प्राण प्रतिष्ठा से अब तक बदली अयोध्या,लेकिन अभी भी कई घोषणा है अधूरे
कब दौड़ेगी सरयू में वाटर मेट्रो,कब मिलेगा क्रूज पर्यटन का पूरा लाभ?
अयोध्या।राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या को विश्वस्तरीय धार्मिक एवं पर्यटन नगरी बनाने के लिए अनेक योजनाओं की घोषणा की गई।अयोध्या के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा करोडो रुपए पानी की तरह बहाए गए।रामपथ की डिवाइडर पर लाइटों को छोड़ दिया जाए बाकी अन्य जगहों पर लगी फैंसी लाइटे अब तक शो पीस बनी हुई है।अयोध्या मे सरयू तट पर क्रूज पर्यटन,हेली टूरिज्म, वाटर स्पोर्ट्स, ग्लाइडर सेवा,अंतरराष्ट्रीय स्तर की पर्यटन सुविधाओं और रोजगार सृजन की अनेक घोषणाएं हुईं।इन परियोजनाओं में से महज कुछ परियोजनाएं धरातल पर दिखाई भी दे रही हैं,जबकि कई महत्वाकांक्षी योजनाएं आज भी कागजों से बाहर नहीं निकल सकी हैं।सरयू किनारे क्रूज संचालन, जल पर्यटन विस्तार, ग्लाइडर सेवा और अन्य साहसिक पर्यटन परियोजनाओं को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे।सवाल यह है कि इन योजनाओं का लाभ आम पर्यटक को कब मिलेगा? करोड़ों रुपये की घोषणाओं के बावजूद कई परियोजनाओं की प्रगति धीमी नजर आ रही है। करोड़ों रुपए की लागत से प्रस्तावित इस परियोजना का लाभ स्थानीय लोगों की साथ-साथ देश-विदेश से अयोध्या नगरी आने वाले श्रद्धालुओं को कब मिलेगा इसका भी अभी तक पता नहीं है। जबकि आए दिन कोई ना कोई योजनाओं की घोषणा हो जाती है वही ठीक इसके पीछे घोषित योजना अभी भी स्थानीय लोगों की माने वह महत्व कागजों तक ही सीमित रह गई है।स्थानीय लोगों के साथ द रामनगरी आए खासकर अयोध्या कैंट पर श्रद्धालुओं ने बताया कि जिस तरह उन्होंने सोचा था कि अयोध्या का विकास हुआ होगा लेकिन अभी उसे तरह का विकास नहीं दिखाई दे रहा है जैसा कि वाराणसी मथुरा में दिखाई दे रहा है। इन लोगों का मानना यह भी है कि यहां पर पार्किंग जैसी गंभीर समस्याओं का भी सामना करना पड़ता है। अयोध्या आए श्रद्धालुओं ने बताया कि प्राण प्रतिष्ठा के बाद से सिर्फ चाहे केंद्र सरकार हो या फिर राज्य सरकार जितनी भी घोषणा किया उसका असर यहां नहीं दिखाई दे रहा है जिसमें खासकर यातायात व्यवस्था सुरक्षा मूलभूत सुविधाओं की चुनौतियां भी शामिल है वही पैटर्न नगरी के रूप में विकसित हो रही अयोध्या को केवल शीला न्यास और घोषणाओं से नहीं बल्कि की गई आज की ही नहीं बल्कि पहले की भी घोषणाओं को कागजों तक की सीमित न लाकर उसे जैमिनी धरातल पर रहा है तभी रामनगरी की एक अपनी पहचान बनेगी। वही अयोध्या के लोगों का मानना है प्राण प्रतिष्ठा के बाद से यहां पर सरयू वाटर मेट्रो आधुनिक क्रम सेवा फ्लोटिंग कुंड रामायण थीम पार्क रिवर फ्रंट बिस्तर जैसी कई परियोजनाओं के बारे में दावे किए गए थे लेकिन अभी तक हुए दावे धरातल तक नहीं उतरे हैं जबकि रामनगरी में प्रतिदिन हजारों की संख्या में यहां तक की मेलों और प्रमुख पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आ रहे हैं।श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों का मानना है कि जिन परियोजनाओं को अयोध्या के पर्यटन की नई पहचान बताया गया था,उनका लाभ अभी तक पूरी तरह दिखाई नहीं दे रहा है। इन लोगों का मानना है यदि जल पर्यटन, रिवर फ्रंट और सांस्कृतिक परियोजनाएं समय पर पूरी हो जाएं तो अयोध्या देश के सबसे बड़े धार्मिक पर्यटन केंद्रों में और अधिक मजबूत पहचान बना सकती है।

