आज दिनांक 23 जुलाई 2026 को अर्बन जौनपुर के लाइन बाजार मोहल्ले में रिपोर्टेड डेंगू मरीज के घर पर जिला मलेरिया फाइलेरिया ऑफिस टीम जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव के नेतृत्व में भ्रमण कर आवश्यक डेंगू निरोधात्मक गतिविधियां जैसे फीवर सर्वे, टेस्टिंग, मच्छर प्रजनन स्रोतों का सर्वे, सोर्स रिडक्शन, स्वास्थ्य शिक्षा, पोस्टर पेस्टिंग, पैम्फलेट वितरण प्रचार प्रसार, जल जमाव वाले स्थलों पर एंटीलार्वल रसायन का छिड़काव आदि संपादित कराई गई।
जनपद में जनवरी 2026 से अब तक कुल 05 डेंगू के मरीज पाए गए हैं।
डेंगू मच्छर एवं लक्षण: डेंगू रोग मादा एडीज मच्छर के काटने से फैलने वाला एक संक्रामक वायरस जनित रोग है जिसमें तेज बुखार, हड्डियों जोड़ों में तेज दर्द (हड्डी तोड़ बुखार ), शरीर व मांसपेशियों में दर्द, भूख न लगना, उल्टी मितली आना, जांच उपचार में देरी पर प्लेट लेट्स में कमी, रक्तस्राव होना आदि लक्षण आते हैं। डेंगू मच्छर के शरीर पर टाइगर जैसे काले सफेद स्पॉट पाए जाते हैं जिसके कारण उसे टाइगर मच्छर भी कहते हैं। यह मच्छर टंकी, ड्रम, कूलर, गमले, टायर प्लास्टिक, टिन, मिट्टी आदि के बर्तन, तब, मग, बाल्टी, हौद, कप, ग्लास, नारियल के खोल आदि में रुके साफ पानी में पैदा होता है एवं अंधेर, नम, छाया दार, गंदे स्थानों में रहता है।यह मच्छर बहुत ऊंचाई पर नहीं उड़ता है, दिन में खास कर सुबह शाम अधिक काटता है। जो लोग खुले बदन रहते हैं, पूरी आस्तीन के कपड़े नहीं पहनते हैं उन्हें इसके संक्रमण का खतरा अधिक होता है।
डेंगू रोग के जांच उपचार हेतु जिला चिकित्सालय जौनपुर में एलिजा जांच मशीन, ब्लड कंपोनेंट सेपरेटर मशीन, प्लेटलेट्स की व्यवस्था, आवश्यक दवाएं, फ्लूड, उपकरण, आइसोलेटेड वार्ड आदि की निःशुल्क व्यवस्था उपलब्ध है साथ ही मेडिकल कॉलेज, समस्त सामुदायिक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों, आयुष्मान आरोग्य मंदिर पर डेंगू की जांच किट, दवाएं उपलब्ध हैं।
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर भी 5 बेड का डेंगू वार्ड स्थापित है। डेंगू के रोकथाम हेतु प्रत्येक ब्लॉक पर रैपिड रिस्पांस टीमें गठित हैं जो केस की सूचना पर संबंधित ग्राम में भ्रमण कर फीवर सर्वे, टेस्टिंग, सैंपलिंग, ब्रीडिंग सोर्स सर्वे, सोर्स रिडक्शन, स्वास्थ्य शिक्षा आदि कार्य संपादित कराती हैं। किसी को भी डेंगू के लक्षण दिखाई दे तो तत्काल अपने नजदीकी सरकारी मेडिकल कॉलेज, जिला चिकित्सालय, सामुदायिक, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, आयुष्मान आरोग्य मंदिर में संपर्क करें साथ ही अन्य जानकारी के लिए जनपद स्तर पर नोडल अधिकारी डॉक्टर आलोक सिंह मोबाइल नंबर 9695344089 एवं एपिडेमियोलॉजिस्ट डॉ० जियाउलहक मोबाइल नंबर 8210448606, जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव मोबाइल नंबर 9455280838 पर स्मारक किया जा सकता है।
डेंगू बुखार में क्या करें:- मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ० गंगाराम गौतम ने जन समुदाय से अपील की है कि अगर आप में से किसी को भी डेंगू के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल नजदीकी सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जाकर अपना निःशुल्क जांच उपचार कराना चाहिए, लापरवाही पर डेंगू जानलेवा हो सकता है। डेंगू धनात्मक पाए जाने पर घबराए नहीं पूरी तरह आराम करें, तरल, हल्के सुपाच्य खाद्य सामग्रियों जैसे ताजे फल, फलों के जूस, हरी सब्जियां, दूध, छाछ, नारियल पानी, डाल का पानी, इम्यूनिटी बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थ, ओ आर एस आदि का सेवन करें, बुखार को नियंत्रित रखें, एवं प्रशिक्षित चिकित्सक को ही दिखाएं अपने से दवा न लें झोला छाप से भी इलाज न कराएं।
डेंगू मच्छर से बचाव : जिला मलेरिया अधिकारी सुनील कुमार यादव ने जन समुदाय से अपील की है कि अपने घरों के आस पास साफ सफाई रखें, झाड़ियां न उगने दें, पूरी आस्तीन के कपड़े पहने, सुबह शाम यह मच्छर अधिक काटता है अतः उस समय विशेष सावधानी रखें। खुली बदन न रहें, किसी भी जलपात्र में पानी न एकत्र होने दें, कूलर फ्रिज की ट्रे, गमले का पानी सप्ताह में एक बार अवश्य बदल दें, टंकियों को ढक कर रखें घरों के खिड़कियों, दरवाजों पर मच्छर रोधी जालियां लगवाएं।
जल जमाव होगा जहां, मच्छर पैदा होंगे वहां।
हर रविवार मच्छर पर वार, लार्वा पर प्रहार
खत्म करें मच्छर और मच्छर जनित बुखार।
प्रत्येक रविवार को नहाने से पहले एक बार अपने घरों के अंदर बाहर, छत पर हर तरफ देख लें अगर कहीं पर भी किसी भी जल पत्र में पानी एकत्र हो तो उसे नष्ट कर दें, रुके हुए पानी में जला हुआ मोबिल ऑयल डालें या लार्वा नासी रसायन का छिड़काव करें। इस तरह आप मच्छर और मच्छर जनित बीमारियों से अपना बचाव कर सकते हैं।
बरते सावधानी, दूर होगी डेंगू रोग से होने वाली परेशानी। समय रहते जांच उपचार कराएं, डेंगू की गंभीरता से स्वयं को बचाएं।
———————
जौनपुर 23 जुलाई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-04
उन्नत ड्रिप सिंचाई प्रणाली से बैंगन की खेती में बढ़ी उत्पादकता, किसान श्री रमाशंकर सिंह की आय में हुआ उल्लेखनीय इजाफा
जनपद के डोभी विकास खंड अंतर्गत पूरनपुरम गांव के प्रगतिशील किसान श्री रमाशंकर सिंह ने कृषि के क्षेत्र में एक नया आयाम स्थापित किया है। पारंपरिक खेती की सीमाओं को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने उद्यान विभाग के मार्गदर्शन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाया, जो आज क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक बेहतरीन मिसाल बन गई है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में श्री रामाशंकर सिंह ने 0.93 हेक्टेयर क्षेत्रफल में ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से बैंगन की खेती की। इस परियोजना के लिए उन्हें रू 1,23,480 का सरकारी अनुदान प्राप्त हुआ। पौधों की 1.2×0.4 मीटर दूरी पर वैज्ञानिक ढंग से रोपाई कर आधुनिक तकनीक का उपयोग किया गया।
ड्रिप सिंचाई अपनाने से जहां पारंपरिक विधि से प्रति हेक्टेयर 300 से 400 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था, वहीं आधुनिक माइक्रो इरिगेशन प्रणाली से उत्पादन बढ़कर 600 से 700 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक पहुंच गया। इससे फसल की गुणवत्ता में सुधार होने के साथ किसानों की आय में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। पारंपरिक खेती की तुलना में लगभग रू 4.50 लाख प्रति हेक्टेयर अतिरिक्त शुद्ध आय अर्जित होने का अनुमान है।
ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पौधों की जड़ों तक सीधे पानी एवं घुलनशील उर्वरक पहुंचाए जाते हैं, जिससे जल की बचत, उर्वरकों का बेहतर उपयोग, खरपतवार में कमी, श्रम लागत में कमी तथा पौधों का समान विकास सुनिश्चित होता है। परिणामस्वरूप उत्पादन और लाभ दोनों में वृद्धि होती है।
प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत “प्रति बूंद अधिक फसल“ का यह सफल उदाहरण यह रेखांकित करता है कि आधुनिक तकनीक अपनाकर हमारे किसान भाई अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत कर सकते हैं।
जिला उद्यान अधिकारी सीमा सिंह राणा ने जनपद के किसानों से अपील की है कि वे प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत उपलब्ध अनुदान एवं आधुनिक सिंचाई तकनीकों का अधिकाधिक लाभ उठाकर वैज्ञानिक खेती अपनाएं। इससे जल संरक्षण के साथ-साथ उत्पादन एवं आय में वृद्धि संभव है।
—————–
जौनपुर 23 जुलाई, 2026 (सू0वि0) विज्ञप्ति संख्या-05
डिप्टी कमिश्नर इण्डस्ट्रीज आशुतोष सहाय पाठक ने अवगत कराया है कि एक जनपद एक उत्पाद योजना के तर्ज पर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रदेश के विभिन्न जनपदों को विशिष्ट व्यंजन से पहचान दिलाने हेतु उ.प्र. सरकार द्वारा ‘एक जनपद एक व्यंजन’ योजना प्रारम्भ की गयी। जिसका उद्देश्य चिन्हित व्यंजनों को प्रतिस्पर्धी बनाना, राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मार्केटिंग करके स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है।
उक्त के क्रम में जनपद के चिन्हित व्यंजन (इमरती, एटमबम मिठाई, जौनपुर मूली) हैं, में कार्यरत/कार्य करने के इच्छुक व्यक्तियों को व्यंजन की उत्पादकता बढ़ाने, पैकेजिंग, फूड टेस्टिंग, व्यंजनों के शेल्फ लाइफ बढ़ाने हेतु आधुनिक उपकरण, कोल्ड चेन/कोल्ड स्टोरेज हेतु डीप फ्रीजर, क्लाउड किचन इत्यादि की स्थापना एवं अन्य ऐसे क्रिया-कलाप जो चिन्हित ओ.डी.ओ.सी. व्यंजन को प्रतिस्पर्धी बनाएं, के लिए ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
एक जनपद एक व्यंजन योजना के अंतर्गत जिसमें रू 25 लाख तक की कुल परियोजना लागत की इकाइयों हेतु कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अधिकतम रु. 6.25 लाख जो भी कम हो, रू. 25 लाख से रू. 50 लाख तक की इकाइयों हेतु रू. 6.25 लाख अथवा परियोजना लागत का 20 प्रतिशत जो भी अधिक हो, रू. 50 लाख से रू. 150 लाख तक की कुल परियोजना लागत की इकाइयों हेतु रू. 10 लाख अथवा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत जो भी अधिक हो तथा रू. 150 लाख से अधिक की कुल परियोजना लागत की इकाईयों हेतु परियोजना लागत का 10 प्रतिशत अधिकतम रू. 50 लाख जो भी कम हो, मार्जिन मनी के रुप में देय होगी।
सामान्य वर्ग के लाभार्थी द्वारा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत स्वयं का अंशदान एवं विशेष श्रेणी (अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिला एवं दिव्यांगजन) के लाभार्थियों को परियोजना लागत का 5 प्रतिशत स्वयं का अंशदान जमा करना होगा। परियोजना लागत में पूंजी व्यय (भूमि क्रय की लागत को छोड़कर) एवं कार्यशील पूंजी का एक चक्र शामिल होगा।
इच्छुक व्यक्ति जिनकी आयु कम से कम 18 वर्ष हो ऑनलाइन पोर्टल msme.up.gov.in पर अपना आवेदन कर सकते है। साथ ही विस्तृत जानकारी हेतु कार्यालय से किसी भी कार्यदिवस में संपर्क कर सकते हैं।
———-

