संवाददाता प्रवीण सिंह चंदेल कानपुर नगर
श्री ब्रह्म निवास शंकराचार्य आश्रम, अलोपीबाग समारोह के अंतिम दिन प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और भारतीय ब्राह्मण परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री पं. धर्मेंद्र शुक्ला जगद्गुरु शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मानंद सरस्वती के 150वीं जयन्ती एवं श्री राधा माधव जयंती पाठोत्सव के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत महापुराण कथा में सम्मिलित हुए।
इसके पूर्व उप मुख्यमंत्री और पंडित धर्मेंद्र शुक्ला ने जगद्गुरु शंकराचार्य के कक्ष में जाकर उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। फिर स्वामी शंकराचार्य के साथ ही भागवत कथा स्थल पर आए। इस मौके पर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य जगतगुरु स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती जी का आशीर्वाद लेने के बाद कहा कि शंकराचार्य जी की वाणी में सरस्वती विराजमान है राम जन्मभूमि सहित विभिन्न मुद्दों पर विहिप के साथ संत सम्मेलनों में जगतगुरु शंकराचार्य जी ने जो कहा वह पूरा हुआ है उन्होंने कहा कि गौ माता की रक्षा के लिए प्रदेश सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं इसके बाद भारतीय ब्राह्मण परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री एवं विश्व ब्राह्मण महासभा के राष्ट्रीय सचिव पंडित धर्मेंद्र शुक्ला ने कहा कि आज ज्योतिष्पीठाधीश्वर जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ब्रह्मलीन ब्रह्मानंद सरस्वती की जयंती के अवसर पर आने व सम्मिलित होने का आशीर्वाद मिला। यह मेरे लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि मैं तो स्वयं ही कार्यकर्ता एवं सेवक हूँ। जगद्गुरु शंकराचार्य के संरक्षण व सान्निध्य में श्रीराम कार सेवा करने का भी अवसर मिला। श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण में जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती एवं स्वर्गीय अशोक सिंहल का अद्वितीय योगदान, सहयोग व मार्गदर्शन मिला। जिससे इतनी बड़ी सफलता मिली।
आराधना महोत्सव के पांचवें दिन जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद महाराज ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण के अभियान की विभिन्न रोचक घटनाओं व संस्मरणों को सुनाते हुए कहा कि मुझे निर्णयानुसार हर हाल में कार सेवास्थल पहुंचकर कार सेवकों का मार्गदर्शन करने व कार सेवा में भाग लेना था। पुलिस का चारों तरफ बड़ा मजबूत सुरक्षा घेरा था। गहन सुरक्षा बल होने के कारण वहाँ तक पहुंचना बड़ा मुश्किल था, किन्तु मोटर की डिग्गी में छिपकर मैं अयोध्या पहुंचा था।
जगद्गुरू शंकराचार्य ब्रह्मलीन स्वामी ब्रह्मनंद सरस्वती के विषय में उन्होंने बताया कि यह स्वामीजी की इस 125वीं जयंती के अवसर पर उनकी पूजा का अवसर सबको उपलब्ध हो सके, इसलिए इस कार्यक्रम को विशेष भव्यता के साथ मनाया जा रहा है। यह पूज्य पीठोद्धारक शंकराचार्य के श्रम, योगदान एवं प्रचार-प्रसार सहित त्याग तपस्या का ही फल है कि 165 वर्षों तक पूजापाठ की दृष्टि से बाधाओं का शिकार रही। किन्तु श्री ज्योतिष्पीठ पुनर्जागृत होकर हम लोगों को आध्यात्मिक जगत से जोड़कर पुण्य कार्यों की जानकारी और धार्मिक अनुष्ठान करने का अवसर मिल रहा है।
कार्यक्रम में शंकराचार्य ने शाल, शताब्दी ग्रंथ एवं स्मृति चिन्ह भेंट किया। दण्डी संन्यासी विनोदानंद सरस्वती दण्डी संन्यासी शंकरानंद सरस्वती, दण्ड संन्यासी शिवानंद सरस्वती, ब्रह्मचारी आत्मानंद, अनिल कुटेटा, वेद प्रकाश शर्मा, राम आधार शर्मा आदि ने विशेष सहयोग किया। इस दौरान विधायक प्रवीण पटेल, गुरू प्रसाद मौर्य, सुरेन्द्र चौधरी, पूर्व विधायक दीपक पटेल, महानगर अध्यक्ष गणेश प्रसाद केसरवानी, गंगापार अध्यक्ष अश्विनी पांडे, जमुनापार अध्यक्ष विभवनाथ भारती, काशी प्रान्त उपाध्यक्ष अवधेश गुप्ता, पूर्व सभासद उमेश मिश्रा, गौसेवा काशी प्राप्त मंत्री लालमणि तिवारी आदि उपस्थित रहे।

