(कुशीनगर) हाईमास्ट लाइट की शिकायत की जांच पहुंची पुलिस के पास, आईजीआरएस प्रणाली पर उठे सवाल
—- ग्राम पंचायत के विकास कार्य से जुड़ी शिकायत का संदर्भ थाना रविंद्रनगर धूस को भेजे जाने पर हैरानी, शिकायतकर्ता से रिपोर्ट लगाने के लिए दबाव बनाने का आरोप।
कुशीनगर, 02 सितम्बर (आरएनएस)। शासन की महत्वाकांक्षी समेकित शिकायत निवारण प्रणाली, आईजीआरएस के माध्यम से दर्ज एक शिकायत की जांच गलत विभाग के पास पहुंचने का मामला सामने आया है। पडरौना विकास खण्ड के ग्राम रहसू निवासी दिनेश मिश्रा पुत्र स्वर्गीय धर्मनाथ मिश्र ने ग्राम पंचायत में हाईमास्ट लाइट लगाए जाने में कथित अनियमितता की जांच की मांग करते हुए आईजीआरएस पर शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि ग्राम पंचायत में प्रस्तावित स्थान पर हाईमास्ट लाइट न लगाकर अन्य स्थानों पर लगाई गई है।
शिकायतकर्ता के अनुसार उक्त प्रकरण ग्राम पंचायत एवं विकास विभाग से संबंधित है, लेकिन आईजी आरएस शिकायत का संदर्भ जांच के लिए थाना रविंद्रनगर धूस पुलिस के पास पहुंच गया। इस पर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विकास विभाग से संबंधित शिकायत को पुलिस विभाग के पास किस स्तर से संदर्भित किया गया है। मामले में शिकायत कर्ता दिनेश मिश्रा का आरोप है कि क्षेत्र के एक उपनिरीक्षक द्वारा उनसे कई बार संपर्क कर लिखित रूप से यह कहने के लिए दबाव बनाया गया कि उक्त प्रकरण उनके विभाग से संबंधित नहीं है। शिकायत कर्ता का कहना है कि जब जांच का विषय पुलिस विभाग से संबंधित ही नहीं था, तो आईजीआरएस शिकायत को पुलिस के पास भेजे जाने के पीछे हुई चूक की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं इस संबंध में बताया गया कि थाना रविंद्रनगर धूस के प्रभारी निरीक्षक अनिल कुमार सिंह ने संबंधित उपनिरीक्षक को पहले ही निर्देशित किया था कि यह प्रकरण पुलिस विभाग से संबंधित नहीं है। इस संबंध में स्पष्ट रिपोर्ट लगाकर शिकायत को संबंधित विभाग को प्रेषित किया जाए। उक्त मामला आईजीआरएस शिकायतों के निस्तारण और उन्हें संबंधित विभागों तक भेजने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करता है। सवाल यह है कि ग्राम पंचायत के विकास कार्य से संबंधित शिकायत आखिर किस स्तर पर पुलिस विभाग को भेज दी गई है। यदि शिकायतों के संदर्भ गलत विभागों को भेजे जाएंगे तो न केवल शिकायत कर्ताओ को अनावश्यक परेशानी होगी, बल्कि शिकायतों के समयबद्ध और प्रभावी निस्तारण की व्यवस्था भी प्रभावित होगी। वही आईजीआरएस की जांच के गलत विभाग तक पहुंचने का यह मामला शिकायतों के संदर्भ निर्धारण और निस्तारण प्रक्रिया में संभावित खामियों की ओर संकेत करता है। शिकायत कर्ता ने इस पूरे प्रकरण की जांच कर जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग की है।

