दुनिया के मसले रूहानियत से हल होंगें:रमेश भइया
ब्यूरो चीफ आर एल पाण्डेय
लखनऊ। विनोबा विचार प्रवाह के सूत्रधार रमेश भइया ने कहा कि बाबा विनोबा ने अपनी चार माह की कश्मीर यात्रा के अनुभवों का निचोड़ बताते हुए कहा था कि दुनिया के सभी मसले रूहानियत से हल होने वाले हैं, सियासत से कतई नहीं । सियासत नाचीज़ है।जितना विज्ञान बढ़ रहा है,उतनी ही सियासत फीकी पड़ रही है। बाबा विनोबा तो कहते ही थे कि सियासत और विज्ञान एक होंगे,तो समझना चाहिए कि दुनिया खत्म होनेवाली है। इसलिए समाज में रूहानियत और विज्ञान,इन दोनों को जोड़ना चाहिए। बाबा विनोबा ने बताया कि रूहानियत प्रकट कैसे की जा सकती है? कि गांव गांव के लोगों को यह एहसास हो कि हमारा गांव एक कुनबा है।ऐसा समझकर गांव के लोग जमीन की मालिकी मिटा दें। गांव की एक सभा बनाएं,जो यह जिम्मा उठाए कि गांव के हर शख्स को काम और खाना देना है।गांव के कुटीर उद्योग बढ़ाने का काम भी वह करे।इस तरह गांव गांव अपना गांव यानी एक स्टेट ही है,ऐसा महसूस करके अपना मंसूबा योजना बनाएं।फिर हम कहीं भी रहें चाहे भारत में,एशिया में या दुनिया में ,यह सवाल ही नहीं रह जायेगा, हम अपनी जगह पर हैं और ईश्वर की गोद में हैं। हम अपने हांथ पांव और दिल दिमाग पर भरोसा करें, नेक काम करें और एक होकर काम करें। ऐसा करने से हमारा नसीब एक हद तक हमारे हांथ में ही रहता है। उस हद के बाद नसीब खुदा के हांथ में जाता है। अच्छी बात है कि हमारा नसीब हुकूमत या दूसरे किसी के हांथ में नहीं जाता है। *खुद पर भरोसा और खुदा पर भरोसा* यह दो नुक्ते ही मजबूत बनने चाहिए। दोनो को जोड़नेवाली जो लकीर होगी, वही हमारा रास्ता होगा। बाबा विनोबा ने आगे बताया कि खुद के मानी क्या है? खुद के मानी मैं अकेला,इस जिस्म में।रहनेवाला छोटा सा जीव नहीं हैं।बल्कि *खुद यानी हमारा गांव* हम जिस गांव में रहते हैं,वह सारा गांव मिलकर खुद बन गया है।और हमें अपनी मिली जुली ताकत बनानी है। बाबा कहते थे कि गांववालों को समझाया जाए कि आपकी तरक्की का जिम्मा आप पर ही है, बाहर वाले तथा सरकार भी सिर्फ थोड़ी मदद ही दे सकते हैं। *इसलिए दो बातें याद रखिए पहली सारा गांव मिलकर हम खुद बन जाएं और दूसरी खुदा को याद करें, बीच में किसी को दखल न देने दें।*

