अयोध्या में पहली बार लगने वाले आयुर्वेद कुंभ मेले में शामिल होगे देश के दो हजार आयुर्वेद चिकित्सक 

अयोध्या।(डा.अजय तिवारी जिला संवाददाता) अयोध्या में पहली बार दो दिवसीय आयुर्वेद कुम्भ लगने जा रहा हैl27 नवंबर से होने वाले कुंभ में देश के दो हजार आयुर्वेद चिकित्सक शामिल हो रहे हैं जबकि 50 ख्याति प्राप्त विशेषज्ञ खास तौर से अपनी विधा से लोगों में दुर्लभ रोगों की चिकित्सा का मार्गदर्शन करेंगेl कार्यक्रम की जानकारी देते महंत संजय दास, पुजारी हेमंत दास व चिकित्सक कार्यक्रम की जानकारी देते महंत संजय दास, पुजारी हेमंत दास व चिकित्सक एक ही छत के नीचे देश के महान वैद्यों का समागम होने जा रहा है।दीनबंधु नेत्र चिकित्सालय में एक ही छत के नीचे देश के महान वैद्यों का समागम होने जा रहा हैl शल्य पितामह महान ऋषि आचार्य सुश्रुत जिन्हें आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में फादर ऑफ सर्जरी कहा जाता है की रचित सुश्रुत संहिता का नियत समय में एक साथ 2000 आयुर्वेद वैद्य, पाठन करके “वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड” का कीर्तिमान स्थापित करेंगेl 28 नवंबर को बृहद निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन, कार्यक्रम के संरक्षक व हनुमानगढ़ी के महंत संजय दास ने बताया कि दूसरे दिन 28 नवंबर को बृहद निःशुल्क आयुर्वेद चिकित्सा शिविर का आयोजन भी सुनिश्चित है जिसमें देश के लगभग 50 आयुर्वेद विशेषज्ञ जो कि चिकित्सा के अलग अलग विधा में पारंगत हैं, वो अपनी सेवाएं दिन के प्रथम प्रहर तक देंगे उसके पश्चात महर्षि सुश्रुत की भव्य रथ यात्रा एवं भगवान श्री धन्वंतरि जी का सरयू तट पर भव्य महाआरती प्रस्तावित हैl इसके अलावा अन्य कार्यक्रम भी साथ साथ होते रहेंगे।जिसकी विस्तृत जानकारी बेबसाइट www.ayurvedakumbh.com पर उपलब्ध हैlजो महंत ज्ञानदास के आशीर्वाद से आयोजन हो रहा है। मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्री राम जी की जन्मस्थली और महान ऋषि शल्य पितामह आचार्य सुश्रुत जी की सूक्ष्म मौजूदगी में महंत ज्ञानदास जी महाराज, श्रीहनुमानगढ़ी के आशीर्वाद एवं कार्यक्रम के अध्यक्ष वैद्य अभय नारायण मिश्र (निदेशक जीवन अमृत) ने बताया कि प्राचीन काल से ही अयोध्या जी का वैशिष्ट्य रहा है क्योंकि यहाँ प्रभु श्री राम जी है।अयोध्या में राम है तो राम का ज्ञान कराने वाला गुरु ग्रंथ रामचरित मानस भी हैl यह परंपरा है हमारे गुरु और ग्रंथ की, और इसी गुरु-शिष्य परंपरा को अक्षुण्ण बनाया है आयुर्वेद शास्त्र ने l प्राचीन काल से ही गुर-शिष्य परम्परा के माध्यम से ही आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र का ज्ञान अर्जन होता रहा हैl उत्तर प्रदेश के समस्त जन मानस तक पहुंचाने का बीड़ा प्रदेश के युवा वैद्यों ने उठाया। इसी आयुर्वेद चिकित्सा शास्त्र को पूर्वोत्तर भारत का प्रमुख राज्य उत्तर प्रदेश के समस्त जन मानस तक पहुंचाने का बीड़ा प्रदेश के युवा वैद्यों ने उठाया गया है जिसका पहला पड़ाव प्रभु श्री राम की नगरी अयोध्या जी से प्रारंभ होने जा रहा हैl अब वो दिन दूर नहीं जब उत्तर प्रदेशवासी भी सुलभ तरीके वैज्ञानिक आयुर्वेद का सोपान कर सकेंगे और अपने जीवन को प्राकृतिक परिवेश में स्वस्थ्य रख सकेंगे। कार्यक्रम की अगली कड़ी में महान वैद्यो द्वारा आयुर्वेद शास्त्र का प्रायोगिक ज्ञान गंगा करके हम स्वस्थ और समृद्ध उत्तर प्रदेश की कामना कर सकते है।

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