कजली की तान पर झूमा पूरा शहर

कजली की तान पर झूमा पूरा शहर
लोक संस्कृति संरक्षण केन्द्र के तत्वावधान में कजली मल्हार उत्सव का हुआ भव्य आयोजन, अतिथियों ने बताया कजरी को माटी की आत्मा
*40 से अधिक कलाकारों ने बिखेरा जलवा, रात भर झूमा शहर’, 5 विभूतियों को मिला प्रेमघन सम्मान’
मीरजापुर। लोक संस्कृति संरक्षण केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय कजली मल्हार उत्सव का भव्य और रंगारंग आयोजन सम्पन्न हुआ। सावन की काली घटाओं के बीच कजरी की मधुर तानों ने पूरे नगर को लोक संगीत में सराबोर कर दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर विधायक रत्नाकर मिश्र, जिलाध्यक्ष भाजपा लालबहादुर सरोज, कुलपति जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट प्रोफेसर शिशिर पाण्डेय एवं अध्यक्ष नगर पालिका परिषद मीरजापुर श्याम केशरी व अष्ट कौशल महंत डा योगानंद गिरी महाराज बूढ़े नाथ मंदिर ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित कर किया।
कार्यक्रम में लगभग 40 से अधिक लोक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, वहीं कु. सिद्धिका, अनुश्का व वैभवी ने कजली लोकगीत नृत्य कर लोगों को अपनी तरफ आकर्शित किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच दीप प्रज्ज्वलन से हुआ। अतिथियों को जिला सूचना अधिकारी द्वारा ओमप्रकाश उपाध्याय ने पुष्प गुच्छ, मोमेण्टो व स्मृति चिन्ह देकर उनका स्वागत एवं अभिनन्दन किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित नगर विधायक रत्नाकर मिश्र ने कहा कि कजरी केवल एक गीत नहीं, बल्कि पूर्वांचल की आत्मा है। उन्होंने कहा कि सावन में जब महिलाएं झूला झूलते हुए कजरी गाती हैं तो उसमें विरह, प्रेम और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। मीरजापुर तो कजली की जन्मभूमि है, ऐसे आयोजनों से हमारी युवा पीढ़ी अपनी जड़ों से जुड़ेगी। भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा है कि लोक कलाओं को बढ़ावा दिया जाए। लोक संस्कृति संरक्षण केन्द्र का यह प्रयास सराहनीय है कि वह कजरी जैसी लुप्त हो रही विधा को मंच दे रहा है। सरकार लोक कलाकारों के कल्याण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। जगद्गुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय, चित्रकूट के कुलपति प्रो. शिशिर कुमार पाण्डेय ने कहा कि कजरी में भक्ति रस भी है। राधा-कृष्ण की लीलाओं का वर्णन कजरी में बड़े ही सुंदर ढंग से होता है। यह विधा साहित्यिक दृष्टि से भी बहुत समृद्ध है। प्रेमघन जी ने भी कजली को साहित्य में स्थान दिया था। नगर पालिका अध्यक्ष श्यामसुंदर केशरी ने कहा कि पालिका ऐसे सांस्कृतिक आयोजनों को हमेशा सहयोग देती रहेगी। मीरजापुर को कजरी महोत्सव के नाम से भी जाना जाना चाहिए। इस कजली मल्हार उत्सव का मुख्य आकर्षण लोक कलाकारों की प्रस्तुतियां रहीं। मंच पर एक के बाद एक 44 से अधिक कलाकारों ने अपनी कजली गायन से समां बांध दिया।
गायक कलाकारों में पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव, नवीन उपाध्याय, सुधानन्द महराज, वैभव पाण्डेय, रानी सिंह, रागिनी चन्द्रा, कल्पना गुप्ता, गणेश गुप्ता, पतालू यादव, आनन्द देवा, शान्ति निशाद, संजय सुरीला, संजीव तिवारी, शिवलाल गुप्ता, देवी मौर्या, मनोज शर्मा, जटाशंकर चैलर, राजेन्द्र बिन्द भदोही, ब्रह्मदेव गौतम जनपद भदोही, रामआशीष भदोही, अशोक यादव, रामलखन, गुड्डू रंगीला, कंचन गुप्ता, लक्ष्मी यादव, शैला श्रीवास्तव, भानुप्रताप सिंह गाजीपुर, रामधनी चुनार, राजेष यादव चुनार, डिम्पल भदोही, षिवानी प्रयागराज, संजू तिवारी, अषोक यादव, केदारनाथ मुनीम, प्रो बीना सिंह, पट्टर पाण्डेय, सुरेषमौर्य, रामनारायन, रामप्रसाद, अमित दूबे, खुशबू तिवारी एवं आयोजिका ऊशा गुप्ता सहित अन्य कलाकारों ने अपनी-अपनी प्रस्तुती दी।

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