*पतंग के मांझे से महिला का पैर कटा, मेदांता के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर बचाया पैर*
*लखनऊ, 23 जून, 2026:* पतंग के मांझे से हुई एक गंभीर दुर्घटना में 35 वर्षीय महिला का पैर कटने की नौबत आ गई, लेकिन डॉक्टरों की कोशिशों से उसका पैर बचा लिया गया। यह घटना 25 अप्रैल 2026 को लखनऊ के क्षेत्र में हुई।
जानकारी के अनुसार महिला अपने पति के साथ दोपहिया वाहन पर पीछे बैठकर जा रही थी। इसी दौरान अचानक पतंग का तेज मांझा उसके पैर में उलझ गया। मांझे से पैर में गहरे कट लग गए। पैर की नसों और खून की सप्लाई करने वाले हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचा। चोट इतनी गंभीर थी कि पैर को बचाना एक बड़ी चुनौती बन गया था।
घटना के बाद महिला को तुरंत मेदांता हॉस्पिटल, लखनऊ लाया गया। यहां प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डायरेक्टर डॉ. निखिल पुरी और सीनियर कंसल्टेंट डॉ. आशीष उइके की टीम ने महिला का इलाज शुरू किया और जटिल सर्जरी की।
डॉक्टरों ने बताया कि पतंग के मांझे से होने वाले हादसों में आमतौर पर गर्दन प्रभावित होती है और कई बार ऐसे हादसे जानलेवा भी साबित होते हैं। पैर में इस तरह की गंभीर चोट के मामले कम देखने को मिलते हैं। डॉ. निखिल पुरी ने कहा, “मांझे से पैर को इस स्तर का नुकसान होना असामान्य है। इस मामले में पैर की नसों और खून की सप्लाई करने वाले हिस्सों को गंभीर नुकसान पहुंचा था, जिससे पैर को बचाना काफी चुनौतीपूर्ण था।”
कई घंटे चली सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने पैर की कटी नसों और दूसरे हिस्सों को ठीक किया। इसके बाद पैर में खून की सप्लाई फिर से सामान्य हो गई। डॉक्टर महिला का पैर बचाने में सफल रहे और उसे काटने की जरूरत नहीं पड़ी। फिलहाल वह डॉक्टरों की देखरेख में है और उसकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है।
यह घटना एक बार फिर प्रतिबंधित सिंथेटिक मांझे के खतरों को सामने लाती है। नायलॉन या कांच की परत चढ़े ऐसे मांझे राहगीरों, वाहन चालकों और पक्षियों के लिए गंभीर खतरा बनते हैं। ऐसे मांझे कई बार गंभीर चोटों का कारण बनते हैं।
उत्तर प्रदेश सरकार पहले ही अवैध चाइनीज मांझे की बिक्री और इस्तेमाल के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान चला रही है। लोगों से सुरक्षित विकल्प अपनाने और नियमों के उल्लंघन की जानकारी प्रशासन को देने की अपील भी की जा रही है।
प्रशासन का कहना है कि ऐसे हादसों को रोकने के लिए नियमों का सख्ती से पालन और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

