अयोध्या।अयोध्या की ऐतिहासिक पंचकोसी परिक्रमा मार्ग से सटी ग्राम पंचायत हैबतपुर में सन 1990 यहां की गाटा संख्या 25 का रकबा 1 बीघा 13 बिस्वा 15 धुर जो ऐतिहासिक व धार्मिक महत्व की सरकारी भूमि पंचकोसी परिक्रमा मार्ग के खाते में दर्ज है यह सुरक्षित भूमि की श्रेणी में आती है लेकिन यहां के तत्कालीन प्रधान ने छोड़ा। ग्राम पंचायत के तत्कालीन प्रधान रफउद्दीन पुत्र मोहिउद्दीन ने अपने प्रभाव से इस भूमि को श्रेणी 6(2)से श्रेणी 5 में परिवर्तित करा कर एक बीघा 8 बिस्वा भूमि का पट्टा अपने नाम और 4 बिस्वा जमीन का पट्टा रामकेवल के नाम खतौनी में दर्ज करा लिया जो कि इस जमीन की ऐतिहासिक महत्व को भी नजर अंदाज कर दिया गया ।राजस्व कर्मियों की मिलीभगत से ग्राम पंचायत के तत्कालीन ग्राम प्रधान और एक अन्य व्यक्ति ने इस जमीन का पट्टा करा लिया जबकि प्रधान के रहते किसी भी व्यक्ति का नाम पट्टा करने की अनुमति नहीं है इस खुलासे के बाद प्रशासन में हलचल मच गई फिलहाल डीएम अनुज कुमार झा ने एसडीएम से पट्टा निरस्त करते हुए इसे पूर्ववत सार्वजनिक भूमि के नाम दर्ज करने का आदेश दिया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार शासकीय अधिवक्ता अनिल अग्रवाल ने जिलाधिकारी के समक्ष इस पर घोर आपत्ति दर्ज कराई ग्राम पंचायत के 6 अगस्त 1990 के प्रस्ताव के आधार पर तत्कालीन एसडीएम से 15 मई 1991 को किए गए इस पट्टे को खारिज करने का तर्क दिया बताया कि इस गाटा की एक विशवा 15 धुर भूमि पर पंचकोसी परिक्रमा मार्ग का निर्माण हुआ है जबकि 4 बिस्वा पर रामकेवल ने पेड़ लगा लिए शासकीय अधिवक्ता ने इसे खारिज कर के पूर्वज करने की बात कही जिलाधिकारी ने प्रधान रखा उद्दीन और रामकेवल के पक्ष में किए गए कृषि पट्टे को निरस्त करते हुए इसे पूर्व की भांति पुनः वर्ग 5 में दर्ज करने का आदेश दिया फिलहाल डीएम के आदेश के बाद अयोध्या की पंचकोसी परिक्रमा मार्ग बाधित होने से बच गया जो ऐतिहासिक श्री राम जन्म भूमि की पक्षधर में चलती चली आ रही ।

