्देश में डा० सरिता पाण्डेय विभागाध्यक्ष, आब्स एण्ड गायनी एवं डा० ममता, विभागाध्यक्ष, पीडियाट्रीक्स विभाग के द्वारा 06 अगस्त, 2025 को “विश्व स्तनपान सप्ताह पर अस्पताल भवन में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। *कार्यक्रम की मुख्य अतिथि के रूप में प्रधानाचार्य प्रो० डा० रुचिरा सेठी* ने अपने संबोधन में बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह हर साल अगस्त के पहले सप्ताह में 01 से 07 अगस्त तक मनाया जाता है। स्तनपान न केवल एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, बल्कि यह शिशु के स्वस्थ्य जीवन की पहली सीढ़ी है। यह शिशु को आवश्यक पोषण, रोग प्रतिरोधक क्षमता और भावनात्मक सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही, यह माता को भी अनेक स्वास्थ्य लाभ पहुंचाता है।

उप प्रधानाचार्य प्रो० डा० आशीष यादव ने अपने उद्बोधन में जोर दिया कि स्तनपान कराने वाली माँ को विस्तारित परिवार और समुदाय के समर्थन की आवश्यकता होती है। बचपन के प्रारंभिक वर्षों से जुड़ी कई बीमारियों के साथ, माँ का दूध, जो पौष्टिक होता है, मस्तिष्क के विकास और शारीरिक विकास के लिए अति आवश्यक होता है, प्रतिरक्षा प्रदान करता है और इसके बहुत सारे लाभ हैं, इसे माताओं और उनके परिवारों के बीच सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो० डा० ए०ए० जाफरी ने अपने विचरो को प्रकट करते हुए बताया कि स्तनपान जैसी यह साधारण चीज, जो एक माँ अपने बच्चे के लिए कर सकती है, बड़े आधुनिक अस्पतालों और हाई-टेक गैजेट्स की तुलना में बच्चे के स्वास्थ्य के लिए कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने माँ की दूध की तुलना धरती माँ से की जो कोमल पत्तियों के स्वास्थ्य को सुनिश्चित करने के लिए पौधे की जड़ो को पोषण देती है।

आर्थोपेडिक्स विभाग के विभागध्यक्ष प्रो० डा० उमेश सरोज ने बताया कि मातृत्व केवल एक प्राकृतिक प्रक्रिया नहीं है- यह आपका अदम्य धैर्य, आत्म-त्याग और निःस्वार्थ सेवा का प्रवाह हैं एक माँ की मजबूत बाँहें हमें जीवन की राह दिखाती हैं। उसी तरह हमारा आर्थोपेडिक्स विभाग भी आपकी जीवनधारा को पुनः प्रेरित करने की प्रयास करता है-चाहे वह चोटों का पुनर्निर्माण हो या गठिया जैसी विकारों के उपचार में समर्थन। आज हम सभी माताओं का अभिनंदन करते हैं, जिन्होंने अपनी मातृत्व यात्रा में चुनौतियों का सामना किया, चोटों से उबर कर परिवार को संभाला, और अपनी शारीरिक सीमाओं के बावजूद जीने की प्रेरणा दी।

प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा० सरिता पाण्डेय ने स्तनपान के लिए शिशु की सही स्थिति और जुड़ाव पर व्याख्यान दिया उन्होंने यह भी कहा की विशेषकर गर्भावस्था के दौरान मां का पोषण शिशु के समुचित विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। गर्भावस्था के दौरान माँ को अपने सामान्य आहार से 300 किलो कैलोरी अधिक पोषण लेना चाहिए, जबकि स्तनपान के दौरान उसे अपने आहार में 550 किलो कैलोरी अधिक शामिल करना चाहिए।

बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा ममता ने बताया कि मां का दूध नवजात शिशु के लिए आदर्श है और एक माँ अपने बच्चे को सबसे अच्छा उपहार दे सकती है। माँ के दूध में जन्म से लेकर जीवन के पहले 6 महिनों तक प्रयाप्त वृद्धि और विकास के लिए आवश्यक सभी पोषक तत्व होते है और इस लिए अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए पहले 6 महिनों तक केवल स्तनपान कराना आवश्यक है।

कार्यक्रम का संचालन डा० स्वाती विश्वकर्मा, सहायक आचार्य एवं डा० प्रियाशी सिंह, आब्स एण्ड गायनी विभाग के द्वारा किया गया। स्तनपान के दौरान होने वाली कुछ समस्याओं जैसे स्तन वृद्धि, स्तनदाह, फोड़ा और उनके प्रबंधन के बारे में बताया।

बाल रोग विभाग की डा० रेनू एवं डा० प्रिति विश्वकर्मा द्वारा स्तनपान के लिए सही स्थिति तथा जुड़ाव व स्तनपान से जुड़े हुए कुछ तथ्य और भ्रांतियों पर भी विस्तृत जानकारी दी गयी।

डा० जयसूर्या, सहायक आचार्य, पीडियाट्रीक्स विभाग के कुशल नेतृत्व में एम०बी०बी०एस० फाइनल वर्ष के छात्रो द्वारा नुक्कड़ नाटक किया गया। पोस्टर और बैनर का कम्पटीशन भी किया गया जिसमें विजेता छात्र / छात्रा को पुरस्कार प्रदान कर उत्साह वर्धन किया गया।

डा० पूजा पाठक, सहायक आचार्य, कम्युनिटी मेडिसिन ने बताया कि समाज में कई भ्रांतियाँ, व्यस्त जीवन शैली और जागरूकता की कमी के कारण माताएं स्तनपान से दूर होती जा रही हैं, ऐसे समय में हमारी यह सामूहिक जिम्मेदारी बनती है कि हम इस विषय में सही जानकारी प्रसारित करें, और महिलाओं को प्रोत्साहित करें कि वे अपने शिशु को कम से कम 6 माह तक अनन्य रूप से स्तनपान कराएं। मेडिकल कालेज के चिकित्सा शिक्षक का भी दायित्व बनता है कि हम छात्राओं को विशेषकर किशोरियों को इस विषय में जागरूक करें ताकि आने वाले कल की माताएं स्वस्थ पीढ़ी का निर्माण कर सकें।

इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षक डा० सी०बी०एस० पटेल (परीक्षा नियंत्रक), डा० विनोद कुमार, डा० आदर्श कुमार यादव, डा० चन्द्रभान, डा० जितेन्द्र कुमार, डा० अचल सिंह, डा० विनोद वर्मा, डा० अमजा अंसारी, डा० मुदित चौहान, डा० नवीन सिंह, डा० अरविन्द यादव, डा० अजय, डा० संजीव यादव, डा० अलिशा अंजुम, डा० अनिल, डा० श्वेता, डा० अर्चना, डा० प्रियंका, डा० पंकज, डा० मो० शादाब व नर्सिंग आफिसर, कर्मचारीगण तथा छात्र/छात्राएं व मरीज और तीमारदार उपस्थित थे।

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