(नई दिल्ली)छात्र को मजिस्ट्रेट के नोटिस पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई बोले- नोटिस भेजने की हिम्मत कैसे हुई

(नई दिल्ली)छात्र को मजिस्ट्रेट के नोटिस पर भड़का सुप्रीम कोर्ट, सीजेआई बोले- नोटिस भेजने की हिम्मत कैसे हुई
नई दिल्ली ,10 सितंबर ,(आरएनएस)। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन को लेकर गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय (जीबीयू) के एक छात्र को नोटिस जारी करने के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने सख्त नाराजगी जताते हुए बुधवार को कहा कि वह ग्रेटर नोएडा की मजिस्ट्रेट से इस पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगेगी। चीफ जस्टिस सूर्य कांत की अगुवाई वाली तीन जजों की पीठ ने दो टूक सवाल किया कि जब कोर्ट ने पहले ही छात्रों के खिलाफ किसी भी तरह की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक लगा रखी थी, तो एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने ऐसा नोटिस जारी करने की हिम्मत कैसे की?
वकील ने उठाया छात्र को मिले 5 लाख के बॉन्ड नोटिस का मुद्दा
यह मामला वरिष्ठ वकील विश्वजीत भट्टाचार्य ने बेंच के समक्ष उठाते हुए दलील दी कि प्रशासन छात्रों के मन में डर का माहौल पैदा कर रहा है। उन्होंने बताया कि शीर्ष अदालत ने 1 सितंबर को साफ निर्देश दिया था कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कोई दंडात्मक कदम नहीं उठाया जाएगा। इसके बावजूद ग्रेटर नोएडा आयुक्तालय के तृतीय कार्यकारी मजिस्ट्रेट कार्यालय ने सेकेंड ईयर के छात्र अक्षत त्रिपाठी को शांति व्यवस्था के नाम पर 5 लाख रुपये का मुचलका (बॉन्ड) भरने का नोटिस थमा दिया। हालांकि विवाद बढ़ने और मीडिया में खबरें आने के बाद पुलिस ने इस नोटिस को वापस ले लिया, लेकिन वकील ने इसे सीधे तौर पर अदालत की अवमानना करार दिया।
युवाओं के खिलाफ ऐसी कार्रवाई बर्दाश्त नहीं, मजिस्ट्रेट को देना होगा जवाब : सीजेआई
याचिकाकर्ता की दलीलों पर सहमति जताते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने कड़े शब्दों में कहा कि देश के युवाओं के खिलाफ इस तरह की मनमानी कार्रवाई का कोई सवाल ही नहीं उठता। कोर्ट का आदेश पूरी तरह से स्पष्ट था और उसका उल्लंघन हैरान करने वाला है। उन्होंने वकील को तमाम तथ्य रिकॉर्ड पर रखने के निर्देश देते हुए कहा कि अदालत संबंधित मजिस्ट्रेट से जवाब तलब करेगी और उन्हें अपनी बात रखने का मौका देगी। पीठ के सदस्य जस्टिस बागची द्वारा नोटिस वापसी पर पूछे गए सवाल पर वकील ने कहा कि उन्हें इसकी औपचारिक जानकारी नहीं मिली है, केवल मीडिया के जरिए पता चला है।
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में शामिल होने पर पुलिस ने कसा था शिकंजा
पूरा विवाद जीबीयू के छात्र अक्षत त्रिपाठी को मिले नोटिस से जुड़ा है। पुलिस का आरोप था कि छात्र ने जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन में शामिल होने के लिए अन्य विद्यार्थियों को उकसाया था। हालांकि छात्र ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि उसने केवल शांतिपूर्ण ढंग से प्रदर्शन में हिस्सा लिया था और उस वक्त उसकी कोई क्लास भी नहीं चल रही थी। पुलिस के मुताबिक यह कोई सजा नहीं बल्कि शांति बनाए रखने के लिए एक एहतियाती बॉन्ड नोटिस था, जिसे अब वापस ले लिया गया है, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इसे अदालत के आदेशों की खुली अनदेखी मानते हुए जांच का दायरा बढ़ा दिया है।
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