अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले मे नोट गिनने से पहले ही साफ हो जाती थी रकम,पूर्व मैनेजर समेत कई बड़े नाम रडार पर
अयोध्या।रामनगरी अयोध्या से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है जिसने राम मंदिर ट्रस्ट से लेकर आम श्रद्धालुओं तक को झकझोर कर रख दिया है।राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी मामले में एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।पुलिस जांच और सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, दानपात्र से निकलने वाले करोड़ों के चढ़ावे में यह हेरफेर नोटों की गिनती के समय नहीं, बल्कि उससे ठीक पहले की जाती थी।इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें कई सफेदपोश और बड़े चेहरों की संलिप्तता सामने आ रही है।मशीन में जाने से पहले ही लग जाती थी ‘चपत’,सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार, राम मंदिर में आने वाले चंदे के नोटों की गिनती अत्याधुनिक मशीनों के जरिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के कर्मचारियों द्वारा की जाती थी।पकड़े गए आरोपियों का मुख्य काम चढ़ावे में आए मुड़े-तुड़े नोटों को सीधा करना और उन्हें सलीके से गड्डियों में जमाना था।इसके बाद ही एसबीआई के कर्मचारी उन नोटों को काउंटिंग मशीन में रखते थे, जहां 10, 20, 50, 100, 200 और 500 रुपये के नोट अलग-अलग होकर गिनते थे।शातिर आरोपियों ने इसी प्रक्रिया का फायदा उठाया।जब वे नोटों को सीधा कर सलीके से लगा रहे होते थे,उसी वक्त बड़ी चालाकी से नोटों की गड्डियों से रकम पार कर दी जाती थी।यानी बैंक की मशीन में चढ़ने से पहले ही चढ़ावे पर हाथ साफ कर दिया जाता था।देखा जाये तो एसआईटी आगे एसबीआई के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र और अनिल मिश्रा पर भी शिकंजा कस सकता है।इस पूरे खेल में अब खाकी का शिकंजा बैंक के बड़े अधिकारियों पर भी कसता नजर आ रहा है। एसबीआई के पूर्व मैनेजर गोविंद मिश्र, जो वर्तमान में लखनऊ में तैनात हैं, इस समय अयोध्या पुलिस की रडार पर हैं। इसके साथ ही, ट्रस्ट की ओर से बैंक के साथ एमओयू साइन करने वाले अनिल मिश्रा से भी इसी हफ्ते पूछताछ की तैयारी है।पुलिस जल्द ही इस मामले में एसबीआई के उन कर्मचारियों के बयान दर्ज करेगी जो नोटों की गिनती के दौरान वहां मौजूद थे।जांच में यह बात भी साफ हुई है कि गिरफ्तार किए गए सभी आरोपी सीधे तौर पर न तो राम मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारी थे और न ही एसबीआई के।इन्हें बैंक द्वारा हायर की गई एक प्राइवेट थर्ड पार्टी आउटसोर्सिंग कंपनी के जरिए हाउसकीपिंग और नोटों को व्यवस्थित करने के काम पर रखा गया था। यहां तक कि काउंटिंग के दौरान निगरानी रखने वाला मुख्य आरोपी सुभाष श्रीवास्तव भी एक पूर्व बैंकर था, जिसे प्राइवेट कंपनी के जरिए ही आउटसोर्स किया गया था।इस प्राइवेट कंपनी ने ही इन कर्मचारियों का इंटरव्यू, भर्ती और ड्रेस कोड तय किया था, जो अब खुद जांच के दायरे में है।अभी तक एसआईटी की कार्रवाई में आठ आरोपी गिरफ्तार हुए है।वही चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर हो गया है।पुलिस और तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने इस मामले में दर्ज एफआईआर के बाद ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए आठ लोगों को सलाखों के पीछे भेज दिया है।गिरफ्तार आरोपियों में राम शंकर यादव (उर्फ टीनू यादव), मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, करुणेश पांडे, सुभाष श्रीवास्तव, अविनाश शुक्ला और राम शंकर मिश्रा शामिल हैं। इस बड़े घोटाले की आंच के बाद राम मंदिर ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया गया है।पुलिस रिमांड में चोरी के पैसों से खरीदी कार, पत्नी को दिया सोने का लॉकेट, फिलहाल पुलिस रिमांड पर चल रहे तीन मुख्य आरोपियों—लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्रा और करुणेश पांडेय से पूछताछ में कई चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं।आरोपियों की निशानदेही पर पुलिस ने कई ठिकानों पर छापेमारी की है। आरोपी अनुकल्प के पास से पुलिस ने 20 हजार रुपये नकद, एक सोने की चेन, मोबाइल और उसके पिता के नाम पर खरीदी गई एक स्विफ्ट डिजायर कार बरामद कर जब्त की है।वहीं, आरोपी लवकुश ने चोरी की रकम से अपनी पत्नी को सोने का लॉकेट गिफ्ट किया था, जिसे पुलिस ने बरामद कर लिया है, साथ ही उसके पास से 38 हजार रुपये कैश भी मिला है।तीसरे आरोपी करुणेश के पास से 15 हजार रुपये नकद बरामद हुए हैं।पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई और अहम सुराग हाथ लगे हैं,जिसके आधार पर जल्द ही कुछ और बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं
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