पुलिस बल को चुस्त-दुरूस्त रखने की तैयारी:
अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के दौरान कई बार अचानक विषम परिस्थितियां उत्पन्न हो जाती हैं, ऐसे में पुलिसकर्मियों के हाथ हथियार संचालन में स्वतः सिद्ध होने चाहिए। यह पहल इसी उद्देश्य से शुरू की गई है। केवल हथियार चलाना ही नहीं, बल्कि बंदूकों की साफ-सफाई, आइलिंग और उनकी तकनीकी खामियों को समय रहते पहचान कर उन्हें ठीक करने की क्षमता का भी परीक्षण किया जा रहा है।
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पुलिस अधिकारियों की सीधी निगरानी:
इस पूरी प्रक्रिया की मानिटरिंग सीधे एएसपी स्तर के अधिकारी द्वारा की जा रही है। फायरिंग रेंज और पुलिस लाइन के आर्मरी (शस्त्रागार) में आयोजित होने वाले इन साप्ताहिक सत्रों में यह देखा जाना है कि मैदानी स्तर पर तैनात कर्मी हथियारों के रखरखाव के प्रति कितने सतर्क हैं। इस अनूठी पहल से पुलिस महकमे में एक सकारात्मक प्रतिस्पर्धा और अनुशासन का माहौल देखने को मिलेगा, जिससे भविष्य में किसी भी गंभीर चुनौती से पार पाने में बल को काफी मदद मिलेगी।
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फील्ड में ड्यूटी के दौरान पुलिसकर्मियों का हथियारों से लैस होना और उनका तुरंत तकनीकी इस्तेमाल कर पाना बेहद जरूरी है। कई बार आकस्मिक परिस्थितियों में एक सेकंड की देरी भी भारी पड़ सकती है, इसलिए पुलिस बल को काम्बैट रेडी (युद्ध के लिए तैयार) रखना प्राथमिकता है। अक्सर यह देखा जाता है कि दैनिक उपयोग के अभाव में हथियार जंग लगने या तकनीकी खराबी का शिकार हो जाते हैं। साप्ताहिक अभ्यास से पुलिसकर्मी आधुनिक हथियारों की आंतरिक संरचना, उनकी साफ-सफाई और समय पर रख-रखाव की बारीकियां सीखेंगे। हथियारों को खोलने (डिसएम्बल) और जोड़ने (असेंबल) में जो कर्मी दक्ष मिलेंगे, उन्हें प्रोत्साहित किया जाएगा।
: मानसी दहिया, एएसपी / सीओ सिटी, बस्ती

