(कुशीनगर) बेबाक लेखनी का बजा डंका… विभिन्न सम्मानों से नवाजे गए पत्रकार संजय चाणक्य 

(कुशीनगर) बेबाक लेखनी का बजा डंका… विभिन्न सम्मानों से नवाजे गए पत्रकार संजय चाणक्य
कुशीनगर, 13 सितंबर (आरएनएस)। पत्रकारिता में 27 साल का सफर केवल कैलेंडर के पन्नों पर दर्ज वर्षों का हिसाब नहीं होता। यह उन अनगिनत रातों का सिलसिला होता है, जब खबर के लिए दौड़ना पड़ता है, तथ्यों की तह तक जाना पड़ता है और कई बार सवालों के जवाब तलाशते-तलाशते खुद सवालों के घेरे में आना पड़ता है। संजय चाणक्य की पत्रकारिता यात्रा भी कुछ ऐसी ही है, जहां कलम ने कभी आराम नहीं चुना और खबरो ने कभी आसान रास्ता नहीं चुना। बेबाक तेवर, निर्भीक लेखनी और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को उठाने की शैली ने कुशीनगर की पत्रकारिता में चाणक्य की अलग पहचान बनाई है। इसी सक्रियता और योगदान के लिए हाल के दिनों में विभिन्न संस्थाओं ने उन्हें कई सम्मानों से नवाजा है।
बतादे कि संजय चाणक्य ने अपने पत्रकारिता जीवन की शुरुआत वर्ष 1998 में शुरू की। उस दौर में पत्रकारिता आज की तरह मोबाइल और सोशल मीडिया की रफ्तार वाली नहीं थी। खबर के लिए मौके पर पहुंचना, जानकारी जुटाना, उसकी पुष्टि करना और फिर उसे अखबार तक पहुंचाना ही पत्रकारिता का रास्ता था। उन्होंने उस दौर में पत्रकारिता का ककहरा सीखा। खबर की भाषा से लेकर तथ्य की विश्वसनीयता और जनहित के सवालों को खबर का हिस्सा बनाने तक की सीख मिली। यही वजह है कि वर्षों बाद भी अपने पत्रकारिता गुरु के रूप में वरिष्ठ पत्रकार दिनेश कसेरा का नाम सम्मान के साथ लेते हैं। उन्होंने दैनिक जागरण से पत्रकारिता की शुरुआत कर हिन्दुस्तान, अमर उजाला, लोकमत, डेली न्यूज एक्टिविटी, द पायनियर, समाज का आईना और संदेशवाहक जैसे समाचार पत्रों में जिले स्तर पर कार्य करते हुए पत्रकारिता के प्रति अपना तेवर नहीं बदला।दूसरों के अखबार में लिखते-लिखते उन्होंने अपना अखबार खड़ा कर दिया। संजय चाणक्य की यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2008 रहा, जब उन्होंने अपनी पत्रकारिता को नया आयाम देते हुए ‘युगान्धर टाइम्स’ नाम से अपना साप्ताहिक समाचार पत्र की शुरूआत की। यह सिर्फ एक अखबार शुरू करने की कहानी नहीं थी। यह उस दौर में अपनी सोच, अपनी खबर और अपनी पत्रकारिता को स्वतंत्र मंच देने का कार्य किया। सीमित संसाधनों के बीच युगान्धर टाइम्स आज उनकी पत्रकारिता की पहचान का हिस्सा है।समय बदला, समाचार माध्यम बदले और पत्रकारिता का स्वरूप भी बदला, लेकिन चाणक्य की सक्रियता बनी रही। वर्तमान में वह युगान्धर टाइम्स के साथ आईएनए न्यूज एजेंसी और ग्लोबल न्यूज एजेंसी से भी जुड़े हुए हैं। संजय चाणक्य की पत्रकारिता और उपलब्धियों को हाल के दिनों में अलग-अलग संस्थाओं ने सम्मानित किया गया है। प्रमुख सम्मानों में मैजिक बुक ऑफ रिकॉर्ड फाउंडेशन द्वारा जर्नलिज्म लीडरशिप अवॉर्ड , ट्रूवर्थ संस्था द्वारा ट्रूवर्थ प्रतिभा सम्मान, जीव्रान फाउंडेशन की ओर से भारत रत्न आइकॉनिक एक्सीलेंस अवॉर्ड, ट्रूवर्थ ग्लोबल एक्सीलेंस अवॉर्ड, एमएसएमई संस्था की ओर से आचार्य चाणक्य एक्सीलेंस अवॉर्ड, ट्रूवर्थ यूनिवर्सल अचीवमेंट अवॉर्ड, ट्रूवर्थ भारत सम्मान जैसे सम्मान शामिल हैं। इन सम्मानों की खास बात यह है कि इनमें पत्रकारिता के साथ नेतृत्व, उत्कृष्टता, उपलब्धि और सामाजिक योगदान के अलग-अलग पहलुओं को रेखांकित किया गया है। सम्मानों की यह सूची निश्चित रूप से उनके लिए उपलब्धि है। उन्होंने अपने 27 वर्षों की पत्रकारिता के खट्टे-मीठे अनुभव पर चर्चा करते हुए कहा कि असली उपलब्धि उस भरोसे में है, जो एक पत्रकार वर्षों की लगातार मेहनत से पाठकों के बीच बनाता है। इस लंबे सफर और पत्रकारिता में सक्रिय योगदान के लिए मिले सम्मानों पर श्रमजीवी पत्रकार यूनियन सहित जनपद, मंडल और प्रदेश के पत्रकारों ने खुशी जताई और बधाई दी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *