(नई दिल्ली)विद्वानों के भरोसे नहीं, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया के वोटों से बना एमपीÓ, नितिन गडकरी का बड़ा बयान
नई दिल्ली ,08 सितंबर ,(आरएनएस)। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने भारतीय राजनीति, लोकतंत्र और चुनावी समीकरणों को लेकर एक बार फिर बेहद बेबाक और चौंकाने वाला बयान दिया है। एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान अपने चिर-परिचित बेबाक अंदाज में बोलते हुए गडकरी ने कहा कि उन्हें सबसे ज्यादा 90 प्रतिशत से अधिक वोट उन इलाकों से मिलते हैं जिन्हें ‘अंडरवर्ल्डÓ और ‘रेड लाइट एरियाÓ के तौर पर जाना जाता है। इसके साथ ही उन्होंने साफ किया कि उनका किसी भी असामाजिक तत्व या अवैध काम से कोई नाता नहीं है, बल्कि यह भारी समर्थन उन्होंने केवल विकास कार्यों, पक्की सड़कों और सामाजिक सेवाओं के दम पर हासिल किया है।
‘विद्वान घर बैठे रहते हैं और पूछते हैं देश का क्या होगाÓ, पढ़े-लिखे वोटरों पर ली चुटकी
पढ़े-लिखे तबके और बुद्धिजीवियों के मतदान व्यवहार पर तंज कसते हुए केंद्रीय मंत्री ने मजाकिया लहजे में खरी-खरी सुनाई। उन्होंने कहा कि वे बड़े विद्वानों के भरोसे सांसद नहीं बने हैं, क्योंकि पढ़े-लिखे लोग वोटिंग के दिन केवल टालमटोल करते हैं कि ‘अभी जाऊंगा, बाद में जाऊंगाÓ और शाम के 5 बज जाते हैं, लेकिन वोट डालने नहीं निकलते। गडकरी ने दो टूक कहा कि जो लोग वोट देने तक नहीं जाते, उन्हें नेताओं से यह पूछने का कोई हक नहीं है कि देश का क्या होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र की सबसे बड़ी समस्या राजनेता या पार्टियां नहीं हैं, बल्कि जनता में जागरूकता की कमी है। जब तक लोग जाति, धर्म, पंथ और भाषा से ऊपर उठकर शिक्षा व विकास के नाम पर वोट नहीं करेंगे, तब तक लोकतंत्र में बदलाव संभव नहीं है।
रेड लाइट और अंडरवर्ल्ड इलाकों में मिले 92 फीसदी वोट, विकास को बताया वजह
नागपुर के चुनावी आंकड़ों का उदाहरण देते हुए गडकरी ने बताया कि तथाकथित बड़े और शिक्षित इलाकों में उन्हें महज 70 से 75 फीसदी वोट मिलते हैं। इसके विपरीत, जिन इलाकों को क्रिमिनल बैकग्राउंड, अंडरवर्ल्ड और रेड लाइट एरिया माना जाता है, वहां उन्हें 92 से 99 फीसदी तक वोटरों का एकतरफा समर्थन हासिल हुआ। गडकरी ने स्पष्ट किया कि इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं निकाला जाना चाहिए कि उनके इन लोगों से कोई निजी संबंध हैं या वे गलत कामों का समर्थन करते हैं। उन्होंने कहा कि उन बस्तियों और उपेक्षित क्षेत्रों में उन्होंने बेहतर सड़कें बनवाई हैं और निस्वार्थ भाव से सामाजिक कार्य किए हैं, जिसका नतीजा है कि वहां की जनता उन पर इतना अटूट विश्वास जताती है।
जॉर्ज फर्नांडिस और अटल बिहारी वाजपेयी को बताया दिल के करीब, साझा किया पुराना किस्सा
नितिन गडकरी ने इस दौरान अपने पसंदीदा दो कद्दावर राजनेताओं का नाम भी उजागर किया। उन्होंने बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और जॉर्ज फर्नांडिस उनके दिल में एक आइकॉनिक स्थान रखते हैं और दोनों से उन्हें अपार स्नेह व मार्गदर्शन मिला। जॉर्ज फर्नांडिस से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा साझा करते हुए गडकरी ने बताया कि जब वे महाराष्ट्र में मंत्री थे, तब उन्होंने जॉर्ज साहब से पूछा था कि आपकी पार्टी में इतने बड़े-बड़े नेता हैं लेकिन किसी की आपस में बनती क्यों नहीं है? इस पर जॉर्ज फर्नांडिस ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया था कि ‘यही तो लोकतंत्र की असली खूबसूरती है।Ó गडकरी ने कहा कि उस दिन वे समझ गए थे कि राजनीति विरोधाभासों, मजबूरियों और सीमाओं का ही एक खेल है, जिसमें सबसे पहली रणनीति चुनाव जीतना आना चाहिए।
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