(गांधीनगर)धरती पर अपना ‘सूरजÓ बनाने में जुटा भारत, गुजरात की लैब में वैज्ञानिकों को मिली बड़ी कामयाबी; खुलेंगे असीमित ऊर्जा के रास्ते

(गांधीनगर)धरती पर अपना ‘सूरजÓ बनाने में जुटा भारत, गुजरात की लैब में वैज्ञानिकों को मिली बड़ी कामयाबी; खुलेंगे असीमित ऊर्जा के रास्ते
गांधीनगर ,15 सितंबर ,(आरएनएस)।  सौर ऊर्जा और प्रकृति के सबसे शक्तिशाली रहस्य नाभिकीय संलयन (न्यूक्लियर फ्यूजन) को धरती पर साकार करने की दिशा में भारतीय वैज्ञानिकों ने एक मील का पत्थर हासिल किया है। गुजरात के गांधीनगर स्थित इंस्टीट्यूट फॉर प्लाज्मा रिसर्च के वैज्ञानिकों ने अपने महत्वाकांक्षी फ्यूजन प्रोजेक्ट में एक जटिल तकनीकी बाधा को पार करने में ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। वैज्ञानिकों ने ‘एसएसटी-1 टोकामाकÓ मशीन में 82.6 गीगाहर्ट्ज का अत्याधुनिक ‘जाइरोट्रॉनÓ सिस्टम सफलतापूर्वक चालू कर दिया है। यह उपकरण हाई-फ्रीक्वेंसी माइक्रोवेव तरंगों के जरिए अति-गर्म प्लाज्मा को लंबे समय तक बेहद ऊंचे तापमान पर स्थिर रखने में सक्षम है।
सूरज के केंद्र से 20 गुना ज्यादा तापमान हासिल कर चुका है भारत
नाभिकीय संलयन वही प्रक्रिया है जिससे सूरज और तारे लगातार चमकते हैं और असीमित ऊर्जा उत्पन्न करते हैं। भारतीय वैज्ञानिक अपने फ्यूजन प्रयोगों के दौरान पहले ही 200 मिलियन डिग्री सेल्सियस (20 करोड़ डिग्री) से अधिक का प्लाज्मा तापमान पैदा कर चुके हैं, जो सूरज के कोर की तुलना में लगभग 20 गुना अधिक गर्म है। हालांकि, इतने प्रचंड तापमान को पैदा करने से भी बड़ी चुनौती उसे सुरक्षित सीमित रखना और लंबे समय तक उस पर नियंत्रण बनाए रखना होता है। नया जाइरोट्रॉन सिस्टम इसी प्लाज्मा को स्थिर रखकर नियंत्रित ऊर्जा उत्पन्न करने का रास्ता साफ करेगा।
टोकामाक और मैग्नेटिक फील्ड: दीवारों से प्लाज्मा को बचाना सबसे कठिन चुनौती
ठोस, द्रव और गैस के बाद प्लाज्मा पदार्थ की चौथी अवस्था है, जिसमें अति-उच्च तापमान पर परमाणु अपने इलेक्ट्रॉन्स खोकर पूरी तरह आयोनाइज्ड (इलेक्ट्रिकली चार्ज्ड) हो जाते हैं। धरती पर इस स्थिति को संभालना इंजीनियरिंग का सबसे कठिन काम है, क्योंकि अगर यह धधकती हुई प्लाज्मा स्टेट रिएक्टर की दीवारों से टकरा जाए तो मशीनरी को भारी नुकसान पहुंच सकता है। इससे निपटने के लिए भारतीय वैज्ञानिकों ने डोनट के आकार के स्स्ञ्ज-1 (स्टेडी स्टेट सुपरकंडक्टिंग टोकामाक) में शक्तिशाली मैग्नेटिक फील्ड तैयार किया है, जो प्लाज्मा को दीवारों से दूर हवा में तैरती अवस्था में बांधकर रखता है।
चीन को कड़ी टक्कर, भविष्य के लिए मिलेगी प्रदूषणमुक्त असीमित बिजली
हाल ही में चीन द्वारा अपने कृत्रिम सूरज के लिए दुनिया का सबसे बड़ा सुपरकंडक्टिंग मैग्नेट बनाने की खबर आई थी, जिसके बाद भारत की यह उपलब्धि वैश्विक स्तर पर बेहद अहम मानी जा रही है। पारंपरिक परमाणु संयंत्रों के विपरीत, न्यूक्लियर फ्यूजन में रेडियोएक्टिव कचरा नगण्य होता है और इसके लिए धरती पर ईंधन प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है। यह तकनीक आने वाले समय में दुनिया को शून्य प्रदूषण वाली कभी न खत्म होने वाली स्वच्छ ऊर्जा दे सकती है। भारतीय वैज्ञानिकों का यह सफल प्रयोग देश को फ्यूजन ऊर्जा आधारित कमर्शियल पावर प्लांट की दिशा में एक कदम और करीब ले आया है।
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