(नई दिल्ली)रेलवे के पानी में ‘मलÓ वाला बैक्टीरिया, नई दिल्ली-हावड़ा समेत बड़े स्टेशनों की कैग रिपोर्ट ने खोली पोल
नई दिल्ली ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है और रोजाना करोड़ों यात्री इसमें सफर करते हैं। सफर के दौरान प्यास लगने पर रेलवे स्टेशनों पर लगे वाटर कूलर का पानी पीना एक आम बात है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जो पानी आप पी रहे हैं, वह आपके स्वास्थ्य के लिए कितना खतरनाक हो सकता है? नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की ताजा रिपोर्ट ने एक ऐसा सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसे जानकर आप रेलवे स्टेशन का पानी पीने से पहले सौ बार सोचेंगे। 12 अगस्त को संसद में पेश की गई इस रिपोर्ट के अनुसार, देश के कई बड़े स्टेशनों पर पीने के पानी में इंसान के मल में पाया जाने वाला खतरनाक ‘ई.कोलाईÓ बैक्टीरिया मिला है। इस खुलासे ने रेलवे के स्वच्छता दावों की पोल खोलकर रख दी है।
इन प्रमुख स्टेशनों के पानी में मिला बैक्टीरिया
सीएजी की ओर से ‘भारतीय रेलवे में गैर-उपनगरीय रेलवे स्टेशनों पर यात्री सुविधाएं और स्वच्छताÓ शीर्षक वाली रिपोर्ट में रेलवे की घोर लापरवाही को उजागर किया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिणी रेलवे के कोयंबटूर और पलक्कड़, दक्षिण मध्य रेलवे के हैदराबाद, मध्य रेलवे के छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस , भिवंडी रोड, कल्याण और लोनावला के साथ-साथ पूर्वी रेलवे के मधुपुर स्टेशन के वाटर कूलर से पानी के नमूने लिए गए थे। इन सभी जगहों के पानी में ई-कोलाई बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। चिंता की बात यह है कि साल 2022-23 के दौरान आठ जोन के करीब 49 और 2023-24 में 56 स्टेशनों के पानी में भी यह जानलेवा बैक्टीरिया पाया गया था।
रेल मंत्रालय के मानकों पर फेल हुए 458 स्टेशन
रेल मंत्रालय द्वारा यात्रियों की सुरक्षा और सुविधाओं के लिए जो कड़े मानक और दिशा-निर्देश तय किए गए हैं, रेलवे के विभिन्न जोन उनका पालन करने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहे हैं। सीएजी के ऑडिट में यह बात सामने आई है कि 512 स्टेशनों की गहन जांच करने पर उनमें से 458 स्टेशन रेलवे बोर्ड की गाइडलाइंस पर खरे नहीं उतरे। इन स्टेशनों पर न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं (रूश्व्र) या तो सिरे से नदारद थीं या फिर तय मानकों से बहुत कम थीं। पीने के साफ पानी की कमी के साथ-साथ शौचालयों में भी भयंकर गंदगी पाई गई है, जो सीधे तौर पर यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ है।
नई दिल्ली और हावड़ा जैसे वीआईपी स्टेशनों का भी बुरा हाल
सिर्फ छोटे स्टेशन ही नहीं, बल्कि देश के सबसे व्यस्त और हृस्त्र-1 कैटेगरी में आने वाले वीआईपी स्टेशनों का हाल भी बेहाल है। रिपोर्ट के मुताबिक नई दिल्ली, सियालदह, हावड़ा, मुंबई सेंट्रल और सीएसएमटी जैसे बड़े स्टेशनों पर साफ-सफाई और यात्रियों के बैठने तक की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इन बड़े स्टेशनों पर कूड़ेदान और इलेक्ट्रॉनिक ट्रेन इंडिकेटर बोर्ड जैसी बुनियादी चीजों का भारी अभाव है। ऑडिट में यह भी पाया गया कि पीने के पानी के नल, पंखे, वॉटर कूलर और जरूरी साइनबोर्ड जैसी आवश्यक सुविधाओं में भी कई स्टेशनों पर भारी कमियां हैं।
सीएजी ने दिए सुधार के सख्त निर्देश
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने अपनी रिपोर्ट में केवल रेलवे की खामियों को ही उजागर नहीं किया है, बल्कि व्यवस्था को सुधारने के लिए सख्त सिफारिशें भी की हैं। सीएजी ने रेलवे बोर्ड को निर्देश दिया है कि वाटर सप्लाई सिस्टम की नियमित जांच की जाए और ‘यूनिफॉर्म ड्रिंकिंग वॉटर क्वालिटी प्रोटोकॉलÓ के तहत पीने के पानी की गुणवत्ता की पूरी टेस्टिंग सुनिश्चित की जाए, जिसमें सभी जरूरी पैरामीटर शामिल हों। इसके साथ ही स्टेशनों पर स्वच्छता बनाए रखने और यात्रियों की सुविधाओं से जुड़े अन्य मापदंडों पर भी गंभीरता से ध्यान देने को कहा गया है।
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(चेन्नई)टीवीके सरकार के 100 दिन : कल्याणकारी योजनाओं और निवेश पर रहा जोर, सीएम विजय के सामने ये चुनौतियां
चेन्नई ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेट्री कझगम (टीवीके) सरकार सोमवार को सत्ता में अपने 100 दिन पूरे कर रही है। यह तमिलनाडु में द्रविड़ मुनेत्र कझगम (डीएमके) और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम (एआईएडीएमके) के बारी-बारी से चले आ रहे शासन के पांच दशकों से अधिक के दौर के बाद एक बड़ा राजनीतिक बदलाव है।
एक नई राजनीतिक पार्टी टीवीके ने अप्रैल में विधानसभा चुनाव जीता और 10 मई को सरकार बनाई। विजय ने नौ मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। 21 मई को कैबिनेट का विस्तार करते हुए 23 मंत्री और अगले दिन दो और मंत्री शामिल किए गए।
पद संभालने के तुरंत बाद विजय ने तीन अहम फाइलों पर दस्तखत किए। इनमें 500 यूनिट तक बिजली इस्तेमाल करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं को हर दो महीने में 200 यूनिट मुफ्त बिजली देना, महिलाओं की सुरक्षा के लिए ‘सिंगप्पेन स्पेशल टास्क फोर्सÓ का प्रस्ताव और 65 एंटी-नारकोटिक्स यूनिट बनाना शामिल था।
सरकार ने शिक्षण संस्थानों और पूजा स्थलों के पास 717 टीएएसएमएसी शराब की दुकानें बंद कर दीं। इसके साथ ही सरकारी कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ता 58 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत कर दिया, अम्मा कैंटीन के नवीनीकरण का आदेश दिया और सीमांत किसानों के लिए 50,000 रुपए तक के फसल ऋण माफ करने की घोषणा की।
27 मई को नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान सीएम विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और मेकेदातु बांध विवाद तथा तमिलनाडु के मछुआरों की समस्याओं से जुड़ी मांगें रखीं। 9 जून को उन्होंने ‘सिंगप्पेन फोर्सÓ की शुरुआत की और बाद में सरकारी अस्पतालों में पैदा होने वाले बच्चों के लिए सोने की अंगूठी देने की योजना की घोषणा की।
संशोधित बजट में कई कल्याणकारी उपाय पेश किए गए, जिनमें दुल्हनों के लिए आठ ग्राम के सोने के सिक्के और रेशमी कपड़े, झोपड़ियों की जगह 70,000 पक्के घर, 11वीं कक्षा के छात्रों के लिए आधुनिक साइकिलें और सरकारी कॉलेज के छात्रों के लिए लैपटॉप शामिल हैं।
राज्य की वित्त मंत्री मारिया विल्सन ने कहा कि बजट में चुनाव के 125 वादों को शामिल किया गया है। टीवीके सरकार के लिए उद्योग एक मुख्य फोकस बन गया है। सरकार का कहना है कि अपने पहले 100 दिनों में 104 समझौतों के जरिए 1 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का निवेश आया है।
अकेले ‘वेट्री तमिलनाडु इन्वेस्टर्स कॉन्क्लेवÓ में 67,452 करोड़ रुपए के 97 समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनसे 23 जिलों में 1.07 लाख नौकरियां पैदा होने की संभावना है।
हालांकि, प्रशासन को कानून-व्यवस्था, यौन अपराधों, बिजली कटौती और खराब कचरा प्रबंधन को लेकर विपक्ष की आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। अनुभवहीन मंत्रियों को विधानसभा में डीएमके और एआईएडीएमके विधायकों का भी सामना करना पड़ा है।
इन चुनौतियों के बावजूद सरकार ने प्रशासनिक तत्परता, कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार और भ्रष्टाचार के खिलाफ सतर्कता की छवि पेश की है। इसका शुरुआती रिकॉर्ड आशाजनक लगता है, लेकिन इसके ऐलान और निवेश का अमल ही यह तय करेगा कि क्या शुरुआती 100 दिन स्थायी बदलाव की नींव बनेंगे या नहीं।
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(नई दिल्ली)पहलगाम हमले पर पीएम मोदी का वो सख्त आदेश, एनएसए डोभाल ने खोला ऑपरेशन सिंदूर का बड़ा राज
नई दिल्ली ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। भारत के दुश्मनों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वे दुनिया के किसी भी कोने में क्यों न छिपे हों। डिस्कवरी की नई डॉक्युसीरीज ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूरÓ में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक ऐसा ही रोंगटे खड़े कर देने वाला खुलासा किया है। डोभाल ने विस्तार से बताया है कि पहलगाम में हुए दर्दनाक आतंकी हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किस तरह कमान संभाली और आतंकियों को उनके अंजाम तक पहुंचाने के लिए क्या सख्त निर्देश दिए थे। इस खुलासे ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि देश की संप्रभुता से खिलवाड़ करने वालों को भारत घर में घुसकर मारेगा।
सऊदी अरब से लौटते ही एयरपोर्ट पर पीएम मोदी के वो तीखे सवाल
जिस वक्त पहलगाम में आतंकियों ने खूनी खेल खेला, उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब के आधिकारिक दौरे पर थे। एनएसए डोभाल ने उस रात को याद करते हुए बताया कि पीएम मोदी जैसे ही स्वदेश लौटे, विदेश सचिव उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे। समय की नजाकत को देखते हुए एयरपोर्ट पर ही एक उच्च स्तरीय आपात बैठक हुई। प्रधानमंत्री ने बिना समय गंवाए सबसे पहला सवाल दागा, यह किसने किया है? इसके लिए कौन जिम्मेदार है? हमें बिल्कुल साफ पता होना चाहिए कि हमलावर कौन हैं। मुझे यह जानकारी तुरंत चाहिए।
‘नर्क में भी छिपे हों तो ढूंढ निकालेंगेÓ
एनएसए ने डॉक्युसीरीज में पीएम मोदी के उस कड़े निर्देश का जिक्र किया, जिसने पूरी कार्रवाई की रूपरेखा तय कर दी थी। डोभाल के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने दो टूक शब्दों में कहा था कि भारत उन लोगों के पीछे जाएगा जो इन निर्दोषों की हत्या के लिए जिम्मेदार हैं। उन्होंने साफ निर्देश दिया कि आतंकी चाहे जमीन पर हों, आसमान में हों या फिर नर्क में, हम उन्हें ढूंढ निकालेंगे। डोभाल ने स्पष्ट किया कि जब प्रधानमंत्री कहते हैं कि ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ जारी है, तो उसका सीधा सा मतलब है कि आतंकवाद के खिलाफ यह महासंग्राम तब तक नहीं रुकेगा, जब तक आखिरी आतंकी का खात्मा नहीं हो जाता।
खुफिया एजेंसियों का सटीक काम और ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ का विध्वंसक प्रहार
अजीत डोभाल ने इस पूरे ऑपरेशन की सफलता का बड़ा श्रेय भारत की इंटेलिजेंस एजेंसियों को दिया। उन्होंने कहा कि खुफिया एजेंसियों ने बेहतरीन काम किया, जिसकी बदौलत बेहद कम समय में हम सटीक नतीजे पर पहुंच सके और हमलावरों की पहचान हो सकी। गौरतलब है कि 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकियों ने एक कायराना हमले में 26 बेगुनाह नागरिकों की जान ले ली थी। इस शर्मनाक हरकत का हिसाब चुकता करने के लिए भारत ने 7 मई को ‘ऑपरेशन सिंदूरÓ लॉन्च किया। इस ऑपरेशन का एकमात्र मकसद दुश्मनों के उन कैंपों को नेस्तनाबूद करना था जो इस हमले के लिए जिम्मेदार थे। इसके तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (क्कश्य) में मौजूद आतंकी ठिकानों पर विनाशकारी और सटीक हमले किए गए। डोभाल ने कड़े शब्दों में कहा कि भारत की संप्रभुता की रक्षा की लड़ाई में अब हमारे लिए ‘कोई सीमा नहींÓ है।
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(रांची)रांची में छात्रों ने बदला आंदोलन का स्वरूप, करेंगे पुतला दहन, बोले- ‘जितनी जिम्मेदार जेएमएम, उतनी ही कांग्रेसÓ
रांची ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। जेपीएससी-जेएसएससी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के विरुद्ध रांची में जारी छात्रों का आंदोलन 23वें दिन में प्रवेश कर गया है। रविवार को छात्र अपनी मांगों को लेकर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। छात्रों ने रविवार को पुतला दहन का ऐलान किया है।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अल्टीमेटम दिया है कि 18 अगस्त तक सरकार उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार नहीं करती है तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री आवास के घेराव के समय लाखों छात्र प्रदेशभर से आएंगे।
छात्र कांग्रेस सांसद राहुल गांधी पर भी आरोप लगा रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राहुल गांधी सिर्फ छात्रों के साथ होने का आश्वासन दे रहे हैं, जबकि उनकी पार्टी सरकार के साथ गठबंधन में है और उनके मंत्री गैरजिम्मेदाराना तरीके से बयान दे रहे हैं।
छात्र रविंद्र कुमार पासवान ने कहा कि हम अपने आंदोलन का स्वरूप बदल रहे हैं। इसकी जिम्मेदार झारखंड सरकार है। हमने पिछले 22 दिन में गांधीवादी तरीके से विरोध प्रदर्शन किया। ऐसा लगता है कि यह शांतिपूर्ण प्रदर्शन राज्य सरकार को रास नहीं आया है और यह छात्रों को शहीद भगत सिंह रास्तों पर चलने के लिए मजबूर कर रही है।
उन्होंने कहा कि हम लोगों ने अब आर-पार की लड़ाई के लिए ठान लिया है। जब तक उनकी मांगों को नहीं मान लिया जाता, तब तक हम लोग आंदोलनरत रहेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों में बहुत आक्रोश है। वे यही कह रहे हैं कि 22 दिनों से हम शांतिपूर्ण तरीके से विरोध जता रहे हैं, लेकिन सरकार नहीं सुन रही है। इसलिए हम लोग आज पुतला दहन करने जा रहे हैं।
छात्र ने कहा, झारखंड में कांग्रेस सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा है, लेकिन राहुल गांधी भी हमारे लिए कुछ नहीं कर रहे हैं। उन्होंने पोस्ट के माध्यम से आश्वासन दिया था कि हम छात्रों के साथ हैं और छात्रों के मुद्दे हल होने चाहिए, लेकिन उनका आश्वासन सिर्फ आश्वासन ही रह गया है।
उन्होंने सवाल किया कि आखिर राहुल गांधी हमारी मदद क्यों नहीं कर रहे हैं। एक तरफ वे कहते हैं कि छात्रों के साथ हैं, लेकिन दूसरी तरफ उनके मंत्रियों की जुबान पर नियंत्रण नहीं है। छात्र ने कहा, आज कांग्रेस के बड़े नेता हैं, लेकिन आपके नियंत्रण में आपके मंत्री क्यों नहीं हैं? आप कुछ कहते हैं, लेकिन मंत्री कुछ और बोल रहे हैं।
छात्र रविंद्र ने कहा कि झारखंड में जितनी जिम्मेदार जेएमएम है, उतनी ही कांग्रेस है। हम सभी छात्र इन दोनों का खेल समझ चुके हैं।
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(रामपुरहाट)बंगाल के पूर्व मंत्री और टीएमसी नेता आशीष बनर्जी का पार्टी कार्यालय में फंदे से लटका मिला शव, सुसाइड नोट बरामद
रामपुरहाट ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। पश्चिम बंगाल की सियासत से रविवार की सुबह एक बेहद स्तब्ध कर देने वाली खबर सामने आई है। तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता, राज्य के पूर्व मंत्री और विधानसभा के पूर्व डिप्टी स्पीकर आशीष बनर्जी का निधन हो गया है। उनका शव बीरभूम जिले के रामपुरहाट स्थित उनके आवास के ठीक पास बने पार्टी कार्यालय में फांसी के फंदे से झूलता हुआ मिला। इस हाई-प्रोफाइल घटना ने पूरे राज्य में हड़कंप मचा दिया है और टीएमसी खेमे में शोक की लहर दौड़ गई है। पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है और मामले की गहनता से तफ्तीश की जा रही है।
सुसाइड नोट और पुलिस की प्राथमिक जांच
स्थानीय प्रशासन और पुलिस को जैसे ही इस दर्दनाक घटना की सूचना मिली, वे तुरंत मौके पर पहुंचे और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया। मीडिया को दी गई प्राथमिक जानकारी में पुलिस ने बताया है कि घटनास्थल यानी पार्टी कार्यालय से एक कथित सुसाइड नोट भी बरामद हुआ है। हालांकि, सुसाइड नोट में क्या लिखा है, इसका खुलासा अभी जांच एजेंसियों ने नहीं किया है, लेकिन पुलिस हर एंगल से इस मौत की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है।
दरवाजे के छेद से नजर आया खौफनाक मंजर
आशीष बनर्जी के भाई प्रशांत बनर्जी ने इस खौफनाक वाकये की जानकारी देते हुए बताया कि उन्हें सबसे पहले अनहोनी की आशंका कैसे हुई। प्रशांत के मुताबिक, पार्टी दफ्तर के दरवाजे में एक छोटा सा छेद था, जिससे अंदर झांकने पर उन्हें एक रस्सी लटकती हुई दिखाई दी। इस खौफनाक मंजर को देखकर उन्होंने तुरंत परिवार के अन्य सदस्यों को इक_ा किया और पुलिस को सूचना दी। प्रशांत ने हैरानी जताते हुए बताया कि उनके भाई का व्यवहार बिल्कुल सामान्य था, हर रोज की तरह बैठकें चल रही थीं और एक दिन पहले ही उन्होंने पूरे उत्साह के साथ स्वतंत्रता दिवस पर झंडा भी फहराया था। बीती रात भी ऐसा कुछ असामान्य नहीं लगा जिससे यह अंदेशा हो सके कि वे इतना बड़ा कदम उठा लेंगे।
रामपुरहाट से 5 बार रहे विधायक, ममता सरकार में संभाला था मंत्रालय
70 साल के आशीष बनर्जी बीरभूम जिले की राजनीति का एक ऐसा चेहरा थे, जिनकी जमीनी पकड़ बेहद मजबूत मानी जाती थी। वह रामपुरहाट विधानसभा सीट से लगातार पांच बार जीत का परचम लहराकर विधायक निर्वाचित हुए थे। पश्चिम बंगाल में जब पहली बार ममता बनर्जी के नेतृत्व में सत्ता परिवर्तन हुआ और टीएमसी की सरकार बनी, तो आशीष बनर्जी को राज्य के शिक्षा और कृषि मंत्री की अहम जिम्मेदारी सौंपी गई थी। अपने लंबे राजनीतिक करियर में उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा के डिप्टी स्पीकर का पदभार भी संभाला था।
विधानसभा चुनाव में मिली थी हार, कोर कमेटी से दे दिया था इस्तीफा
आशीष बनर्जी का हालिया राजनीतिक सफर चुनौतियों भरा रहा। इसी साल 2026 में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में उन्हें कड़े मुकाबले में भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ध्रुव साहा के हाथों हार का सामना करना पड़ा था। इस बार के चुनावों में बीरभूम जिले में समीकरण बदले थे और भाजपा ने 11 में से छह सीटों पर जीत दर्ज की थी, जो टीएमसी के लिए एक बड़ा झटका था। हार के बाद, जून महीने में ही आशीष बनर्जी ने तृणमूल की बीरभूम जिला कोर कमेटी के अध्यक्ष पद से अपना इस्तीफा सौंप दिया था, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट किया था कि वे पार्टी के एक सामान्य सदस्य के तौर पर जुड़े रहेंगे।
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(मुंबई)विमल के चक्कर में फंसे बॉलीवुड के 3 बड़े सुपरस्टार, एफडीए ने थमाया नोटिस; लग सकता है भारी जुर्माना
मुंबई ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। ‘बोलो जुबां केसरीÓ का नारा अब बॉलीवुड के सबसे बड़े सितारों के लिए ही मुसीबत का सबब बन गया है। विमल इलायची के एक विज्ञापन को लेकर सिनेमा जगत के तीन दिग्गज अभिनेता- शाहरुख खान, अजय देवगन और टाइगर श्रॉफ कानूनी पचड़े में फंस गए हैं। महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए इन तीनों सुपरस्टार्स को कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। इन सितारों पर सरोगेट विज्ञापन के जरिए अप्रत्यक्ष रूप से प्रतिबंधित पान मसाले का प्रचार करने का बेहद गंभीर आरोप लगा है, जिसके बाद अब इन पर कानूनी कार्रवाई की तलवार लटक रही है।
सरोगेट विज्ञापन का आरोप और प्रतिबंध का खुला उल्लंघन
एफडीए की ओर से जारी किए गए नोटिस में यह साफ तौर पर कहा गया है कि विमल इलायची के इस विज्ञापन में इस्तेमाल किए गए ब्रांड नाम, अभिनेताओं के संवाद और प्रस्तुति का तरीका सीधे तौर पर पान मसाला से जुड़ा हुआ संदेश देते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि महाराष्ट्र में 13 जुलाई 2026 को जारी एक आदेश के तहत राज्य में पान मसाला जैसे उत्पादों के निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री पर एक साल का पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है। ऐसे में इस विज्ञापन को प्रतिबंधित उत्पाद को पिछले दरवाजे से बेचने (सरोगेट विज्ञापन) की एक कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
भ्रामक प्रचार पर लग सकता है 10 लाख रुपये तक का जुर्माना
खाद्य सुरक्षा विभाग ने इस मामले को बेहद गंभीरता से लेते हुए एफएसएसएआई के कड़े नियमों का डंडा चलाया है। एफडीए ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट, 2006 की धारा 24 और 53 का हवाला देते हुए अपना कड़ा रुख स्पष्ट किया है। कानून के मुताबिक, खाद्य पदार्थों से जुड़े ऐसे किसी भी भ्रामक विज्ञापन पर सख्त रोक है जो उपभोक्ता को गुमराह करते हों। इस कानून के उल्लंघन और भ्रामक प्रचार के साबित होने पर इन अभिनेताओं को 10 लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना भी चुकाना पड़ सकता है।
ऑनलाइन और मीडिया प्लेटफॉर्म पर चल रहे विज्ञापन पर मांगा स्पष्टीकरण
विभाग द्वारा भेजे गए पत्र में बताया गया है कि विमल इलायची का यह विवादित विज्ञापन फिलहाल विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स और अन्य मीडिया माध्यमों पर धड़ल्ले से प्रसारित किया जा रहा है। इसी के मद्देनजर एफडीए ने अजय देवगन, शाहरुख खान और टाइगर श्रॉफ से विज्ञापन में उनकी भागीदारी को लेकर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने इन तीनों अभिनेताओं से साफ शब्दों में पूछा है कि नियमों की इस अनदेखी के लिए उनके खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानून के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई क्यों न की जाए। अब सभी की निगाहें इन सितारों के जवाब पर टिकी हैं।
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(रांची)झारखंड में गरमाया छात्र आंदोलन : 22 दिनों से धरने पर बैठे अभ्यर्थियों ने मांगा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का इस्तीफा
रांची ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और धांधली के खिलाफ छात्रों का आंदोलन उग्र रूप लेता जा रहा है। राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले 22 दिनों से धरने पर बैठे प्रतियोगी छात्रों ने अब मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग कर दी है। हम 22 दिनों से बैठे हैं, क्या कीड़े-मकोड़े हैं?
प्रदर्शनकारी छात्र प्रतिनिधि पीयूष कुमार ने सरकार के रुख और हाल ही में शुरू किए गए संवाद अभियान पर तीखा हमला बोला
संवाद अभियान पर तंज : उन्होंने कहा, पहले अंग्रेज बहादुर का राज था और अब सरकार बहादुर का राज है। सरकार ने छात्रों की वार्ता, छात्रों के साथ अभियान शुरू किया है, जबकि हम पिछले 22 दिनों से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे हैं। क्या हम इंसान नहीं हैं?
सरकार पर उपेक्षा का आरोप: छात्रों का कहना है कि सरकार वास्तविक पीड़ित अभ्यर्थियों से सीधे संवाद करने के बजाय दिखावे के अभियान चला रही है।
छात्रों की दो टूक मांगें
आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पूरी तरह अडिग हैं:
परीक्षाएं रद्द हों: जेपीएससी (11वीं से 13वीं) और जेएसएससी की विवादित परीक्षाओं को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए।
सीबीआई जांच: परीक्षा प्रक्रिया में हुई कथित धांधली और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए।
इस्तीफे की मांग: यदि सरकार निष्पक्ष जांच और न्याय सुनिश्चित नहीं कर सकती, तो मुख्यमंत्री अपने पद से त्यागपत्र दें।
आंदोलन तेज करने की रूपरेखा: पुतला दहन और सीएम आवास का घेराव
छात्रों ने अपने आंदोलन को पूरे राज्य में विस्तार देने की घोषणा की है:
राज्यव्यापी पुतला दहन: सोमवार को झारखंड के सभी जिला मुख्यालयों पर सरकार का पुतला दहन किया जाएगा।
सीएम आवास घेराव: पुतला दहन के बाद भी यदि सरकार ने ठोस निर्णय नहीं लिया, तो राज्यभर के अभ्यर्थी राजधानी रांची कूच करेंगे और मुख्यमंत्री आवास का अनिश्चितकालीन घेराव करेंगे।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, वे सीएम आवास के बाहर डटे रहेंगे और आंदोलन जारी रखेंगे।
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(हैदराबाद)हैदराबाद : मंदिर परिसर में नाबालिग बच्ची से यौन उत्पीड़न, 66 वर्षीय मैनेजर हिरासत में
हैदराबाद ,16 अगस्त ,(आरएनएस)। तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद के निकट स्थित एक मंदिर में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का गंभीर मामला सामने आया है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए मंदिर के 66 वर्षीय मैनेजर को हिरासत में ले लिया है। मंदिर परिसर में 13 अगस्त को हुई थी घटना
पुलिस अधिकारियों के अनुसार-घटनाक्रम: यह कथित घटना 13 अगस्त को मंदिर परिसर के भीतर घटित हुई थी।
स्थानीय लोगों की सजगता: घटना की जानकारी मिलते ही कुछ स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचित किया, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
पॉक्सो एक्ट में मामला दज:र् पुलिस ने पीड़िता के परिजनों व प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर आरोपी मैनेजर के खिलाफ रामचंद्रपुरम पुलिस थाने में पॉक्सो अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उसे हिरासत में लिया।
पुलिस प्रशासन ने बताया कि मामले की गहन
जांच जारी है और पीड़िता के बयान दर्ज कर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
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