जौनपुर का ऐतिहासिक चेहलुम अकीदत व अनुशासनपूर्ण माहौल में संपन्न, ‘या हुसैन अलविदा’ की सदाओं के बीच ताज़िए सुपुर्द-ए-ख़ाक

जौनपुर का ऐतिहासिक चेहलुम अकीदत व अनुशासनपूर्ण माहौल में संपन्न, ‘या हुसैन अलविदा’ की सदाओं के बीच ताज़िए सुपुर्द-ए-ख़ाक

जौनपुर, 4 अगस्त। यूपी के जौनपुर में शीराज़-ए-हिन्द जौनपुर का ऐतिहासिक चेहलुम अकीदत, ग़म और अनुशासनपूर्ण माहौल में शांतिपूर्वक संपन्न हो गया। इमामबाड़ा शेख़ मुहम्मद इस्लाम मरहूम से निकला पारंपरिक तुर्बत एवं ताज़ियों का जुलूस निर्धारित मार्गों से होकर सदर इमामबाड़ा पहुँचा, जहां “या हुसैन अलविदा” की सदाओं के बीच ताज़ियों एवं तुर्बत को सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत दो अगस्त की रात इस्लाम चौक पर ताज़िया रखने के साथ हुई। शब्बेदारी की मजलिस में डॉ. कमर अब्बास ने ज़ाकिरी की, जबकि पूरी रात विभिन्न अंजुमनों ने नौहाख़्वानी और मातम के माध्यम से कर्बला के शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। प्रातःकालीन मजलिस में बिलाल हसनैन ने ज़ाकिरी की तथा अंजुमन गुलशन-ए-इस्लाम (रजि.) ने आग में दहकती ज़ंजीरों का मातम पेश किया। कार्यक्रम का संचालन सैय्यद अकबर हुसैन जैदी एडवोकेट एवं तालिब जैदी ने किया।
तीन अगस्त को मौलाना सैय्यद नदीम जैदी फैज़ाबादी ने मजलिस को संबोधित किया। इसके बाद ऐतिहासिक तुर्बत का जुलूस पानदरीबा रोड, हमाम दरवाज़ा, काज़ी की गली और पुरानी बाज़ार होते हुए सदर इमामबाड़ा पहुँचा। इस चरण का संचालन सैय्यद कबीर जैदी ने किया।
जौनपुर का यह ऐतिहासिक चेहलुम देशभर में मनाए जाने वाले चेहलुम से एक दिन पूर्व आयोजित किया जाता है। इसकी ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा के कारण विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में जायरीन इसमें शामिल होते हैं। मान्यता है कि इमामबाड़े के संस्थापक शेख़ मुहम्मद इस्लाम मरहूम के जेल में होने के कारण नौ मोहर्रम का ताज़िया नहीं उठ सका था। उनकी रिहाई के बाद 19 सफ़र को ताज़िया उठाकर सदर इमामबाड़ा में सुपुर्द-ए-ख़ाक किया गया, तभी से यह परंपरा चली आ रही है। वर्तमान में चेहलुम के समस्त इंतज़ामात मीर मुज़फ्फर हुसैन जैदी के ख़ानदान द्वारा किए जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *